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श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण भोज का विशेष महत्व है। आइए जानें कुछ खास बातें...
-श्राद्ध तिथि पर भोजन के लिए, ब्राह्मणों को पहले से आमंत्रित करें।
-दक्षिण दिशा में बैंठाएं, क्योंकि दक्षिण में पितरों का वास होता है।
-हाथ में जल, अक्षत, फूल और तिल लेकर संकल्प कराएं।
-कुत्ते, गाय, कौए, चींटी और देवता को भोजन कराने के बाद, ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
-भोजन दोनों हाथों से परोसें, एक हाथ से परोसा भोजन, राक्षस छीन लेते हैं।
-बिना ब्राह्मण भोज के, पितृ भोजन नहीं करते और शाप देकर लौट जाते हैं।
-ब्राह्मणों को तिलक लगाकर कपड़े, अनाज और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें।
-भोजन कराने के बाद, ब्राह्मणों को द्वार तक छोड़ें।
-ब्राह्मणों के साथ पितरों की भी विदाई होती हैं।
-ब्राह्मण भोजन के बाद, स्वयं और रिश्तेदारों को भोजन कराएं।
-श्राद्ध में कोई भिक्षा मांगे, तो आदर से उसे भोजन कराएं।
-बहन, दामाद और भानजे को भोजन कराए बिना, पितर भोजन नहीं करते।
-कुत्ते और कौए का भोजन, कुत्ते और कौए को ही खिलाएं।
-देवता और चींटी का भोजन गाय को खिला सकते हैं।
