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श्री हरसिद्धि देवी : जहां 11 बार शीश काट कर चढ़ाए थे राजा विक्रम ने
Friday,September 22, 2017
गढ़ की कालिका देवी : कालिदास की आराध्या
उज्जैन में होती है कई सुंदर धार्मिक यात्राएं
मंगलनाथ : जहां उत्पत्ति हुई है मंगल की
काल भैरव प्रतिमा मदिरापान करती हैं लेकिन कैसे यह कोई नहीं जानता
रहस्यमयी है राजा भर्तृहरि की गुफा
Tuesday, April 26, 2016
उज्जयिनी की प्राचीन वेधशाला : सितारों के आगे जहां और भी है
Monday, April 25, 2016
कालियादह महल : वैभवपूर्ण इतिहास
Sunday, April 24, 2016
चौबीस खंबा माता : महाकाल-वन का प्रवेश द्वार
Sunday, April 24, 2016
सिंहस्थ : आकर्षण का केन्द्र रहेंगे उज्जैन के प्रमुख दर्शनीय स्थल
Saturday, April 16, 2016
उज्जैन के 16 मुख्य धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल
Saturday, April 9, 2016
श्री महाकालेश्वर मंदिर : महिमा अपरंपार
Thursday, February 25, 2016
उज्जैन महाकाल मंदिर का संपूर्ण परिचय और इतिहास
Monday, February 8, 2016
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मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान
वृषभ राशि के मंगल का 24 जुलाई 2026 को रोहिणी नक्षत्र से मृगशिरा नक्षत्र में गोचर होगा, जहां वे 12 अगस्त तक रहेंगे। मंगल के इस नक्षत्र परिवर्तन के चलते 3 राशि के लोगों को 12 अगस्त तक रहना होगा सावधान। चलिए जानते हैं कि किन राशि 3 राशियों को रहना होगा सावधान।
Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म
देकार्त के जीवन का सबसे बड़ा ध्येय यह था कि दर्शनशास्त्र को भी गणित (Mathematics) की तरह सटीक, अकाट्य और संदेह से परे बनाया जाए। वे एक ऐसा सार्वभौमिक सत्य खोजना चाहते थे, जिस पर कोई भी प्रश्नचिह्न न लगा सके। इसी विचार ने बुद्धिवाद (Rationalism) की नींव रखी। आइए, देकार्त के इस अद्भुत दार्शनिक चिंतन के 4 प्रमुख स्तंभों को गहराई से समझते हैं।
मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव
वृषभ राशि के मंगल का 24 जुलाई 2026 को रोहिणी नक्षत्र से मृगशिरा नक्षत्र में गोचर होगा, जहां वे 12 अगस्त तक रहेंगे। ज्योतिष की दुनिया में एक बड़ा हलचल भरा मोड़ आ चुका है- बुध ग्रह अपनी ही प्रिय राशि मिथुन में सीधे (मार्गी) चलने लगे हैं। अब जब बुद्धि और संवाद का कारक ग्रह सीधी चाल चलेगा, तो जाहिर है आपकी सोच, बातचीत और फैसलों की रफ्तार भी बदल जाएगी।
Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?
Raksha Bandhan 2026: हिन्दू पंचांग के अनुसार, रक्षा बंधन का पर्व प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में इसे मिठास और खुशियों का उत्सव माना गया है। यह भाई-बहन के प्रेम का पावन पर्व है। यहां जानें रक्षा बंधन 2026 कब है? जानें रक्षा बंधन 2026 की तारीख...
चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय
Chaturmas Astrology Remedies: हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार चातुर्मास यह चार महीनों का पवित्र काल भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने से प्रारंभ होकर देवउठनी एकादशी पर समाप्त होता है। यदि आप अपनी राशि के अनुसार चातुर्मास में कुछ विशेष उपाय करते हैं, तो जीवन में आ रही और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। यहां जानें 12 राशियों के लिए चातुर्मास के अचूक उपाय...
