कोर्ट का लक्ष्य सेन के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला रद्द करने से इंकार
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने आयु-समूह टूर्नामेंटों के लिए जन्म प्रमाण पत्र बनाने के आरोप में भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन, चिराग सेन, उनके माता-पिता और कोच यू विमल कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले को रद्द करने से इंकार कर दिया है।न्यायमूर्ति एमजी उमा ने आदेश सुनाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया सबूत जन्म प्रमाण पत्र में हेरफेर में मिलीभगत का संकेत देते हैं, जिससे इस स्तर पर मामले को रद्द करना अनुचित हो जाता है।
गौरतलब है कि एमजी नागराजा द्वारा ने सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के जरिये प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाया था कि चिराग सेन के जन्म प्रमाण पत्र में उनकी जन्मतिथि जनवरी-फरवरी 1996 की वास्तविक जन्म अवधि के बजाय 22 जुलाई 1998 दिखाने के लिए बदल दी गई थी।
लक्ष्य सेन के जन्म रिकॉर्ड के संबंध में भी इसी तरह के आरोप लगाए गए थे। आरोप है कि कथित तौर पर आयु-प्रतिबंधित टूर्नामेंट और सरकारी लाभों के लिए गलत पात्रता स्थापित करने के लिए आयु प्रमाण पत्र में हेरा फेरी की गयी।
शिकायत के बाद, ट्रायल कोर्ट ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत जांच का निर्देश दिया, जिसके बाद बेंगलुरु के हाई ग्राउंड्स पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई।उच्च न्यायालय ने आरटीआई-आधारित साक्ष्य को वाजिब मानते हुयेर कहा कि जांच बिना किसी बाधा के आगे बढ़नी चाहिए। इसने मामले को रद्द करने की मांग करने वाली याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि आगे की जांच को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त सामग्री है।
कई अवसरों के बावजूद, याचिकाकर्ताओं के वकील वरुण जोशी ने दलीलें पेश नहीं कीं। दूसरी ओर, कर्नाटक राज्य का प्रतिनिधित्व उच्च न्यायालय सरकारी वकील (HCGP) वेंकट सत्यनारायण ने किया, जबकि वकील के विजय कुमार शिकायतकर्ता की ओर से पेश हुए।
(एजेंसी)