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ब्रह्मा के मानस पुत्र ऋषि अंगिरा, जानिए कौन थे?

गुरुवार,जून 17, 2021
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नृत्य, संगीत और वाद्ययंत्रों का अविष्कार भारत में ही हुआ है। हिन्दू धर्म का नृत्य, कला, योग और संगीत से गहरा नाता रहा है। हिन्दू धर्म मानता है कि ध्वनि और शुद्ध प्रकाश से ही ब्रह्मांड की रचना हुई है। 21 जून 2021 को विश्व संगीत दिवस है। आओ जानते हैं ...
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पौराणिक शास्त्रों के अनुसार वैशाख शुक्ल सप्तमी तिथि को मां गंगा स्वर्गलोक से शिवशंकर की जटाओं में पहुंची थी। इसलिए इस दिन को गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। 18 मई 2021 को गंगा सप्तमी थी। ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा ...
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भगवान महेश को ही महेश्वर कहा जाता है। यह त्रिदेवों में से एक है। आओ जानते हैं कि भगवान महेश का रहस्य क्या है।
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हम सभी के घर में भगवान का मंदिर होता है लेकिन अज्ञानतावश हम कुछ गलतियां कर जाते हैं। प्रस्तुत है कुछ आवश्यक महत्वपूर्ण जानकारियां...
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महाभारत की ठीक तरह से शुरुआत राजा शांतनु की कहानी से होती है। राजा शांतनु के पुत्र भीष्म पितामह थे। आओ जानते हैं कि किस तरह राजा शांतनु के कारण कौरव और पांडवों के कुल का प्रारंभ हुआ किन 3 शर्तों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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भारतीय राज्य ओड़िसा में सप्तपुरियों में से एक है पुरी जहां पर प्रभु जगन्नाथ का विश्‍व प्रसिद्ध मंदिर है। इसे चार धामों में एक माना जाता है। इस मंदिर को राजा इंद्रद्युम्न ने हनुमानजी की प्रेरणा से बनवाया था। कहते हैं कि इस मंदिर की रक्षा का दायित्व ...
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भारतीय राजनीतिक इतिहास को मुख्यत: 4 भागों में बांट सकते हैं- प्राचीन, मध्य, आधुनिक और वर्तमान। प्राचीन काल में हम वैदिक काल, रामायण काल, महाभारत का काल, सिंधुघाटी का काल, मौर्य साम्राज्य, विक्रमादित्य साम्राज्य, गुप्त वंश को लेते हैं। गुप्त वंश के ...
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भगवान गणेशजी के जन्म स्थान कौनसा है या कहां पर उनकी उत्पत्ति हुई थी। इस संबंध में कई तरह के मत मिलते हैं परंतु हम यहां पर एक ही तरह का मत बता रहे हैं। आओ जानते हैं कि गणेशजी का जन्म कहां पर हुआ था।
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विश्व की एक मात्र उत्तर प्रवाह मान क्षिप्रा नदी के पास बसी सप्तपुरियों में से एक भगवान श्रीकृष्‍ण की शिक्षा स्थली अवं‍तिका अर्थात उज्जैन को राजा महाकाल और विक्रमादित्य की नगरी कहा जाता है। यहां तीन गणेशजी विराजमान हैं चिंतामन, मंछामन और इच्छामन। ...
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भारतीय संस्कृति और परंपराएं अब पहले जैसी नहीं रही। कम से कम 25 हजार वर्षों या ज्ञात रूप से 5 हजार वर्षों में बहुत कुछ बदला है। 7वीं सदी में जब अरब और तुर्क आक्रांतानों के अपनी संस्कृति और परम्पराओं को लादा तब भारी परिवर्तन हुआ। आओ जानते हैं ऐसी 10 ...
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महाभारत में श्रीमद्भागवत गीता के अलावा अनु गीता, हंस गीता, पराशर गीता, बोध्य गीता, विचरव्नु गीता, हारीत गीता, काम गीता, पिंगला गीता, वृत्र गीता, शंपाक गीता, उद्धव गीता, मंकि गीता, व्याध गीता जैसी अनेक गीताएं हैं। इसके अलावा गुरु गीता, अष्ट्रवक गीता, ...
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पुराण शब्द 'पुरा' एवं 'अण शब्दों की संधि से बना है। पुरा का अथ है- 'पुराना' अथवा 'प्राचीन' और अण का अर्थ होता है कहना या बतलाना। पुराण का शाब्दिक अर्थ है- प्राचीन आख्यान या पुरानी कथा। पुराणों में दर्ज है प्राचीन भारत का इतिहास। आओ जानते हैं 18 ...
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हिन्दू धर्म का एकमात्र धर्मग्रंथ है वेद। वेद के चार भाग है- ऋग, यजु, साम और अथर्व। वेदों का सार है उपनिषद और उपनिषदों का सार है गीता। महाभारत, रामायण, पुराण, स्मृति ग्रंथ और सूत्र ग्रंथ को धर्मग्रंथ नहीं माना जाता है। रामायण, महाभारत और पुराण इतिहास ...
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पुराणों अनुसार ब्रह्मा जी के मानस पुत्र:- मन से मारिचि, नेत्र से अत्रि, मुख से अंगिरस, कान से पुलस्त्य, नाभि से पुलह, हाथ से कृतु, त्वचा से भृगु, प्राण से वशिष्ठ, अंगुष्ठ से दक्ष, छाया से कंदर्भ, गोद से नारद, इच्छा से सनक, सनन्दन, सनातन, सनतकुमार, ...
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रंगों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। हिन्दू धर्म में पूजा के दौरान यूं तो 3 रंगों का खास महत्व है परंतु अन्य 2 रंगों का भी उपयोग होता है। इस तरह पंचरंगी पूजा होती है। आओ जानते हैं इन 5 रंगों का महत्व।
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मंदिर के द्वार पर और विशेष स्थानों पर घंटी या घंटे लगाने का प्रचलन प्राचीन काल से ही रहा है। मंदिर या घर के पूजाघर में आपने देखा होगा गरुड़ घंटी को। आओ जानते हैं इस घंटी के 10 राज और पूजाघर में रखने के 5 फायदे।
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भारतीय संस्कृति व सभ्यता विश्व की प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है। मध्यप्रदेश के भीमबेटका में पाए गए 25 हजार वर्ष पुराने शैलचित्र, नर्मदा घाटी में की गई खुदाई तथा मेहरगढ़ के अलावा कुछ अन्य नृवंशीय एवं पुरातत्वीय प्रमाणों से यह सिद्ध हो चुका है कि ...
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सभी ने वीणा को देखा होगा। वीणा एक ऐसा वाद्य यंत्र है जिसका प्रयोग शास्त्रीय संगीत में किया जाता है। वीणा से ही कई तरह से इसी प्रकार के दूसरे वाद्य यंत्र विकसित हुए हैं। आओ जानते हैं वीणा के बारे में 10 रोचक बातें।
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पौराणिक ग्रंथों के अनुसार श्रीजी राधारानी की 8 सखियां थीं। अष्टसखियों के नाम हैं- 1. ललिता, 2. विशाखा, 3. चित्रा, 4. इंदुलेखा, 5. चंपकलता, 6. रंगदेवी, 7. तुंगविद्या और 8. सुदेवी। राधारानी की इन आठ सखियों को ही "अष्टसखी" कहा जाता है। श्रीधाम वृंदावन ...
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