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पितृपक्ष 2026: पूर्णिमा का श्राद्ध कब रखा जाएगा?

Updated: शनिवार, 19 सितम्बर 2026 (17:22 IST)
Pitru Paksha 2026: पूर्णिमा का श्राद्ध (जिसे प्रोष्ठपदी पूर्णिमा श्राद्ध भी कहा जाता है) भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यह दिन पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है। यह श्राद्ध मुख्य रूप से उन पूर्वजों (पितरों) के लिए किया जाता है, जिनका निधन किसी भी महीने की पूर्णिमा तिथि को हुआ हो। इस दिन पूर्वजों के श्राद्ध के साथ-साथ अगस्त्य मुनि और अन्य ऋषियों के निमित्त भी तर्पण किया जाता है। साल 2026 में पूर्णिमा का श्राद्ध (भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध) 26 सितंबर शनिवार, 2026 को रखा जाएगा। इसी दिन से साल 2026 के पितृ पक्ष की औपचारिक शुरुआत होगी।

पितृ पक्ष का प्रारंभ

भाद्रपद पूर्णिमा से श्राद्ध के नियम शुरू हो जाते हैं, हालांकि 16 दिनों का मुख्य पितृ पक्ष प्रतिपदा तिथि से अमावस्या तक माना जाता है।

पूर्णिमा श्राद्ध की विधि

सुबह जल्दी स्नान करके स्वच्छ कपडे़ (अधिमानतः सफेद) पहनें। इसके बाद हाथ में जल, कुशा और काले तिल लेकर श्राद्ध एवं तर्पण का संकल्प लें। दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके पूर्वजों को जल, कुशा, काले तिल, दूध और जौ मिलाकर तर्पण (अंजलि) दें।

पिंडदान

दोपहर के समय (कुतुप मुहूर्त लगभग सुबह 11:30 से दोपहर 12:30 के बीच) पके हुए चावल, गाय के दूध, घी, शक्कर और काले तिल से बने पिंड अर्पित करें।

पंचबलि (5 अंश): भोजन तैयार होने पर सबसे पहले 5 अंश निकालें

ब्राह्मण भोजन व दान

योग्य ब्राह्मण को सम्मानपूर्वक भोजन कराएं, दक्षिणा दें और वस्त्र, अन्न या तिल का दान करके उनका आशीर्वाद लें।
 

आवश्यक नियम और सावधानियां

पूर्णिमा के श्राद्ध का महत्व

यह श्राद्ध मुख्य रूप से उन पूर्वजों (पितरों) के लिए किया जाता है, जिनका निधन किसी भी महीने की पूर्णिमा तिथि को हुआ हो। इस दिन पूर्वजों के श्राद्ध के साथ-साथ अगस्त्य मुनि और अन्य ऋषियों के निमित्त भी तर्पण किया जाता है। पूर्णिमा का श्राद्ध (जिसे प्रोष्ठपदी पूर्णिमा श्राद्ध या भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध भी कहा जाता है) हिंदू धर्म और पितृ पक्ष की परंपरा में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

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