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श्राद्ध पक्ष के इन 7 नियमों का पालन करें, पितरों को प्रसन्न करें

Updated: सोमवार, 19 सितम्बर 2016 (13:57 IST)
पितृपक्ष में अपने पितरों के निमित्त जो अपनी शक्ति सामर्थ्य के अनुरूप शास्त्र विधि से श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करता है, उसके सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं,और घर, परिवार व्यवसाय तथा आजीविका में हमेशा उन्नति होती है। पढ़ें 7 मुख्य नियम .....


1) श्राद्ध के दिन भगवदगीता के सातवें अध्याय का माहात्म्य पढ़कर फिर पूरे अध्याय का पाठ करना चाहिए एवं उसका फल मृतक आत्मा को अर्पण करना चाहिए।

2) श्राद्ध के आरम्भ और अंत में तीन बार निम्न मंत्र का जप करें
मंत्र ध्यान से पढ़ें :

ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च
नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:

(समस्त देवताओं, पितरों, महायोगियों, स्वधा एवं स्वाहा सबको हम नमस्कार करते हैं यह सब शाश्वत फल प्रदान करने वाले हैं)

3) श्राद्ध में एक विशेष मंत्र उच्चारण करने से, पितरों को संतुष्टि होती है और संतुष्ट पितर आप के कुल खानदान को आशीर्वाद देते हैं।
मंत्र ध्यान से पढ़ें : ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधादेव्यै स्वाहा

4) जिसका कोई पुत्र न हो, उसका श्राद्ध उसके दौहित्र (पुत्री के पुत्र) कर सकते हैं। कोई भी न हो तो पत्नी ही अपने पति का बिना मंत्रोच्चारण के श्राद्ध कर सकती हैं।

5) पूजा के समय धूप प्रयोग करें और बिल्वफल प्रयोग न करें और केवल घी का धुआं न करें। समिधा अवश्य अर्पित करें।

6) अगर पंडित से श्राद्ध नहीं करा पाते तो सूर्य नारायण के आगे अपने बगल खुली कर (दोनों हाथ ऊपर कर) बोलें :

"हे सूर्य नारायण ! मेरे पिता (नाम), अमुक (नाम) का बेटा, अमुक जाति (नाम), (अगर जाति, कुल, गोत्र नहीं याद तो ब्रह्म गोत्र बोल दे) को आप संतुष्ट/सुखी रखें । इस निमित मैं आपको अर्घ्य व भोजन करता हूँ ।" ऐसा करके आप सूर्य भगवान को अर्घ्य दें और भोग लगाएं।

7) श्राद्ध पक्ष में 1 माला रोज द्वादश मंत्र " ॐ नमो भगवते वासुदेवाय " की करनी चाहिए और उस माला का फल नित्य अपने पितृ को अर्पण करना चाहिए।

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