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रामायण-महाभारत : किसने किससे लिया अगले जन्म में बदला, जानिए

Updated: मंगलवार, 19 जून 2018 (12:18 IST)
रामायण और महाभारत में भारत का प्रचीन इतिहास दर्ज है। प्राचीन काल में भारत धर्म, दर्शन और रहस्य के शीखर पर था। उस काल में उस काल में वह सबकुछ था जिस पर आज का आधुनिक मानव शोध कर रहा है और यह निर्णय ले पाने में अक्षम है कि क्या उस काल के लोग हमसे भी आगे थे? खैर, हम आपको यहां बताएंगे ऐसे लोगों के बारे में जिन्होंने अगले जन्म में अपना बदला पुरा किया।
 
1.बालि और जरा :
वानरराज बालि में ऐसी शक्ति थी कि वह जिससे भी लड़ता था उसकी आधी शक्ति उसमें समा जाती थी। बालि ने अपने भाई सुग्रीव की पत्नी को हड़पकर उसको बलपुर्वक अपने राज्य से बाहर निकाल दिया था। हनुमानजी ने सुग्रीव को प्रभु श्रीराम से मिलाया। सुग्रीव ने अपनी पीड़ा बताई और फिर श्रीराम ने बालि को छुपकर तब तीर से बार दिया जबकि बालि और सुग्रीम में मल्ल युद्ध चल रहा था।
 
 
चूंकि प्रभु श्रीराम ने कोई अपराध नहीं किया था लेकिन फिर भी बालि के मन में यह दंश था कि उन्होंने मुझे छुपकर मारा। जब प्रभु श्रीराम ने कृष्ण अवतार लिया तब इसी बालि ने जरा नामक बहेलिया के रूप में नया जन्म लेकर प्रभाव क्षेत्र में विषयुक्त तीर से श्रीकृष्ण को हिरण समझकर तब मारा जब वे एक पेड़ के नीचे योगनिद्रा में विश्राम कर रहे थे।
 
2.वेदवती और सीता :
रावण भ्रमण करता हुआ हिमालय के घने जंगलों में जा पहुंचा। वहां उसने एक रूपवती कन्या को तपस्या में लीन देखा। वेदवती नाम की इस कन्या को देखकर रावण कामातुर हो उठा। उसने उस कन्या की तपस्या भंग करते हुए उसके साथ जबरदस्ती करने लगा। वेदवती ने पीड़ीत होकर कहा, मैं परम तेजस्वी महर्षि कुशध्वज की पुत्री हूं। मेरे पिता की इच्‍छाअनुसार में विष्णु की पत्नीं बनने हेतु तप कर रही हूं। मेरे पिता को शंभू नामक दैत्य ने मार दिया। उनके दुख में मेरी मां अग्नि में समा गई और अब हे पानी तुने मेरी तपस्या भंग कर दी।
 
 
ऐसा कहते हुए वेदवती ने क्रोधिथ होकर फिर कहा, हे दुष्ट मैं तुम्हारे वध के लिए फिर से किसी धर्मात्मा पुरुष की पुत्री के रूप में जन्म लूंगी। महान ग्रंथों में शामिल दुर्लभ 'रावण संहिता' में उल्लेख मिलता है कि दूसरे जन्म में वही तपस्वी कन्या ने सीता के रूप में जन्म लिया और यही वेदवती रावण की मृत्यु का कारण बनी।
 
मान्यता है कि सीता के जन्म के बाद ज्योतिषियों ने उस कन्या को देखकर रावण को यह कहा कि यदि यह कन्या इस महल में रही तो अवश्य ही आपकी मौत का कारण बनेगी। यह सुनकर रावण ने उसे फिंकवा दिया था। तब वह कन्या पृथ्वी पर पहुंचकर राजा जनक के हल जोते जाने पर उनकी पुत्री बनकर फिर से प्रकट हुई। मान्यता है कि बिहार स्थिति सीतामढ़ी का पुनौरा गांव वह स्थान है, जहां राजा जनक ने हल चलाया था। शास्त्रों के अनुसार कन्या का यही रूप सीता बनकर रामायण में रावण के वध का कारण बना।
 
 
3.अम्बा और शिखंडी : 
सत्यवती के कहने पर ही भीष्म ने काशी नरेश की 3 पुत्रियों (अम्बा, अम्बालिका और अम्बिका) का अपहरण किया था। बाद में अम्बा को छोड़कर सत्यवती के पुत्र विचित्रवीर्य से अम्बालिका और अम्बिका का विवाह करा दिया था। राजकुमारी अम्बा को इसलिए छोड़ा गया क्योंकि वह शाल्वराज को चाहती थी। लेकिन जब अम्बा शाल्वराज के पास गई तो उन्होंने उसे नहीं स्वीकारा। अम्बा के लिए यह दुखदायी स्थिति हो चली थी। अम्बा ने अपनी इस दुर्दशा का कारण भीष्म को समझकर उनकी शिकायत परशुरामजी से की। परशुरामजी और भीष्म का युद्ध हुआ लेकिन कोई नहीं जीत पाया।
 
 
बाद में अम्बा ने बहुत ही द्रवित होकर भीष्म को कहा कि 'तुमने मेरा जीवन बर्बाद कर दिया और अब मुझसे विवाह करने से भी मना कर रहे हो। मैं निस्सहाय स्त्री हूं और तुम शक्तिशाली। तुमने अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया। मैं तुम्हारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती, लेकिन मैं पुरुष के रूप दोबारा जन्म लूंगी और तब तुम्हारे अंत का कारण बनूंगी।' गौरतलब है कि यही अम्बा प्राण त्यागकर शिखंडी के रूप में जन्म लेती है और ‍भीष्म की मृत्यु का कारण बन जाती है।
 
 
हालांकि इसी तरह की अन्य घटनाएं भी रामायण, महाभारत और पुराणों में दर्ज है। ऐसे कई लोग, देवी, देवता, अप्सरा हैं जिन्होंने अगले जन्म में अपने अपमान का बदला लिया था।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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