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बलरामजी ने क्यों धारण कर लिया था हल, जानिए हल की कथा

बुधवार,मई 12, 2021
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ढोल मृदंग, झांझ, मंजीरा, ढप, नगाड़ा, पखावज और एकतारा में सबसे प्रिय बांस निर्मित बांसुरी भगवान श्रीकृष्ण को अतिप्रिय है। इसे वंसी, वेणु, वंशिका और मुरली भी कहते हैं। बांसुरी से निकलने वाला स्वर मन-मस्तिष्क को शांति प्रदान करता है। जिस घर में बांसुरी ...
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यह वह समय था जबकि देवी देवकी, देवी रोहिणी और देवी यशोदा के गर्भ में तीन महानतम शक्तियों का वास होता हैं। देवी देवकी के गर्भ में श्रीकृष्‍ण, यशोदा के गर्भ में योगमाया और देवी रोहिणी के गर्भ में बलराजी। आओ जानते हैं कि किस तरह बलरामजी देवी रोहिणी के ...
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श्रीमद्भागवत पुराण और महाभारत में अक्रूरजी का कई जगहों पर उल्लेख मिलता है। अक्रूरजी कौन थे? क्या है उनके जीवन की कथा? यह बात बहुत कम ही लोग जानते हैं। आओ जानते हैं अक्रूरजी के संबंध में रोचक जानकारी।
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भगवान श्रीकृष्‍ण ने राजा शूरसेन के पुत्र श्रीवसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से कंस की मथुरा के कारागार में भाद्रपद अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में रात 12 बजे के करीब जन्म लिया था। जन्म लेते ही उनके पिता वसुदेवजी उन्हें मथुरा की यमुना के पार गोकुल ...
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श्री कागभुशुंडी और गरुड़जी का संवाद हमें तुलसीदास द्वारा कृत रामचरित मानस के उत्तरकांड में मिलता है जिसमें श्री कागभुशुंडी ने मानस रोगों का वर्णन किया है और इन रोगों का कारण और निवारण भी बताया है। गरुड़जी ने उनसे सात प्रश्न किए थे जिसके कागभुशुंडी ...
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भारत में कई समाज या जाति के कुलदेवी और देवता होते हैं। भारतीय लोग हजारों वर्षों से अपने कुलदेवी और देवता की पूजा करते आ रहे हैं। हालांकि आजकल अधिकतर परिवार ने अपाने कुलदेवी और कुल देवताओं को पूजना या उनको याद करना छोड़ दिया है। संभवत: इसी के कारण वे ...
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आइसोलेशन को भारत में एकांतवास कहते हैं। प्राचीन भारत में इसका बहुत महत्व रहा है। आज भी हमारे साधु संत एकांतवास में रहकर ही ध्यान और साधना करते हैं। एक गृहस्थ संन्यासी को भी एकांत की आवश्यकता होती है। एकान्तवास यदि स्वैच्छिक हो तो मनुष्य के लिए ...
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वाल्मीकि कृत रामायण में प्रभु श्रीराम की जीवन गाथा लिखी हुई है। श्री राम के भाई श्री लक्ष्मण एक माहान योद्धा थे। उन्हें शेषनाग का अवतार माना जाता है। वे स्वभाव में थोड़े उग्र थे। उनके इसी स्वभाव के कारण उनकी कुछ लोगों के साथ रोचक बहस हो जाती है। ...
