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कलियुग में इस नाम से अवतार लेंगे श्री गणेश, करेंगे पापियों का संहार

Updated: सोमवार, 2 सितम्बर 2019 (17:57 IST)
मोदक प्रिय श्री गणेशजी विद्या-बुद्धि और समस्त सिद्धियों के दाता हैं तथा थोड़ी उपासना से ही प्रसन्न हो जाते हैं। उन्हें हिन्दू धर्म में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के पूर्व उन्हीं का स्मरण और पूजन किया जाता है। आओ जानते हैं कि चारों युग में वे किस अवतार में नजर आते हैं।
 
 
1.कहते हैं कि भगवान श्री गणपति ने कृतयुग अर्थात सतयु में कश्यप व अदिति के यहां श्रीअवतार महोत्कट विनायक नाम से जन्म लिया। इस अवतार में गणपति ने देवतान्तक व नरान्तक नामक राक्षसों का संहार कर धर्म की स्थापना की व अपने अवतार की समाप्ति की। इस युग में गणेशजी का वाहन सिंह है। वे दस भुजाओं वाले, तेजस्वरूप तथा सबको वर देने वाले हैं।
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2.त्रेता युग में गणपति ने उमा के गर्भ से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन जन्म लिया और उन्हें गुणेश नाम दिया गया। त्रेता युग में उनका वाहन मयूर है, वर्णन श्वेत है तथा तीनों लोकों में वे मयूरेश्वर-नाम से विख्यात हैं और छ: भुजाओं वाले हैं। इस अवतार में गणपति ने सिंधु नामक दैत्य का विनाश किया व ब्रह्मदेव की कन्याएं, सिद्धि व रिद्धि से विवाह किया।
 
 
3.द्वापर युग में उनका वर्ण लाल है। वे चार भुजाओं वाले और मूषक वाहन वाले हैं तथा गजानन नाम से प्रसिद्ध हैं। द्वापर युग में गणपति ने पुन: पार्वती के गर्भ से जन्म लिया व गणेश कहलाए। परंतु गणेश के जन्म के बाद किसी कारणवश पार्वती ने उन्हें जंगल में छोड़ दिया, जहां पर पराशर मुनि ने उनका पालन-पोषण किया। इन्ही गणेश ने ही ऋषि वेद व्यास के कहने पर महाभारत लिखी थी।
 
 
इस अवतार में गणेश ने सिंदुरासुर का वध कर उसके द्वारा कैद किए अनेक राजाओं व वीरों को मुक्त कराया था। इसी अवतार में गणेश ने वरेण्य नामक अपने भक्त को गणेश गीता के रूप में शाश्वत तत्व ज्ञान का उपदेश दिया। ऐसा भी कहा जाता है कि वे महिष्मति वरेण्य वरेण्य के पुत्र थे। कुरुप होने के कारण उन्हें जंगल में छोड़ दिया गया था।
4.कहते हैं कि श्रीगणेशजी कलियुग के अंत में अवतार लेंगे। इस युग में उनका नाम धूम्रवर्ण या शूर्पकर्ण होगा। वे देवदत्त नाम के नीले रंग के घोड़े पर चारभुजा से युक्त होकर सवार होंगे और उनके हाथ में खड्ग होगा। वे अपनी सेना के द्वारा पापियों का नाश करेंगे और सतयुग का सूत्रपात करेंगे। इस दौरान वे कल्कि अवतार का साथ देंगे। 

साभार : गणेश पुराण
 

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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