dharma sangrah
✕

कर्ण की वजह से मनता है पितृपक्ष, कर्ण की यह पौराणिक कथा सुनने से दूर होता है पितृदोष...

Updated: बुधवार, 26 सितम्बर 2018 (13:52 IST)
श्राद्ध पर्व पर यह कथा अधिकांश क्षेत्रों में सुनाई जाती है। कथा के अनुसार, महाभारत के दौरान, कर्ण की मृत्यु हो जाने के बाद जब उनकी आत्मा स्वर्ग में पहुंची तो उन्हें बहुत सारा सोना और गहने दिए गए। कर्ण की आत्मा को कुछ समझ नहीं आया, वह तो आहार तलाश रहे थे।
 
उन्होंने देवता इंद्र से पूछा किउन्हें भोजन की जगह सोना क्यों दिया गया। तब देवता इंद्र ने कर्ण को बताया कि उसने अपने जीवित रहते हुए पूरा जीवन सोना दान किया लेकिन अपने पूर्वजों को कभी भी खाना दान नहीं किया। तब कर्ण ने इंद्र से कहा उन्हें यह ज्ञात नहीं था कि उनके पूर्वज कौन थे और इसी वजह से वह कभी उन्हें कुछ दान नहीं कर सकें। 
 
इस सबके बाद कर्ण को उनकी गलती सुधारने का मौका दिया गया और 16 दिन के लिए पृथ्वी पर वापस भेजा गया, जहां उन्होंने अपने पूर्वजों को याद करते हुए उनका श्राद्ध कर उन्हें आहार दान किया। तर्पण किया, इन्हीं 16 दिन की अवधि को पितृ पक्ष कहा गया। 

ALSO READ: कहां करें श्राद्ध, आइए जानें जवाब...

ALSO READ: केले के पत्ते पर न कराएं श्राद्ध का भोजन....पढ़ें महत्वपूर्ण जानकारी

Show comments

सभी देखें

दीपावली पर क्‍यों खास हैं महाराष्ट्र के मशहूर अनारसे? जानिए इस मिठाई की दिलचस्प कहानी

दीपावली पर कैसे हुई शकरपारे बनाने की शुरुआत? जानिए इस पारंपरिक मिठाई की खासियत

दीपावली पर गुझिया के बिना क्यों अधूरी है मिठाई की थाली? जानिए इसके पीछे की खास परंपरा

दिवाली के पहले खरीदारी का पुष्‍य नक्षत्र कब से कब तक रहेगा, करें 4 उपाय- माता लक्ष्मी की मिलेगी कृपा

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 31 अक्‍टूबर 2026: शनिवार का पंचांग और शुभ समय

सभी देखें

दिवाली कब है 2026 में, 08 या 09 नवंबर को?

दीपावली पर मिठाइयों के बीच चिवड़ा क्यों है जरूरी? जानिए इसके पीछे की खास वजह

नरक चतुर्दशी कब है 2026, 07 या 08 नवंबर को?

धनतेरस कब है 2026 में 6 या 7 नवंबर को?

दीपावली पर क्यों बनाई जाती है मठरी? जानिए इसका महत्व और बनाने की आसान विधि

अगला लेख