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धर्म संसार
मंगल और शनि का त्रिकोण दृष्टि योग, 5 राशियों के लिए पराक्रम दिखाने का समय
वर्तमान में मंगल और शनि का त्रिकोण दृष्टि योग बना है। वैदिक और पश्चिमी दोनों ज्योतिषीय दृष्टियों से यह एक बेहद शुभ और संतुलित स्थिति मानी जाती है। मंगल कर्क में और शनी मीन में है। ज्योतिष में मंगल को साहस, ऊर्जा, भूमि और पराक्रम का कारक माना जाता है, जबकि शनि को कर्म, अनुशासन, न्याय और स्थायित्व का कारक माना जाता है। जब मंगल और शनि 120 डिग्री यानी शुभ त्रिकोण (Trine) कोण पर होते हैं, तो यह दोनों ग्रहों का एक अत्यंत दुर्लभ और अनुकूल समन्वय बनाता है। इस स्थिति में मंगल की गति और शनि का संतुलन मिलकर जातक को योजनाबद्ध सफलता दिलाते हैं। गोचर या कुंडली में इस त्रिकोण स्थिति का मुख्य रूप से अग्नि और वायु तत्व की राशियों पर विशेष शुभ प्रभाव पड़ता है-
शारदीय नवरात्रि 2026: मां कालरात्रि की पूजा विधि, मंत्र, आरती और पौराणिक कथा जानें
kalratri mata: नवरात्रि के सातवें दिन (सप्तमी तिथि) माँ भगवती के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि की उपासना की जाती है। 'काल' का तात्पर्य समय अथवा मृत्यु से है और 'रात्रि' का अर्थ अंधकार से है। स्वयं काल का अंत करने वाली और अज्ञानता रूपी अंधकार का सर्वनाश कर प्रकाश फैलाने वाली यह महाशक्ति 'कालरात्रि' कहलाती हैं। चलिए जानते हैं माता का मंत्र, पूजा विधि, आरती और कथा।
विजयादशमी का महाउपाय: 100 रुपए की इस एक दिव्य वस्तु से चमक जाएगी आपकी किस्मत
अधर्म पर धर्म की विजय का पावन पर्व दशहरा (विजयादशमी) केवल रावण दहन या शस्त्र पूजन तक सीमित नहीं है। तंत्र, ज्योतिष और सनातन परंपरा में इस दिन को सिद्ध मुहूर्त माना गया है। मान्यता है कि इस दिन किया गया एक छोटा सा उपाय जीवन के सारे आर्थिक कष्ट मिटा सकता है। क्या आप जानते हैं कि महज 100 रुपए के बजट में मिलने वाला 'लाल चंदन' (रक्त चंदन) आपके घर में धन-वैभव और खुशहाली के नए द्वार खोल सकता है? आइए जानते हैं इस चमत्कारी उपाय की पूरी विधि और इसके पीछे का धार्मिक रहस्य।
शारदीय नवरात्रि: व्रत पारण की तिथियाँ एवं सही नियम
यदि आपने भी नवरात्रि में व्रत रखा है तो उस व्रत को खोलने के कुछ जरूरी नियम भी है। शारदीय नवरात्रि के व्रत का पारण (उपवास खोलना) केवल धार्मिक निष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि यह शरीर और स्वास्थ्य से भी गहराई से जुड़ा है। पारण कब और कैसे करना चाहिए और इसके क्या नियम है? चलिए जानते हैं इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी।
दशहरा 2026: शस्त्र पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? जानें सही विधि और धार्मिक महत्व
Dussehra 2026: अश्विन माह की दशमी के दिन दशहरा का पर्व मनाया जाता है जिसे विजयादशमी भी कहते हैं। इस दिन कई घरों में शस्त्र पूजा की जाती है। शस्त्र पूजा से पहले अपराजिता देवी की पूजा करते हैं। शस्त्र पूजा अभिजीत या विजय मुहूर्त में करते हैं। चलिए जानते हैं आयुध पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और देवी अपराजिता की पूजा का महत्व।
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