0

हनुमानजी से सीखें मैनेजमेंट के 10 गुण

बुधवार,नवंबर 25, 2020
0
1
यदि निम्नलिखित 10 नियम आपने अपना लिए तो निश्चित ही शर्तिया आपको कभी भी कोई गंभीर रोग नहीं होगा और आप जीवनभर निरोगी बने रहेंगे, परंतु उससे पूर्व आपको 3 शर्तों का पालन करना होगा। जैसे कुछ पाने के लिए खोना पड़ता है उसी तरह यह 3 शर्तें अपनाएं।
1
2
ऋग्वेद के मंत्रदृष्टा और गायत्री मंत्र के महान साधक सप्त ऋषियों में से एक महर्षि वशिष्ठ के पौत्र महान वेदज्ञ, ज्योतिषाचार्य, स्मृतिकार एवं ब्रह्मज्ञानी ऋषि पराशर के पिता का नाम शक्तिमुनि और माता का नाम अद्यश्यंती था। पराशर बाष्कल और याज्ञवल्क्य के ...
2
3
भारत में कई नीतिकार हुए हैं, जिन्होंने भारत के धर्म और राज्य को एक दिशा दी है। उन्हीं नीतिकारों में से एक प्रसिद्ध नीतिकार हैं शुक्राचार्य। ऋषि भृगु के पुत्र और दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य की शुक्र नीति आज भी प्रासंगिक मानी जाती है। आज के संदर्भ में ...
3
4
कठिन समय में किस तरह हम खुद को बचा सकते हैं, इस संबंध में वेद, पुराण, रामायण और महाभारत में हमें कई अच्छी बातें पढ़ने को मिलती है। उन्हें हम अपने आचरण में अपनाकर करोनाकाल के इस दौरा से खुद को सुरक्षित कर सकते हैं, क्योंकि इस दौर में व्यक्ति सेहत, ...
4
4
5
विपरीत परिस्थिति अर्थात संकट का समय। ऐसा समय जो आपके समर्थन में नहीं है या संकटकाल है। संकट के समय ही यह सिद्ध करने का होता है कि आप योग्य हो, काबिल हो और सर्वेश्रेष्ठ हो। संकट चाहे खुद पर आया हो, परिवार पर, मित्र पर आया हो या आपके संस्थान पर आपको ...
5
6
हिन्दू धर्म के प्रत्येक मांगलिक कार्य या पूजा आदि में पंच देव की पूजा का विधान है। इनके बगैर पूजा अधूरी मानी जाती है। इन पंचदेवों की पूजा से ही सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं। आओ जानते हैं कि कौन हैं पंच देव और कैसे होती है इनकी पूजा।
6
7
छठ पूजा व व्रत का प्रारंभ हिन्दू माह कार्तिक माह के शुक्ल की चतुर्थी तिथि से होता है और षष्ठी तिथि को कठिन व्रत रखा जाता है तथा दूसरे दिन सप्तमी को इसका पारण होता है। दरअसल, छठ पूजा 4 दिनों तक चलने वाला पर्व है जिसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से ...
7
8
19 नवंबर 2020 को झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की जयंती है। वह 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना थीं। उन्होंने कभी भी विदेशी आक्रांताओं और शासकों की दासता स्वीकार नहीं की और अपनी मातृभूमि की रक्षार्थ बलिदान दे दिया। आओ जानते हैं उनके ...
8
8
9
सहस्रबाहु अर्जुन ने अपने जीवन में यूं तो बहुतों से युद्ध लड़े लेकिन उनमें दो लोग खास थे। पहले रावण और दूसरे परशुराम। रावण से जीत गए और परशुराम से हार गए।
9
10
कहते हैं कि जैसा खाओगे अन्न वैसा बनेगा मन। जैसे होगा मन वैसे होगा विचार और भाव। जैसा होगा विचार और भाव वैसा ही होगा आपका व्यवहार और भविष्य। इसीलिए हिन्दू धर्म में भोजन के तीन प्रकार बताए गए हैं। सात्विक भोजन, राजसिक भोजन और तामसिक भोजन। यहां ...
