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घर के प्रवेश द्वार पर पंचसूलक होना जरूरी, जान लें महत्व

शुक्रवार,अप्रैल 10, 2020
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प्रलय का अर्थ होता है संसार का अपने मूल कारण प्रकृति में सर्वथा लीन हो जाना। प्रकृति का ब्रह्म में लय (लीन) हो जाना ही प्रलय है। यह संपूर्ण ब्रह्मांड ही प्रकृति कही गई है। इसे ही शक्ति कहते हैं। जो जन्मा है वह मरेगा- पेड़, पौधे, प्राणी, मनुष्य, ...
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रामायण काल और महाभारत काल भारत के इतिहास के दो महत्वपूर्ण काल है। रामायण काल को महर्षि वाल्मीकि के अलावा अन्य कई ऋषियों ने भी लिखा है। महाभारत के काल को ऋषि वेदव्यास ने लिखा है। हमने रामायण और महाभारत की घटनाओं की 10 आश्चर्यजनक समानताएं ढूंढी है।
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महाभारत के युद्ध के बाद बहुत से योद्धा बच गए थे। उनमें प्रमुख 18 थे। महाभारत के युद्ध के पश्चात कौरवों की तरफ से 3 और पांडवों की तरफ से 15 यानी कुल 18 योद्धा ही जीवित बचे थे जिनके नाम हैं- कौरव के : कृतवर्मा, कृपाचार्य और अश्वत्थामा, जबकि पांडवों की ...
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हिन्दू धर्म में घर में धूप और दीप देने का प्राचीनकाल से ही प्रचलन रहा है। कई प्रकार से धूप दी जाती है। आओ जानते हैं कि धूप देना क्या है और यह कैसे दी जाती है।
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घर या मंदिर में पूजा करने के लिए कुछ विशेष सामग्री का होना जरूरी है। उन सभी को मिलाकर ही पूजा की जाती है। हालांकि पूजा सामग्री तो बहुत सारी होती है, लेकिन यहां प्रस्तुत है पूजा के 20 प्रतीक वस्तुएं।
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जब से बिजली का अविष्कार हुआ है व्यक्ति की प्राकृतिक नींद और जागरण समाप्त हो गया है। पहले के जमाने में लोग रात को 7 बजे के लगभग भोजन करने के बाद 8 बजे तक सो जाते थे लेकिन अब कम से कम 11 बजे तक जागते रहने की आदत हो चुकी है। अर्थात व्यक्ति मध्य रात्रि ...
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शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन को पूर्णिमा कहते हैं और कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन को अमावस्या। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा माह की 15वीं और शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि है जिस दिन चन्द्रमा आकाश में पूर्ण रूप से दिखाई देता है। पंचांग के अनुसार अमावस्या माह की 30वीं ...
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आधुनिक जीवन शैली के चलते बहुत से लोगों को कब्ज की शिकायत हो चली है। खाना समय पर पचना नहीं है और फिर पेट भी फुलता जा रहा है। समय की व्यस्तता के चलते कसरत करने का समय भी कहां हैं। ऐसे में यदि आप चाहते हैं कि खाना समय पर पच जाए तो आपको हिन्दू जीवन शैली ...
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इसका सबसे बड़ा जवाब आप यह देख सकते हैं कि विष्णु का राम अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम वाला था और कृष्ण अवतार पूर्णावतार था। श्रीकृष्ण संपूर्ण कलाओं में दक्ष थे। लेकिन हम यहां आपको कुछ अलग ही बताने जा रहे हैं।
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भारतीय इतिहास में रामायण और रामायण काल का संपूर्ण अखंड भारत पर गहरा असर हुआ है। रामायण काल से कई पुरातात्विक अवशेष आज भी मौजूद है। आओ जानते हैं रामायण काल की 10 खास बातें।
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क्या आप सोते समय अपने पैर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रखते हैं। हिंदू शास्त्रों और वास्तुविदों के अनुसार यह अनुचित है। आओ जानते हैं इसके 5 नुकसान।
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लॉकडाउन के चलते अधिकतर लोगों को घर में ही रहना पड़ रहा है। बाहर घुमना फिरना बंद है। ऐसे में खाना भी सही समय पर नहीं पचता होगा। साथ ही सुबह देर तक सोते रहना और रात में देर तक जाग कर मूवी वगैरा देखते रहना भी जारी ही होगा। इसके अलावा भी ऐसी कई बाते हैं ...
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ज्योतिष और पौराणिक ग्रंथों में युग का मान अलग-अलग है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार चार युग होते हैं। सत, त्रेता, द्वापर और कलि। कहते हैं कि कलियुग में पाप अपने चरम पर होगा। वर्तमान में कलिकाल अर्थात कलयुग चल रहा है। ग्रंथों में इस युग में क्या-क्या ...
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लॉकडाउन में आप घर में धर्म के ये पांच कार्य जरूर करें इसे आपके मन एवं मस्तिष्क में शांति, विश्वास, साहस, उत्साह, सकारात्मक सोच और प्रसन्नता का संचार होगा। वर्तमान समय में यह बहुत जरूरी भी है। यदि आप इस अवसर का लाभ उठाना चाहते हैं तो निश्चित ही आपको ...
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हर कोई जानना चाहेगा कि मरने के बाद उसकी गति कैसी होगी या वह अगला जन्म कहां लेगा। हालांकि इस संबंध में कुछ भी निश्चित तौर पर कहना मुश्‍किल है। फिर भी धर्म और ज्योतिष शास्त्र में इसके कुछ संकेत बताए गए हैं।
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पारिजात के फूलों को हरसिंगार और शेफालिका भी कहा जाता है। अंग्रेजी में इसे नाइट जेस्मिन और ऊर्दू में गुलज़ाफ़री कहते हैं। आओ जानते हैं इसके फूल के बारे में 5 रहस्य।
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कुरुक्षेत्र के युद्ध में भारत का सबसे बड़ा युद्ध हुआ था। इस युद्ध में कौरव और पांडवों की सेना ने भाग लिया था। इस युद्ध को महाभारत का युद्ध कहते हैं। पांडवों के सबसे बड़े भाई युद्धिष्ठिर के उन 5 महत्वपूर्ण निर्णय के बारे में जानते हैं जो कि महाभारत ...
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तुलसी का धार्मिक महत्व भी है और आयुर्वेदिक महत्व भी है। यह एंटीबायोटिक, दर्द निवारक और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी फायदेमंद है। यहां जानिए तुलसी की माला पहनने के 5 फायदे।
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हिन्दू धर्म में समय की बहुत ही वृहत्तर धारणा है। आमतौर पर वर्तमान में सेकंड, मिनट, घंटे, दिन-रात, माह, वर्ष, दशक और शताब्दी तक की ही प्रचलित धारणा है,
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