आर्य, आर्यावर्त, हिन्दू और सनातन का रहस्य जानिए...

अनिरुद्ध जोशी|
विदेशी इतिहासकार : आर्यों के मूल स्थान को लेकर विदेशी विद्वानों में मतभेद हैं। मैक्समूलर मानते थे कि वे मध्य एशिया के थे। एडवर्ड मेयर मानते थे कि वे पामीर के पठार के थे। हर्ज फील्ड मानते थे कि वे रूसी तुर्किस्तान के थे। ब्रेडस्टीन मानते थे कि वे स्टेट मैप्लन (किरगीज) के थे। पेंका एवं हर्ट अनुसार वे जर्मन (स्कैंडेनेविया) के थे। प्रोफेसर मादल्स के अनुसार वे डेयूब नदी घाटी (हंगरी) के थे। जेसी रॉड के अनुसार वे बैक्ट्रिया के थे। नेहरिंग प्रो. चाइल्ड एवं प्रो. मीयर्स के अनुसार दक्षिणी रूस के थे। मच के अनुसार पश्‍चिमी बाल्टिक समुद्र तट के थे।
भारतीय इतिहासकार : दयानंद सरस्वती मानते थे कि वे सभी तिब्बत के थे। राजबली पांडे अनुसार वे मध्यभारत (मध्यप्रदेश) के थे। एल.डी. काला अनुसार वे कश्मीर के थे।
गंगानाथ झा अनुसार वे ब्रह्मर्षि देश के थे। डॉ. संपूर्णानंद एवं चंद्रादस अनुसार वे सप्त सैंधव प्रदेश के थे। डीएस त्रिवेदी अनुसार वे देविकानंदन प्रदेश (मुल्तान) के थे। बाल गंगाधर तिलक अनुसार वे उत्तरी ध्रुव (आर्कटिक) के थे।
 
अब सवाल यह उठता है कि भारतीय इतिहास में आर्यों को भारत पर आक्रमण करने वाला और विदेशी क्यों बताया जाता है? इसके पिछे कई कारण है। जैसे सिकंदर पोरस से हार गिया था फिर भी ग्रीक इतिहासकार दुनियाभर में यह प्रचारित करने में सफल रहे कि वह जीत गया था इसलिए वह महान है। यदि भारत पर मुगलों और अंग्रेजों ने शासन नहीं किया होता तो भारत में पोरस ही महान माना जाता। लेकिन अब हम बात करते हैं पहले यह की आर्य कहां के थे? ऋग्वेद में आर्यों के निवास स्थान को 'सप्तसिंधु' प्रदेश कहा गया है। ऋग्वेद के नदीसूक्त (10/75) में आर्यनिवास में प्रवाहित होने वाली नदियों का वर्णन मिलता है, जो मुख्‍य हैं:- कुभा (काबुल नदी), क्रुगु (कुर्रम), गोमती (गोमल), सिंधु, परुष्णी (रावी), शुतुद्री (सतलज), वितस्ता (झेलम), सरस्वती, यमुना तथा गंगा। उक्त संपूर्ण नदियों के आसपास और इसके विस्तार क्षेत्र तक आर्य रहते थे। जब जल प्रचल हुआ तो आर्य त्रिविष्टप (तिब्बत) चले गए थे। जल प्रलय के बाद वहीं से वे पुन: भारत भूमि पर फैलकर मध्य एशिया तक अपनी जातियों का विस्तार किया। स्वामी दयानंद सरस्वती इसी आधार पर आर्यो का मूल निवास स्थान को तिब्बत मानते हैं।
 
ऋग्वेदिक काल : प्रारंभिक धरती की भौगोलिक स्थिति के बार में ऋग्वेद में विस्तार से मिलता है। आर्य सप्त सिंधु अर्थात सप्त सैंधव (सात नदियों की भूमि) पर रहते थे। लेकिन आर्यों ने सिर्फ ऋग्वेद ही नहीं लिखा। आर्यों की तो कई शाखाएं थी। ऋग्वेद लिखने वाले सप्त सैंधव नदी के पास रहते थे। ये सात नदियां अखंड भारत के अफगानिस्तान, पंजाब (भारतीय एवं पाकिस्तानी) तथा पश्‍चिमी उत्तर प्रदेश के क्षे‍त्र में बहती थी। सात नदियों में सिंधु और सरस्वती के साथ ही पंजाब की पांच नदियां थी।> > इतिहासकारों का यह मानना है कि वैदिक भारतीय जनसमूह अलग-अलग देशों में घूमते-घूमते उत्तर और पश्चिम दिशा में दूर तक बढ़ते गए। प्रचेतस जैसे प्राचीन राजा का उल्लेख लगभग सारे पुराणों में पाया जाता है। पांच पुराणों का मानना है कि प्रचेतस राजा के वंशजों ने भारत के उत्तर-पश्चिम दिशाओं में फैलकर अपने राज्य स्थापित किए। इन जनजातियों को पुराणों में प्रचेतस के सैकड़ों पुत्र कहा गया है। यह फैलाव किसी राजा की विजय-गाथा न होकर बड़े पैमाने पर भारतीय मानव-दल का दूसरे देशों में प्रसरण है। धीरे-धीरे इन मानव दलों का विस्तार कश्मीर से लेकर एशिया-मायनर के प्रदेशों में हुआ। वहां पर स्थापित भारतीयों के अलग-अलग गुट बने।



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