biodatamaker

महाशिवरात्रि के दिन सप्तधान की शिवा मुठ्ठी से प्रसन्न होंगे भोलेनाथ

Updated: शनिवार, 26 फ़रवरी 2022 (15:18 IST)
महाशिवरात्रि 2022: शिवरात्रि पर भगवान शिव को बिल्वपत्र, धतूरा, आंकड़ा, पंचामृत, जल आदि अर्पित किया जाता है। इसी के साथ सप्तधान की शिवा मुठ्ठी को चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। आओ जानते हैं कि क्या है यह 'शिवा मुठ्ठी' और किस तरह करते हैं इसे अर्पित।
 
क्या है यह सप्तधान की शिवा मुठ्ठी : इस में कच्चे चावल, सफेद तिल, खड़े मूंग, जौ और सतुआ। आमतौर पर यह धान सावन माह के प्रति सोमवार को एक-एक मुठ्ठी अर्पित किए जाते हैं परंतु यहां उक्त सभी में ज्वार और गेंहू मिलाकर एक मुट्ठी महाशिवरात्रि पर शिवजी के समक्ष अर्पित करें। इसके लिए किसी विद्वान से पूछकर यह कार्य करें।
 
शिवा मुट्ठी अर्पित करने का तरीका : शिवा मुट्ठी चढ़ाने से पहले शिवजी का जलाभिषेक करें फिर शिवजी को पंचामृत चढ़ाएं। इसके बाद शिवजी को जल से पुन: स्नान कराने के बाद 108 बेलपत्र पर ऊं नम: शिवाय लिखकर चढ़ाएं। इसके बाद शिवजी को इत्र अर्पित करें। फिर पीली धोती शिवलिंग पर चढ़ाएं और साथ में माता पार्वती को चुनरी चढ़ाएं। इसके बाद पूरे शिव परिवार को जल दें और पूजा करें। अंत में शिवा मुट्ठी अर्पित करें। 
 
फायदे : शिवामुठ्ठी अर्पित करने से भोलेनाथ प्रसन्न होकर जातक के जीवन के सभी कष्ट दूर कर देते हैं और जीवन में धन-धान्य, सुख-शांति आदि का आशीर्वाद देते हैं।

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 06 अगस्‍त 2026: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय

सावन का दूसरा सोमवार 2026: कब है, क्या रहेगा शिव पूजा का शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजन विधि?

ओणम 2026: केरल में शुरू हुई तैयारियां, जानिए कब है यह पर्व और क्या है इसका धार्मिक महत्व

अंक-दर्शन : रसोई के मसाले और ग्रहों का रहस्य (भाग- 4 : इलायची)

हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन! जानिए पहले कौन-सी पूजा करें और कब करें गणेश स्थापना

अगला लेख