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प्रजापति कश्यप की पत्नी विनता के दो पुत्र हुए- गरूड़ और अरुण। गरूड़जी विष्णु की शरण में चले गए और अरुणजी सूर्य के सारथी हुए। सम्पाती और जटायु इन्हीं अरुण के पुत्र थे। आओ जानते हैं संपाती के बारे में पौराणिक तथ्‍य।
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यदि निम्नलिखित 10 नियम आपने अपना लिए तो निश्चित ही शर्तिया आपको कभी भी कोई गंभीर रोग नहीं होगा और आप जीवनभर निरोगी बने रहेंगे, परंतु उससे पूर्व आपको 3 शर्तों का पालन करना होगा। जैसे कुछ पाने के लिए खोना पड़ता है उसी तरह यह 3 शर्तें अपनाएं।
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आपको यह जानकर संभवत: आश्चर्य होगा कि सीता और द्रौपदी में कुछ समानाताएं थी। हालांकि पहली बार देखने या सोचने से आपको लगे कि ये कैसे संभव हो सकता है। आओ जानते हैं माता सीता और द्रौपदी में क्या थी पांच समानताएं।
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कोरोना वायरस सचमुच घातक है, लेकिन इससे संक्रमित लोग ठीक भी हो गए हैं। यदि आपने लोगों से मिलना-जुलना और भीड़ वाले क्षेत्र में जाना छोड़ दिया है तो सबसे बड़ा बचाव यही है। इसके अलावा भारतीय संस्कृति मैं बताई गई जीवन शैली को अपनाकर आप कोरोना संक्रमण से ...
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गुजरात प्रांत के काठियावाड़ क्षेत्र में समुद्र के किनारे सोमनाथ नामक विश्वप्रसिद्ध मंदिर में 12 ज्योतिर्लिंगों से एक स्थापित है। पावन प्रभास क्षेत्र में स्थित इस सोमनाथ-ज्योतिर्लिंग की महिमा महाभारत, श्रीमद्भागवत तथा स्कंद पुराणादि में विस्तार से ...
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बजरंगबली हनुमानजी को इन्द्र से इच्छामृत्यु का वरदान मिला। श्रीराम के वरदान अनुसार कल्प का अंत होने पर उन्हें उनके सायुज्य की प्राप्ति होगी। सीता माता के वरदान के अनुसार वे चिरंजीवी रहेंगे। राम दरबार में श्रीराम और सीता सिंहासन पर विराजित हैं और उनके ...
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सुबह आंखें खुलने के पहले व्यक्ति जाग जाता है। जागने के बाद आंखें खोलता है और आंखें खोलते ही मस्तिष्क भी धीरे-धीरे जागने लगता है। यह समझना जरूरी है कि जिस तरह सूर्योदय के पहले उजाला होने लगता है और फिर बाद में सूर्य दिखाई देता है, ठीक उसी तरह व्यक्ति ...
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कई लोग यह देखते भी नहीं है कि कहां हंसी-मजाक करना चाहिए और कहां नहीं। कहां हंसाना चाहिए और कहां नहीं। उनके लिए समय और काल का कोई महत्व नहीं होता है। कई बार हंसना दु:खदायी भी हो सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि गरुड़ पुराण सहित अन्य ग्रंथों में ...
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प्राचीनकाल से ही लोग खाना खाने के बाद मीठा जरूर खाते हैं। हिन्दू शास्त्र और आयुर्वेद में भी इसका उल्लेख मिलता है। मीठा खाने के संबंध में तो आपको पता ही होगा लेकिन बहुत कम लोग नहीं जानते होंगे कि खाने के पहले तीखा या कहें कि चरका क्यों खाते हैं। आओ ...
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हम यहां पर व्रतों का वर्षिक चक्र संक्षिप्त में बता रहे हैं जिन्हें करने से निरोगी काया प्राप्त की जा सकती है। इन निम्मलिखित में से किसी भी एक को जीवनभर पाल लिया तो हर तरह के रोग और शोक मिट जाते हैं।
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कहते हैं कि जैसा खाओगे अन्न वैसा बनेगा मन। जैसे होगा मन वैसे होगा विचार और भाव। जैसा होगा विचार और भाव वैसा ही होगा आपका व्यवहार और भविष्य। इसीलिए हिन्दू धर्म में भोजन के तीन प्रकार बताए गए हैं। सात्विक भोजन, राजसिक भोजन और तामसिक भोजन। यहां ...
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