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शिवलिंग के 6 प्रकार, जानिए

Updated: मंगलवार, 3 अगस्त 2021 (19:03 IST)
शिव का अर्थ शुभ और लिंग का अर्थ ज्योतिपिंड। शिवलिंग 'ब्रह्माण्ड' या ब्रह्मांडीय अंडे के आकार का प्रतिनिधित्व करता है। दो प्रकार के शिवलिंग होते हैं। पहला उल्कापिंड की तरह काला अंडाकार लिए हुए। इस तरह के शिवलिंग को ही ज्योर्तिलिंग कहते हैं। दूसरा मानव द्वारा निर्मित पारे से बना शिवलिंग होता है। इसे पारद शिवलिंग कहा जाता है। शिवलिंग ब्रह्मांड और ब्रह्मांड की समग्रता का प्रतिनिधित्व करता है। ब्रह्मांड अंडाकार ही है जो एक अंडाकार शिवलिंग की तरह नजर आता है।
 

 
शिवलिंग के प्रकार ( Kinds of Shivalinga ) शिवलिंग के प्रमुख दो प्रकार अंडाकार और पारद शिवलिंग के अलावा शिवलिंग के मुख्‍यत: 6 प्रकार बताए गए हैं।
 
1.देवलिंग:- जिस शिवलिंग को देवताओं या अन्य प्राणियों द्वारा स्थापित किया गया हो, उसे देवलिंग कहते हैं। वर्तमान समय में धरती पर मूल पारंपरिक रूप से यह देवताओं के लिए पूजित है।
 
2.आसुरलिंग:- असुरों द्वारा जिसकी पूजा की जाए वह असुर लिंग। रावण ने एक शिवलिंग स्थापित किया था, जो असुर लिंग था। देवताओं से द्वैष रखने वाले रावण की तरह शिव के असुर या दैत्य परम भक्त रहे हैं। 
 
3.अर्शलिंग:- प्राचीन काल में अगस्त्य मुनि जैसे संतों द्वारा स्थापित इस तरह के शिवलिंग की पूजा की जाती थी।
 
4.पुराणलिंग:- पौराणिक काल के व्यक्तियों द्वारा स्थापित शिवलिंग को पुराण शिवलिंग कहा गया है। इस लिंग की पूजा पुराणिकों द्वारा की जाती है।
 
5.मनुष्यलिंग:- प्राचीनकाल या मध्यकाल में ऐतिहासिक महापुरुषों, अमीरों, राजा-महाराजाओं द्वारा स्थापित किए गए शिवलिंग को मनुष्य शिवलिंग कहा गया है।
 
6.स्वयंभूलिंग:- भगवान शिव किसी कारणवश स्वयं शिवलिंग के रूप में प्रकट होते हैं। इस तरह के शिवलिंग को स्वयंभू शिवलिंग कहते हैं। भारत में स्वयंभू शिवलिंग कई जगहों पर हैं। वरदान स्वरूप जहां शिव स्वयं प्रकट हुए थे।
 
अगले पन्ने पर पर शिवलिंग के अन्य प्रकार और उनकी पूजा का महत्व....
 

भक्त लोग भगवान शिव के प्रतिक शिवलिंग को अपनी श्रद्धाअनुसार भिन्न भिन्न तरीके से बनाकर उनकी पूजा अर्चना करते हैं। भगवान राम ने भी एक शिवलिंग रामेश्वरम में बनाया था। कहते हैं कि यह एक विशेष प्रकार की रेत का था जिसने बाद में ठोस रूप ले लिया था। शिवलिंग के निम्न प्रकारों के अलावा भी स्फटिक, आंवलें, कपूर आदि से बने शिवलिंग की पूजा भी होती है। सभी का अलग अलग महत्व है।
1.पारद शिवलिंग:- पारद शिवलिंग अक्सर घर, ऑफिस, दूकान आदि जगहों रखा जाता है। इस शिवलिंग की पूजा अर्चना करने से जीवन में सुखशांति और सौभाग्य प्राप्त होता हैं। 
 
2.मिश्री शिवलिंग:- यह शिवलिंग चीनी या मिश्री से बना होता हैं। कहते हैं कि इस की पूजा करने से रोगों का नाश होकर पीड़ा से मुक्ति मिलती हैं।
 
3.जौं और चावल से बने शिवलिंग:- पारिवारिक समृद्धि के लिए इसका पूजना होता हैं। जो दम्पति संतानसुख से वंचित हैं उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती हैं।
 
4.भस्म शिवलिंग:- यज्ञ की भस्म से बनाए गए इस शिवलिंग से सिद्धियों की होती है। इसकी पूजा अक्सर अघोरी सम्प्रदाय के लोग करते हैं।
 
5.गुड़ शिवलिंग:- गुड़ और अन्न से मिल कर बने इस शिवलिंग की पूजा करने से कृषि और अन्न उत्पादन में वृद्धि होती हैं।
 
6.:फल-फूल के शिवलिंग:- फूल से बने शिवलिंग की पूजा करने से भूमि-भवन से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा मिलता हैं। वहीं, फल से बने शिवलिंग की पूजा करने से घर में अन्न-जल आदि में बरकत बनी रहती।
 
7.स्वर्ण-रजत से बने शिवलिंग:- सोने और चांदी के धातु से बने शिवलिंग से सुख-समृद्धि तथा धन वैभव की प्राप्ति होती हैं।
 
8.बिबर मिटटी के शिवलिंग:- बिबर की मिटटी से बने शिवलिंग की पूजा करने से विषैले प्राणी जैसे सर्प-बिच्छू आदि के भय से मुक्ति मिलती हैं।
 
9.दही से बने शिवलिंग:- दही को कपड़े में बांध कर बनाया गया शिवलिंग सुख, समृद्धि और धन संपत्ति की प्राप्ति के लिए होता हैं।
 
10.लहसुनिया शिवलिंग:- लहसुनिया से बने शिवलिंग की पूजा से हमें हमारे शत्रु पर विजय प्राप्ति की समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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