Hormuz Strait पर ईरान ने दी बड़ी खुशखबरी, चीन के लिए खोला रास्ता, क्या भारत को भी होगा फायदा
ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने गुरुवार को आधिकारिक ऐलान करते हुए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Hormuz Strait) को अमेरिका, इजराइल और उनके पश्चिमी सहयोगियों के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया है। ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB के माध्यम से जारी इस बयान ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
शनिवार से शुरू हुए सैन्य अभियान के बाद से यह जलमार्ग व्यावहारिक रूप से ठप है। हालांकि ईरान ने एक बड़ा कूटनीतिक दांव खेलते हुए केवल चीनी ध्वज वाले जहाजों Chinese-flagged vessels) को वहां से गुजरने की अनुमति दी है। तेहरान ने इसे बीजिंग के समर्थन के प्रति 'आभार' के रूप में बताया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जहां से दुनिया का 20% (एक-तिहाई) समुद्री तेल गुजरता है।
क्या भारत के लिए खुशखबरी
1980-88 के ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी यह मार्ग वाणिज्यिक जहाजों के लिए बंद नहीं हुआ था। लेकिन वर्तमान संघर्ष ने वैश्विक सप्लाई चेन को ऐसे संकट में डाल दिया है जिसका असर एशिया से लेकर यूरोप तक महसूस किया जा रहा है। यह ऐलान भारत के नजरिए से खुशखबरी ही है। दरअसल, ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, इजराइल, यूरोप और उनके पश्चिमी सहयोगियों के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। नए ऐलान के बाद यह माना जा रहा है कि भारत भी इस सख्ती से बाहर है और तेल इंडिया को भी मिलेगा।
IRGC की चेतावनी दिखते ही मार गिराएंगे
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत युद्ध की स्थिति में ईरान को इस मार्ग को कंट्रोल करने का अधिकार है। बयान में सख्त लहजे में चेतावनी दी गई है कि इस जलमार्ग में दिखने वाले अमेरिका, इजराइल, यूरोप या उनके समर्थकों के किसी भी जहाज को निश्चित रूप से निशाना बनाया जाएगा।
चीन बनाम पश्चिम: नया कूटनीतिक ध्रुवीकरण
केवल चीनी जहाजों को रास्ता देकर ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह बीजिंग को अपना सबसे बड़ा रक्षक मानता है। यह कदम अमेरिका और यूरोप को उकसाने वाला है। इससे मध्य पूर्व का युद्ध अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि चीन-रूस बनाम अमेरिका-यूरोप के बीच एक 'कोल्ड वॉर' में तब्दील हो सकता है।
'डेड एंड' बना फारस की खाड़ी
Persian Gulf (फारस की खाड़ी) भौगोलिक रूप से एक बंद रास्ता है। कुवैत, इराक और कतर जैसे देशों का समुद्री व्यापार पूरी तरह हॉर्मुज पर निर्भर है। दुबई का जेबेल अली पोर्ट, जो पूरी दुनिया के लिए सामान बांटने का हब है, अब एक टापू की तरह अलग-थलग पड़ गया है। इससे सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, अनाज और अन्य जरूरी चीजों की सप्लाई चेन भी टूट जाएगी। Edited by : Sudhir Sharma