चेन्नई के विजयी कप्तान धोनी से अब नजरें टी-20 विश्वकप के मेंटर माही पर

Last Updated: शनिवार, 16 अक्टूबर 2021 (19:03 IST)
नई दिल्ली:को चौथी बार आईपीएल खिताब दिलाने के बाद महेंद्र सिंह धोनी अब में मैदान के बाहर टीम इंडिया के ‘मेंटर’ की भूमिका में होंगे और पिछले 17 वर्ष मैदान के भीतर अपने फन का लोहा मनवाने के बाद मैदान से बाहर की इस भूमिका में उन्हें देखना दिलचस्प होगा। > इसमें धोनी का काम अपने अनुभव और समझ को साझा करने का होगा लेकिन यह कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री पर निर्भर करेगा कि वह उसका इस्तेमाल कैसे करते हैं।>  भारतीय क्रिकेट में ‘मेंटर’ शब्द के व्यापक मायने हैं जो एक रणनीतिकार, प्रेरणास्रोत या सलाहकार (साउंडिंग बोर्ड) हो सकता है। धोनी के मामले में वह सलाहकार हो सकते हैं क्योंकि बड़े टूर्नामेंट नहीं जीतने के बावजूद यह भारतीय टीम लंबे समय से ‘ आटो पायलट मोड’ में है। धोनी को जानने वालों को पता है कि वह जरूरत पड़ने पर ही बोलेंगे और शास्त्री या कोहली के काम में कभी दखल नहीं देंगे।

इस टीम के अधिकांश सीनियर खिलाड़ियों के वह कप्तान रहे हैं जिन्होंने उनके कप्तान रहते पदार्पण किया और उनके मार्गदर्शन से सुपरस्टार बने।

भारतीय टीम के साथ एक महीने जुड़कर धोनी को क्या फायदा होगा । उन्हें यह आकलन करने का मौका मिलेगा कि क्या वह सीधे मेंटर बनकर अगले आईपीएल के लिये सीएसके की रिटेंशन फीस बचा सकते हैं। धोनी ने आईपीएल में अपने भविष्य को लेकर खुलकर कुछ नहीं कहा है । उन्होंने कहा है कि सीएसके में उनकी भूमिका बीसीसीआई की रिटेंशन नीति पर निर्भर होगी।

वह टीम इंडिया के डग आउट का हिस्सा होंगे और अगर उन्हें लगता है कि वह कोहली की टीम को मदद करने में सफल रहे हैं तो अगले सत्र में आईपीएल में मैदान पर मौजूद रहे बिना मेंटर की भूमिका में सीएसके के साथ हो सकते हैं।

धोनी अपने फैसलों को थोपने में विश्वास नहीं रखते। उनका मानना है कि फैसले बाध्यता में नहीं लिये जाते। बतौर सलाहकार कुछ मसलों पर उनकी राय काफी मायने रखेगी । मसलन रोहित शर्मा के साथ पारी का आगाज केएल राहुल करेंगे या ईशान किशन। चूंकि सीएसके में रूतुराज गायकवाड़ और फाफ डु प्लेसी की सलामी जोड़ी काफी कामयाब रही है।

इसके अलावा हार्दिक पंड्या को सिर्फ बल्लेबाज के रूप में उतारने या शारदुल ठाकुर को हरफनमौला के तौर पर खिलाने को लेकर भी उनसे राय ली जा सकती है। टीम संयोजन और रणनीति से जुड़े मसलों पर धोनी की राय काफी मायने रखेगी।

धोनी की मौजूदगी, जटिल बारीकियों पर नजर से हमारा आत्मविश्वास बढैगा : कोहली

भारतीय कप्तान विराट कोहली ने शनिवार को कहा कि टीम के ‘मेंटर’ महेंद्र सिंह धोनी की मौजूदगी , व्यवहारिक सलाह और जटिल बारीकियों पर नजर से टी20 विश्व कप में उनकी टीम का आत्मविश्वास बढेगा।

धोनी को पिछले महीने ही बीसीसीआई ने टी20 विश्व कप में भारत की 15 सदस्यीय टीम का ‘मेंटर’ बनाया था। टूर्नामेंट से पहले मीडिया से बातचीत में कोहली ने धोनी की नियुक्ति पर प्रसन्नता जताई।

कोहली ने आईसीसी द्वारा आयोजित मीडिया सत्र में कहा ,‘‘ उनके पास अपार अनुभव है । वह खुद भी काफी रोमांचित हैं । वह हमेशा ही हम सबके लिये मेंटर रहे हैं । अपने कैरियर की शुरूआत में ही इतना बड़ा टूर्नामेंट खेल रहे युवाओं को काफी फायदा मिलेगा ।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ जटिल बारीकियों पर उनकी नजर और व्यवहारिक सलाह से हमें खेल को एक या दो प्रतिशत बेहतर करने में मदद मिलेगी । उनके आने से बहुत खुश हूं । उनकी मौजूदगी से मनोबल और आत्मविश्वास दोनों बढेगा ।’

टी20 विश्व कप 2007 से 2016 तक कप्तान रहे धोनी

साल 2007 में महेंद्र सिंह धोनी को कप्तानी सौंप कर बोर्ड ने भारतीय क्रिकेट का भविष्य बदल कर रख दिया था। पूरे टूर्नामेंट में भारत सिर्फ न्यूजीलैंड से मैच हारी थी। लीग मैच के बाद भारत ने पाकिस्तान को फाइनल में 5 रनों से हराकर पहला विश्व टी-20 जीता था।

हालांकि इसके बाद लगातार 3 टी-20 विश्वकप में टीम इंडिया का प्रदर्शन लचर रहा। साल 2009, साल 2010 और साल 2012 में भारतीय टीम सेमीफाइनल में प्रवेश नहीं कर पायी।

साल 2014 में भारतीय टीम लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही थी। फाइनल में पहुंचने के बाद वह श्रीलंका के खिलाफ बड़ा स्कोर नहीं बड़ा सकी। यह फाइनल मलिंगा के अंतिम ओवरों के लिए आज भी जाना जाता है। फाइनल को 5 विकेट से जीत श्रीलंका ने पहला टी-20 विश्वकप जीता।

साल 2016 में भारत क्वार्टफाइनल तक भी ना पहुंच पाता अगर धोनी अंतिम गेंद पर बांग्लादेश के रहमान को रनआउट नहीं कर पाते। 2 रनों से जीता हुआ यह मैच आज भी फैंस के दिल में ताजा है। भारत ने इस विश्वकप में सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। हालांकि सेफीफाइनल में वेस्टइंडीज के हाथों भारत को 7 विकेट से हार मिली जिसने यह विश्वकप भी जीता।



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