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मंगलागौरी व्रत : जानिए प्रथम व्रत पूजनविधि‍

हिंदू धर्म में कई तरह के पर्व, व्रत, उपवास, पूजन आदि सम्मिलित हैं, जिन्हें अलग-अलग विशेष महत्व एवं उद्देश्य के लिए किया जाता है। श्रावण मास से इन व्रत-पर्वेां की शुरूआत हो जाती है। श्रावण मास में किया जाने वाला ऐसा ही एक व्रत है, मंगलागौरी व्रत।


 
इस व्रत की शुरूआत श्रावणमास के प्रथम मंगलवार से होती है, जिसका आरंभ कर निरंतर पांच वर्षों तक प्रत्येक श्रावण के सभी मंगलवार को इस व्रत को किया जाता है। मां मंगलागौरी का यह व्रत विशेष रूप से सुहागन महिलाएं, मंगलमय दांपत्य जीवन के लिए करती हैं। 

श्रावण के प्रथम मंगलवार को किए जाने वाले मंगलागौरी व्रत को करने के लिए सर्वप्रथम यह संकल्प लें - कि मैं पुत्र- पौत्र, सौभाग्य वृद्धि एवं श्री मंगलागौरी की कृपा प्राप्ति के लिए यह व्रत का संकल्प लेती हूं।
 

 
संकल्प लेने के पश्चात चौक पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर मां मंगलागौरी का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। अब मां के चित्र अथवा प्रतिमा के आगे आटे का बना सोलह बत्त‍ियों वाला घी का दीपक लगाएं, तत्पश्चात निम्नलिखि‍त मंत्र द्वारा मां मंगलागौरी का आह्वान करें - 
कुंकुमागुरूलिप्तांगा सर्वाभरणभूषि‍ताम् ।
नीलकंठप्रियां गौरीं वंदेअहं मंगलाह्याम ।।
 
मंत्रोच्चार के बाद मां मंगलागौरी का षोडशोपचार पूजन करें। इसके बाद मां को सोलह माला, लड्डू, सोलह फूल, पांच प्रकार के मेवा सोलह बार, सात तरह के अनाज सोलह बार, जीरा सोलह बार, धनिया, पान, सुपारी, लौंग और इलायची 16-16 की संख्या में, सुहाग के सामान के साथ चढ़ाएं और 16 चूड़ि‍यां भी चढ़ाएं।
सभी सामान मां मंगलागौरी को चढ़ाने के पश्चात् मंगलागौरी व्रत कथा का श्रवण करें। 

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