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गुरु गोविंद सिंह की ये 6 विशेषताएं आपको पता होना चाहिए....

Updated: मंगलवार, 19 जनवरी 2021 (12:52 IST)
परोपकारी गुरु गोविंद सिंह जी में सबसे बड़ी बात यह थी कि वे अपने आपको औरों जैसा सामान्य व्यक्ति ही मानते थे। गुरु गोविंद सिंह जी के बारे में लिखना मुश्किल है, क्योंकि साहिब-ए-कलाम बादशाह दरवेश गुरु गोविंद सिंह जैसा न कोई हुआ और न कोई होगा।
 
एक पुत्र के रूप में- आपके जीवन के बारे में लिखते समय यह समझ में नहीं आता है कि आपका जीवन किस पक्ष में लिखा जाए। अगर आपको एक पुत्र के रूप में देखा जाए तो आपके जैसा कोई पुत्र नहीं जिसने अपने पिता को हिंदू धर्म की रक्षा के लिए शहीद होने का आग्रह किया हो।
 
पिता के रूप में- अगर आपको पिता के रूप में देखें तो भी आपके जैसा महान पिता कोई नहीं, जिन्होंने खुद अपने बेटों को शस्त्र दिए और कहा कि जाओ मैदान में दुश्मन का सामना करो और शहीदी जाम को पिओ।
 
लेखक के रूप में- अगर आपको लिखारी के रूप में देखा जाए तो आप धन्य हैं। आपका दसम ग्रंथ, आपकी भाषा, आपकी इतनी ऊंची सोच को समझ पाना आम बात नहीं है।
 
त्यागी के रूप में- अगर एक त्यागी के रूप में आपको देखा जाए तो आपने आनंदपुर के सुख छोड़, मां की ममता, पिता का साया, बच्चों के मोह को आसानी से धर्म की रक्षा के लिए त्याग दिया।
 
गुरु के रूप में- आपके जैसा गुरु भी कोई नहीं जिसने अपने को सिखों के चरणों में बैठकर अमृत की दात मंगाई और वचन किया कि मैं आपका सेवक हूं जो हुकूम दोगे मंजूर करूंगा। समय आने पर आपने सिखों के हुकूम की पालना भी की। आपने अपने जीवन का हर पल परोपकार में व्यतीत किया। आपके जितने गुणों का बखान किया जाए वो कम ही है। अंत में बस इतना ही कि 'जैसा तू तैसा तू ही क्या किछ उपमा दी जें।' 
 
योद्धा के रूप में- अगर आपको एक योद्धा के रूप में देखें तो ‍हैरानी होती है कि आपने अपने हर तीर पर एक तोला सोना लगवाया हुआ था। जब इस सोने का कारण आपसे सिखों ने पूछा कि मरते तो इससे दुश्मन होते है फिर ये सोना क्यों? 
 
तो आपका उत्तर था कि मेरा कोई दुश्मन नहीं है। मेरी लड़ाई जालिम के जुल्म के खिलाफ है। इन तीरों से जो कोई घायल होंगे वो इस सोने की मदद से अपना इलाज करवा कर अच्छा जीवन व्यतीत करें और अगर उनकी मौत हो गई तो उनका अंतिम संस्कार हो सकें।

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