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महाशिवरात्रि 2021 पर पूजा-पाठ नहीं कर सकते हैं तो ऐसे करें भोलेनाथ से प्रार्थना

गुरुवार,मार्च 11, 2021
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कहते हैं चाहे कोई भी समय हो कोई भी जगह हो जब मन प्रसन्न हो तब ही भगवान की आराधना करना चाहिए। मन प्रसन्न रहेगा तो पूजन में भी मन लगेगा। आइए जानते हैं इस महाशिवरात्रि पर कैसे करें घर में भोलेनाथ का पूजन :
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इस मंत्र का जाप ब्रह्मांड में कहीं भी किया जा सकता है, मन और मंत्र की शुद्धता अनिवार्य है। महाशिवरात्रि पर अगर आप मंदिर नहीं जा पा रहे हैं या विधिवत पूजन नहीं कर पा रहे हैं तो मात्र इस मंत्र का पूर्ण एकाग्रता से पाठ करने से मनचाहे वरदान की प्राप्ति ...
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पुराणों में वर्णित है कि अलग-अलग सामग्री से तैयार शिवलिंग प्रतिमा से अलग-अलग मनोकामना की पूर्ति होती है।
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अगर आपकी राशि मेष है तो आप दुनिया के किसी भी कोने में बैठें हो आपको भगवान शिव की तस्वीर पर गुलाल का तिलक लगाना है और 'ॐ ममलेश्वराय नम:' मंत्र का जाप 21 बार करना है।
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भगवान शिव यूं तो मात्र जल और बिल्वपत्र से प्रसन्न हो जाते हैं लेकिन उनका पूजन अगर अपनी राशि के अनुसार किया जाए तो अतिशीघ्र फल की प्राप्ति होती है।
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प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि या मासिक शिवरात्रि कहा जाता है। इसे ही प्रदोष भी कहा जाता है। जब यही प्रदोष श्रावण माह में आता है तो उसे वर्ष की मुख्‍य शिवरात्रि माना जाता है। दूसरी ओर फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी पर पड़ने वाली ...
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चित्रभानु नामक एक शिकारी था। जानवरों की हत्या करके वह अपने परिवार को पालता था। वह एक साहूकार का कर्जदार था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका। क्रोधित साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी। शिकारी ध्यानमग्न होकर ...
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शिव आरती- जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा । ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥
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भगवान शिव की सभी स्तुतियों में शिव चालीसा को श्रेष्ठ और कल्याणकारी माना गया है। खासतौर पर महाशिवरात्रि पर या श्रावण मास में श्री शिव चालीसा का पाठ करने व सुनने से घर में सुख-शांति, धन-वैभव और प्रेम की वृद्धि होती है
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महाशिवरात्रि व्रत का संकल्प करें और साथ ही इस दिन 4 प्रहर के 4 मंत्र का जाप करके महाशिवरात्रि व्रत का विशेष लाभ उठाएं।
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महादेव को पंचामृत से स्नान कराएं। उन्हें तीन बेलपत्र, भांग धतूरा, जायफल, फल, मिठाई, मीठा पान, इत्र अर्पित करें। महाशिवरात्रि का शुभ मुहू्र्त, महाशिवरात्रि व्रत विधि...
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फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की महाशिवरात्रि को शिव और पार्वती विवाह का दिन भी माना जाता है। शिव विवाह की पौराणिक कथा कई तरह से पढ़ने और सुनने को मिलती है। यहां पढ़िए शिव विवाह की पौराणिक कथा।
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भगवान शिव के अनेक नाम है। जिसमें से 108 नामों का विशेष महत्व है। यहां अर्थ सहित नामों को प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रदोष, शिवरात्रि, श्रावण मास,
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शिवरात्रि के दिन भगवान‌ शिव अर्द्धरात्रि में ब्रह्माजी के अंश से लिंग रूप में प्रकट हुए थे। कई जगहों पर मान्यता है कि इसी दिन भोलेनाथ का गौरा माता से विवाह हुआ था। इस दिन विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ का पूजा-अर्चन किया जाए तो सभी मनोकामनाएं पूर्ण ...
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महाशिवरात्रि मनाने के दो कारण बताए जाते हैं। पहला यह कि इस दिन भगवान शंकर की शादी हुई थी। दूसरा यह कि ईशान संहिता में बताया गया है कि फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि में आदिदेव भगवान शिव करोड़ों सूर्यों के समान प्रभाव वाले ज्योतिर्लिंग रूप ...
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भगवान शिव की जो भी व्यक्ति आराधना करता है, वह अनन्य सुखों को भोगकर अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है। भगवान शिव अपने भक्तों के कष्टों को हर कर हरि से मिला देते हैं। भगवान शिव की आराधना शिवरात्रि पर विशेष की जाती है। इस दिन की हुई आराधना विशेष फल देने ...
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11 मार्च को बुध के राशि परिवर्तन के साथ ही गोचरवश बुधादित्य-योग का निर्माण होगा। ऐसा संयोग बड़ा ही दुर्लभ होता है जब “महाशिवरात्रि” के दिन गोचरवश बुधादित्य योग बना हो।
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रात्रि जागरण के संदर्भ में श्रीकृष्ण के इन वाक्यों की ओर ध्यान देना चाहिए 'या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी।' अर्थात जब संपूर्ण प्राणी अचेतन होकर नींद की गोद में सो जाते हैं तो संयमी,
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गहन अंधेरी कंदरा में प्रवेश करते ही सामने एक विशाल शिवलिंग शक्तिपुंज-सा दृष्टिगोचर होता है। नीचे जलराशि में झिलमिलाते दीप एवं खिले कमल मन मंदिर को उल्लास से भर देते हैं। पुष्पों की सुवास से सुरभित पवन, तांबे के स्वर्ण जड़ित पात्र से लिंग पर टप-टप ...
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