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श्री हरसिद्धि देवी : जहां 11 बार शीश काट कर चढ़ाए थे राजा विक्रम ने

शुक्रवार,सितम्बर 22, 2017
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कहा जाता है कि 'महाकवि कालिदास' की यह आराध्य देवी हैं। प्रवेश-द्वार के आगे ही सिंह वाहन की प्रतिमा बनी हुई है। आसपास दो तरफ धर्मशालाएं हैं। इसके बीच में देवीजी का मंदिर है।
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धर्म और आध्यात्म की सुंदर नगरी उज्जैन में साल भर पवित्र गतिविधियां आयोजित होती रहती हैं। कइ तरह की यात्राएं इनमें शामिल हैं जिन्हें स्थानीय निवासी जत्रा कहते हैं। आइए डालें एक नजर...
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अनेक प्रमाणों से मंगल की जन्मभूमि उज्जैन जानी जाती है। ('यत्रहि मंगल जनिभू: सावती मंगल स्थिते र्हेतु:')। यहां मंगल की उत्पत्ति हुई है अत: सर्वदा मंगल ही होता रहता है।
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कालभैरव की मूर्ति भव्य एवं प्रभावोत्पादक है। मूर्ति को मद्यपान कराया जाता है। मुख में कोई छिद्र नहीं है। यह यहां का आश्चर्यपूर्ण चमत्कार है। कहते हैं कि यह मंदिर 'राजा भद्रसेन' का बनाया हुआ है।
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यहां भर्तृहरि की समाधि है। परम तप: पूत महाराज भर्तृहरि सम्राट विक्रम के ज्येष्ठ भ्राता थे। ये संस्कृत-साहित्य के प्रकांड पंडित थे। राग से विराग लेकर उन्होंने नाथ संप्रदाय की दीक्षा ले ली थी।
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अधिकांश लोग जिस स्थान को 'यंत्र-महल' के नाम से जानते हैं, वह वेधशाला उज्जैन के दक्षिण में शिप्रा नदी के दक्षिण तट के उन्नत भू-भाग पर स्थित है। पुरातन काल में उज्जैन ज्योतिष-विद्या का प्रमुख केंद्र स्थल रहा है। भू-मध्य रेखा यहीं से होकर गई है।
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भैरवगढ़ के किले के निकट से ही इस मनोहर दर्शनीय स्थान की ओर मार्ग जाता है। इस भव्य प्रासाद का नाम कालियादह महल है। 'अवन्ति महात्म्य' में लिखे अनुसार यहां ब्रह्मकुंड और सूर्य नारायण का मंदिर था।
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'चौबीस खंबा' नामक स्थान महाकालेश्वर से बाजार की ओर जाते समय मार्ग में है। यह किसी द्वार का अवशेष है और बनावट बहुत प्राचीन मालूम होती है। यहां इसे विक्रमादित्य का द्वार कहा जाता है, परंतु यह ठीक नहीं है।
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सिंहस्थ-2016 महाकुंभ में आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए उज्जैन के प्रमुख मन्दिर एवं पर्यटन स्थल आकर्षण का केन्द्र रहेंगे। यहां आने वाले श्रद्धालु इन मन्दिरों एवं स्थलों पर जाकर मन की शान्ति एवं आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
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उज्जैन के प्राचीन मंदिर एवं पूजा स्थल जहां एक ओर पुरातत्व शास्त्र की बहुमूल्य धरोहर हैं, वहीं दूसरी ओर ये हमारी आस्‍था एवं विश्वास के आदर्श केंद भी हैं।
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उज्जयिनी के दर्शनीय स्थानों में महाकालेश्वर का स्थान सर्व-प्रमुख है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में महाकालेश्वर की गणना है। इसके अतिरिक्त समस्त मानव लोक के स्वामी होने का भी पुराणों में उल्लेख है।
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महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन में वर्ष 2016 में सिंहस्थ महाकुंभ का भी आयोजन होने जा रहा हैं। महाकालेश्वर उज्जयिनी में स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजित हैं, इनके दर्शनमात्र से व्यक्ति धन्य हो जाता है। धर्मयात्रा की इस कड़ी में हम आपको लेकर चल रहे हैं ...
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