Solar Eclipse 2021: दिनांक 4 दिसंबर को साल का अंतिम सूर्य ग्रहण, यहां जानें हर जरूरी बात

Kankanakruti Solar Eclipse 2021
पुनः संशोधित गुरुवार, 2 दिसंबर 2021 (12:55 IST)
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Solar Eclipse 2021 : वर्ष 2021 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 4 दिसंबर शनिवार (Surya Grahan 2021 Date) को लगेगा। यह सूर्य ग्रहण कब लगेगा और कहां दिखाई देगा? किन राशियों पर रहेगा शुभ और किन पर अशुभ आओ जानते हैं हर जरूरी बात।


1. कहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण ( where will the solar eclipse be visible ) : साल का आखिरी सूर्य ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका और अटलांटिक के दक्षिणी भाग के लोगों को दिखाई देगा।

2. किस समय दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2021 Timing) : सूर्य ग्रहण 4 दिसंबर की सुबह 10 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगा, जो दोपहर 03 बजकर 07 मिनट पर समाप्त होगा।

3. किन राशियों पर होगा शुभ असर : 1. वृषभ (Taurus), 2. मिथुन (Gemini), 3. सिंह (Leo), 4. कन्या (Virgo), 5. मकर (Capricorn) और 6. कुंभ (Aquarius) राशि पर रहेगा इसका शुभ असर।
4. किन राशियों पर होगा अशुभ असर : 1. मेष (Aries), 2. कर्क (Cancer), 3. तुला (Libra), 4. वृश्चिक (Scorpio), 5. धनु (Sagittarius) और 6. मीन (Pisces) राशियों पर रहेगा इसका अशुभ असर।

5. सूतक काल (sutak kaal) : यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा इसलिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा, परंतु फिर भी सूर्य ग्रहण के दिन किए जाने वाले कार्य जान लें क्योंकि ग्रहण का असर तो संपूर्ण धरती पर ही होगा। सूर्य ग्रहण के प्रारंभ होने से 12 घंटे पूर्व ही सूतक काल प्रारंभ हो जाता है।

6. शनि अमावस्या को है सूर्य ग्रहण ( Shani Amavasya ) : यह सूर्य ग्रहण शनि अमावस्या के दिन देखा जाएगा। शनिवार को जब भी अमावस्या आती है तो उसे शनि अमावस्या कहते हैं जिसका ज्योतिष में खासा महत्व रहता है।
Solar Eclipse 2021
7. चार घंटे तक दिखाई देगा सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse 2021 Timing) : सूर्य ग्रहण 4 दिसंबर की सुबह 10 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगा, जो दोपहर 03 बजकर 07 मिनट पर समाप्त होगा। यह सूर्य ग्रहण लगभग चार घंटे तक चलेगा। इसे चार घंटे तक देखा जा सकेगा।

8. सूर्य ग्रहण के नियम ( Sutak kaal ke Niyam ) : इस दिन पानी को छान कर और उसमें तुलसी पत्ता डालकर ही सेवन करें। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दिन सावधान रहते हुए घर के बाहर नहीं निकलना चाहिए। इस दिन भजन, ध्यान या प्रार्थना करना चाहिए। इस दिन हो सके तो योग या साधना करना चाहिए। इस दिन सूर्य देव के बीज मन्त्र का जप करना चाहिए। इस दिन सूर्य ग्रहण के बाद घर में सभी ओर जल से शुद्धिकरण करें। ग्रहण के तुरंत बाद स्नान और पूजा पाठ करें। ग्रहण के बाद ही भोजन बनाएं और खाएं। भोजन में तुलसी का पत्ता जरूर मिला लें। ग्रहण में उपरोक्त सावधानी नहीं रख रहे हैं तो कम से कम खानपान और शुद्धिकरण में सावधानी जरूर रखें। इस दिन मंदिर में प्रतिमा का शुद्धि करण भी किया जाना चाहिए।
9. एक्लिप्स ग्लास से देखें सूर्य ग्रहण ( Eclipse glasses ):
सूर्य ग्रहण देखने के लिए अपनी आंखों की सुरक्षा के लिए एक्लिप्स ग्लास का इस्तेमाल करना चाहिए। घर के बने फिल्टर या पारंपरिक धूप के चश्मे का इस्तेमाल न करें इससे आंखें खराब हो सकती है। जो बच्चे ग्रहण देखना चाहते हैं वे माता-पिता की देखरेख में ऐसा कर सकते हैं, क्योंकि यह तय करना जरूरी है कि बच्चे किस तरह के ग्लास से यह देख रहे हैं।
10. क्या होता है सूर्य ग्रहण ( What is solar eclipse ) : सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है। सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य आंशिक अथवा पूर्ण रूप से चंद्रमा द्वारा आवृत्त हो जाए। वैज्ञानिकों के अनुसार धरती सूरज की परिक्रमा करती है और चंद्रमा धरती की परिक्रमा करता है। जब सूर्य और धरती के बीच चंद्रमा आ जाता है तो वह सूर्य की रोशनी को कुछ समय के लिए ढंक लेता है। इस घटना को ही सूर्य ग्रहण कहते हैं।
11. पूर्ण सूर्य ग्रहण ( khagras surya grahan ) : चंद्रमा जब सूर्य को पूर्ण रूप से ढंग लेता है तो ऐसे में चमकते सूरज की जगह एक काली तश्तरी-सी दिखाई है। इसमें सबसे खूबसूरत दिखती है 'डायमंड रिंग।' चंद्र के सूर्य को को पूरी तरह से ढंकने से जरा पहले और चांद के पीछे से निकलने के फौरन बाद काली तश्तरी के पीछे जरा-सा चमकता सूरज हीरे की अंगूठी जैसा दिखाई देता है। संपूर्ण हिस्से को ढंकने की स्थिति खग्रास ग्रहण कहलाती है।

12. आंशिक सूर्य ग्रहण ( Partial solar eclipse full eclipse ) :
आंशिक ग्रहण तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा एक सीधी लाइन में नहीं होते और चंद्रमा सूर्य के एक हिस्से को ही ढंक पाता है। यह स्थिति खण्ड-ग्रहण कहलाती है खंडग्रास का अर्थ अर्थात वह अवस्था जब ग्रहण सूर्य या चंद्रमा के कुछ अंश पर ही लगता है। अर्थात चंद्रमा सूर्य के सिर्फ कुछ हिस्से को ही ढंकता है।

13. वलयाकार सूर्य ग्रहण ( Annular solar eclips ) : सूर्य ग्रहण में जब चंद्रमा पृथ्वी से बहुत दूर होता है और इस दौरान पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है। ऐसे में सूर्य के बाहर का क्षेत्र प्रकाशित होने के कारण कंगन या वलय के रूप में चमकता दिखाई देता है। कंगन आकार में बने सूर्य ग्रहण को ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं।
14. सूर्य ग्रहण का मंत्र ( Surya grahan ka mantra ) : ॐ रं रवये नमः या ॐ घृणी सूर्याय नमः 108 बार (1 माला) जाप करें। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें या गायत्री मंत्र का जाप करें।



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