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श्रावण मास हरियाली अमावस्या पर करें पितृदोष, कालसर्पदोष और शनि दोष से मुक्ति के उपाय

Updated: मंगलवार, 11 अगस्त 2026 (17:12 IST)
श्रावण मास में आने वाली अमावस्या को श्रावणी अमावस्या कहते हैं, इस बार यह 12 अगस्त 2026, बुधवार को मनाई जा रही है। सावन श्रावण मास की हरियाली अमावस्या भगवान शिव, माता पार्वती और पितरों को समर्पित एक अत्यंत पवित्र तिथि है। इस दिन पौधा रोपण के साथ-साथ स्नान, दान और पूजा-पाठ करने से कुंडली में मौजूद पितृदोष, कालसर्पदोष और शनि दोष के दुष्प्रभावों से स्थायी राहत मिलती है। यदि आपकी कुंडली में ये दोष परेशान कर रहे हैं, तो हरियाली अमावस्या के दिन इन विशेष उपायों को अवश्य करें।
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1. पितृदोष मुक्ति के उपाय (पितृ तर्पण व दान)

पीपल और बरगद का पौधा लगाएं: इस दिन पीपल, बरगद, नीम या तुलसी का पौधा किसी सार्वजनिक स्थान या मंदिर में लगाएं और उसकी देखभाल का संकल्प लें। पीपल में पितरों का वास माना जाता है।
तिल और जल से अर्घ्य: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तांबे के पात्र में जल, काले तिल और गंगाजल मिलाकर पितरों को अर्घ्य दें (तर्पण करें)।
पितृ शांति दीपदान: शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और पितरों की आत्मा की शांति व आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करें।
भोजन दान: ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को काले तिल, उड़द की दाल, वस्त्र और भोजन दान करें।
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2. कालसर्पदोष शांति के उपाय (शिवलिंग व नागदेव पूजा)

चांदी के नाग-नागिन का जलप्रवाह: तांबे या चांदी का एक छोटा नाग-नागिन का जोड़ा लेकर दूध और गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद इसे किसी पवित्र नदी या बहते जल में प्रवाहित कर दें।
शिवलिंग पर दूध-जल का अभिषेक: पास के शिव मंदिर जाकर तांबे के लोटे में कच्चा दूध, जल और थोड़े से काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें।
सर्प गायत्री मंत्र का जाप: जल चढ़ाते समय "ॐ नवकुलाय विद्यमहे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्" या "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
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3. शनि दोष मुक्ति के उपाय (साढ़ेसाती व ढैया शांति)

शनिदेव पर सरसों के तेल का अभिषेक: शनि मंदिर में जाकर शनिदेव की मूर्ति पर सरसों का तेल अर्पित करें और नीले फूल चढ़ाएं।
शनिवार/अमावस्या दीपदान: शाम को शमी या पीपल के पेड़ के नीचे और शनिदेव के समक्ष चौमुखी सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
छाया दान (कढ़ाई में तेल का दान): एक कटोरी या लोहे के बर्तन में सरसों का तेल लें, उसमें अपना चेहरा देखें और फिर उस तेल को बर्तन सहित किसी गरीब को दान कर दें या शनि मंदिर में रख आएं।
हनुमान चालीसा का पाठ: शनि दोष की उग्रता को शांत करने के लिए हनुमान मंदिर जाकर चमेली के तेल का दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा व शनि चालीसा का पाठ करें।

सर्वदोष निवारण का महा-उपाय

शमी और पीपल पूजन: हरियाली अमावस्या के दिन एक ही लोटे में जल, गंगाजल, कच्चा दूध, काले तिल और थोड़े से अक्षत (चावल) मिलाकर पहले पीपल के वृक्ष पर और फिर शमी के पौधे पर अर्पित करें। यह एक अकेला उपाय त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) के साथ-साथ पितरों और शनिदेव को एक साथ प्रसन्न करता है।

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