10
11
यदि आप प्रतिदिन घर या मंदिर में पूजा या प्रार्थना करते हैं तो आपको कुछ नियम भी पालने चाहिए। नियम है तो धर्म है और धर्म है तो ही जीवन है। अत: नियम से ही कोई कार्य करें तो उचित है। तो आओ जानते हैं कि पूजा से पहले ऐसा कौन सा कार्य है जो हमें करना जरूरी ...
11
12
तुलसी के विभिन्न प्रकार के पौधे मिलते हैं- जैसे श्रीकृष्ण तुलसी, लक्ष्मी तुलसी, राम तुलसी, भू तुलसी, नील तुलसी, श्वेत तुलसी, रक्त तुलसी, वन तुलसी, ज्ञान तुलसी आदि। आओ जानते हैं कि हिन्दू धर्म में क्या है तुसली का महत्व।
12
13
प्रत्येक धर्म में धर्मग्रंथों का अत्यधिक महत्व होता है, और पवित्रता एवं सम्मान की दृष्टि से इन्हें पढ़ने के लिए समय और तरीका भी उतना ही महत्व रखता है। लेकिन धर्मग्रंथों को पढ़ने के लिए सुबह और शाम का समय ही सही माना जाता है। चलिए जानते हैं इसका ...
13
14
भारतीय धर्म और संस्कृति में हाथी का बहुत ही महत्व है। हाथी को पूज्जनीय माना गया है। हाथी से जुड़े कई किस्से, कहानियां और पौराणिक कथाएं भारत में प्रचलित है। आओ जानते हैं कि हाथी क्यों है पूज्जनीय।
14
15
प्राचीनकाल में संध्योपासना या संध्यावंदन की जाती थी। आगे चलकर यह पूजा, आरती और तरह तरह की पूजा विधियों में बदल गई। अब मोटे तौर पर कह सकते हैं कि संध्योपासना के 5 प्रकार हैं- (1) प्रार्थना, (2) ध्यान-साधना, (3) भजन-कीर्तन (4) यज्ञ और (5) पूजा-आरती। ...
15
16
ऋग्वेद में स्वस्तिक के देवता सवृन्त का उल्लेख है। स्वस्तिक का आविष्कार आर्यों ने किया और पूरे विश्‍व में यह फैल गया। भारतीय संस्कृति में इसे बहुत ही शुभ कल्याणकारी और मंगलकारी माना गया है। स्वस्तिक शब्द को 'सु' और 'अस्ति' दोनों से मिलकर बना है। 'सु' ...
16
17
ज्योतिष की एक मान्यता अनुसार प्रथम भाव से खानदानी दोष देह पीड़ा, द्वितीय भाव आकाश देवी, तृतीय भाव अग्नि दोष, चतुर्थ भाव प्रेत दोष, पंचम भाव देवी-देवताओं का दोष, छठा भाव ग्रह दोष, सातवां भाव लक्ष्मी दोष, आठवां भाव नाग दोष, नवम भाव धर्म स्थान दोष, दशम ...
17
18
भाईदूज के दिन श्री चित्रगुप्त की पूजा करते हैं। इस दिन पर कलम-दवात की करते हैं। दीपावली के पांच दिनी उत्सव में यम के निमित्त दीपदान किया जाता है परंतु इन पांच दिनों में सबसे ज्यादा महत्व भगवान चित्रगुप्त की पूजा का ही है और वह भी खासकर भाईदूज के ...
18
19
प्रभु श्रीराम अयोध्या कब लौटे थे इस पर भले ही विवाद हो सकता हो परंतु प्रभु श्रीराम चौदह वर्ष के वनवास के बाद जब अयोध्या लौटे थे तो अयोध्या वासियों ने श्रीराम के लौटने की खुशी में दीप जलाकर खुशियां मनायी थीं।
19