Iran War 2026 : ईरान- इजराइल कैसे बने एक-दूसरे के दुश्मन, कभी हुआ करते थे जिगरी दोस्त
अमेरिका और इजराइल साथ मिलकर ईरान पर लगातार हमले कर रहे हैं। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत भी हो चुकी है। आज भले ही ईरान और इजराइल के रिश्ते अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सबसे कट्टर दुश्मनी के रूप में देखे जाते हों, लेकिन यह कड़वाहट एक जटिल इतिहास को छुपाए हुए है। एक दौर ऐसा भी था जब दोनों देशों के बीच गुप्त सहयोग और रणनीतिक गठबंधन हुआ करते थे। ये कभी दोस्त थे, फिर गुप्त सहयोगी बने और और अब कट्टर दुश्मन।
शाह के दौर में ईरान-इजरायल की नजदीकियां
1948 में इजराइल की स्थापना के बाद अधिकरत मुस्लिम देशों ने इसे मान्यता देने से इनकार कर दिया था। लेकिन ईरान (एक शिया बहुल देश) इसका अपवाद था। इजराइल के संस्थापक डेविड बेन-गुरियन ने अरब पड़ोसियों की नाराजगी के बावजूद ईरान से दोस्ती की नींव रखी थी। हालांकि ईरान ने आधिकारिक तौर पर इजराइल को मान्यता नहीं दी थी, फिर भी साझा रणनीतिक हितों के कारण दोनों देशों के बीच विवेकपूर्ण संबंध विकसित हुए। शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासनकाल में ईरान ने शीत युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों के साथ गठबंधन की नीति अपनाई थी। अमेरिका का करीबी सहयोगी होने के नाते, ईरान को इजराइल में एक स्वाभाविक साथी मिला।
इस्लामिक क्रांति ने सबकुछ बदल दिया
1979 तक इजराइल और ईरान के संबंध दोस्ताना थे। 1979 में अयातुल्लाह खुमैनी की इस्लामिक क्रांति ने सब कुछ बदलकर रख दिया। क्रांतिकारियों ने शाह की सत्ता उखाड़ फेंकी और इस्लामी गणराज्य स्थापित किया। खुमैनी ने खुद को 'पीड़ितों का रक्षक' बताया साथ ही अमेरिका और इजराइल के 'साम्राज्यवाद' को खारिज कर दिया। नई सरकार ने इजरायल से सभी संबंध तोड़ दिए, इजरायली पासपोर्ट अमान्य कर दिए और तेहरान के दूतावास को फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) को सौंप दिया, जो फिलिस्तीन राष्ट्र की मांग के लिए संघर्ष कर रहा था। Edited by : Sudhir Sharma