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क्या मृत्यु के बाद पुनर्जन्म मिलता है, जानिए 10 रहस्य

बुधवार,मई 5, 2021
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हर कोई जानना चाहेगा कि मरने के बाद उसकी गति कैसी होगी या वह अगला जन्म कहां लेगा। हालांकि इस संबंध में कुछ भी निश्चित तौर पर कहना मुश्‍किल है। फिर भी धर्म और ज्योतिष शास्त्र में इसके कुछ संकेत बताए गए हैं।
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कहते हैं कि कुंडली में आपके पिछले जन्म की स्थिति लिखी होती है। यह कि आप पिछले जन्म में क्या थे। कुंडली, हस्तरेखा या सामुद्रिक विद्या का जानकार व्यक्ति आपके पिछले जन्म की जानकारी के सूत्र बता सकता है। यह लेख ज्योतिष की मान्यता पर आधारित है।
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हर व्यक्ति अपने परिवार के मृतकों की मुक्ति या मोक्ष की कामना करता है। कई दफे मुक्ति और मोक्ष को एक ही मान लिया जाता है। सामान्यत: यह अर्थ निकाला जाता है कि जन्म-मरण से छुटकारा मिलना ही मुक्ति या मोक्ष है। आओ जानते हैं दोनों के बीच के फर्क को।
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आधुनिक विज्ञान के अनुसार अमीबा से लेकर मानव तक की यात्रा में लगभग 1 करोड़ 04 लाख योनियां मानी गई हैं। ब्रिटिश वैज्ञानिक राबर्ट एम.मे. के अनुसार दुनिया में 87 लाख प्रजातियां हैं। उनका अनुमान है कि कीट-पतंगे, पशु-पक्षी, पौधा-पादप, जलचर-थलचर सब मिलाकर ...
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अधिकतर लोगों को यह प्रश्न कठिन या धार्मिक लग सकते हैं क्योंकि उन्होंने वेद, उपनिषद या गीता को नहीं पढ़ा है। उसमें शाश्वत प्रश्नों के शाश्वत उत्तर है।
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गति बहुत महत्वपूर्ण है। गति होती है ध्वनि कंपन और कर्म से। यह दोनों ही स्थिति चित्त का हिस्सा बन जाती है। कर्म, विचार और भावनाएं भी एक गति ही है, जिससे चित्त की वृत्तियां निर्मित होती है। योग के अनुसार चित्त की वृत्तियों से मुक्ति होकर स्थिर हो जाना ...
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यह बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है। हिन्दू धर्म के अनुसार कर्मों की गति के अनुसार व्यक्ति को दूसरी योनि मिलती है। यदि किसी को नहीं मिली है तो फिर वह प्रेत योनि में चला जाता है या यदि अच्‍छे कर्म किए हैं तो पितृलोक या देवलोक में कुछ काल रहने के बाद पुन: ...
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पहली बात तो यह कि आत्महत्या शब्द ही गलत है, लेकिन यह अब प्रचलन में है। आत्मा की किसी भी रीति से हत्या नहीं की जा सकती। हत्या होती है शरीर की। इसे स्वघात या देहहत्या कह सकते हैं। दूसरों की हत्या से ब्रह्म दोष लगता है लेकिन खुद की ही देह की हत्या करना ...
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कर्मों के अनुसार किसी भी आत्मा को गति मिलती है। देह छोड़ गए लोगों में से बहुत से अतृप्त होते हैं। कहते हैं कि अतृप्त आत्मा को सद्गति नहीं मिलती है और वह भटकता रहता है। जानिए अतृप्त रहने के 5 कारण।
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गति बहुत महत्वपूर्ण है। गति होती है ध्वनि कंपन और कर्म से। यह दोनों ही स्थिति चित्त का हिस्सा बन जाती है। कर्म, विचार और भावनाएं भी एक गति ही है, जिससे चित्त की वृत्तियां निर्मित होती है। योग के अनुसार चित्त की वृत्तियों से मुक्ति होकर स्थिर हो जाना ...
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मुक्ति और मोक्ष में फर्क है। मुक्ति से बढ़कर है मोक्ष। मोक्ष को प्राप्त करना आसान नहीं है। जब कोई व्यक्ति अपने मृतकों का श्राद्ध करता है तो वह उसकी मुक्ति की कामना करता है। मुक्ति एक साधारण शब्द है। श्राद्ध कर्म मुक्ति कर्म है। यह क्यों किया जाता है ...
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धरती के मान से 2 तरह की शक्तियां होती हैं- सकारात्मक और नकारात्मक, दिन और रात, अच्छा और बुरा आदि। हालांकि कुछ मिश्रित शक्तियां भी होती हैं, जैसे संध्या होती है तथा जो दिन और रात के बीच होती है। उसमें दिन के गुण भी होते हैं और रात के गुण भी।
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यहूदी और उनसे निकले धर्म पुनर्जन्म की धारणा को नहीं मानते। मरने के बाद सभी कयामत के दिन जगाए जाएंगे अर्थात तब उनके अच्छे और बुरे कर्मों पर न्याय होगा। इब्राहीमी धर्मों की मान्यता है कि मरणोपरांत आत्मा कब्र में विश्राम करती है और आखिरी दिन ईश्‍वर के ...
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गीता से बढ़कर है उपनिषद और उपनिषद से बढ़कर है वेद। उक्त तीनों ही हिन्दू धर्म के धर्मग्रंथ है बाकी नहीं। बृहदारण्यक उपनिषद में मृत्यु व अन्य शरीर धारण करने का वर्णन मिलता है। वर्तमान शरीर को छोड़कर अन्य शरीर प्राप्ति में कितना समय लगता है और कैसे वह ...
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हम यहां भगवान की नहीं बल्कि ईश्वर की, परमात्मा की या ब्रह्म की बात कर रहे हैं। वर्तमान में लोग भगवान शब्द को ईश्वर से जोड़ते हैं इसीलिए हमने हेडिंग में भगवान रखा। कोई मनुष्य देवता या भगवान बन सकता है लेकिन ईश्‍वर या परमात्मा नहीं। वेद कहते हैं कि ...
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सब कहते हैं कि मरने के बाद कुछ भी साथ नहीं जाता है सब यहीं का यहीं धरा रह जाता है। आदमी खाली हाथ आया था और खाली हाथ चला जाता है लेकिन यह सत्य नहीं है। ऐसे कई बात है जो दुनिया में प्रचलित है लेकिन वह सत्य नहीं है। आओ जानते हैं कि आदमी जन्म लेता है तो ...
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धर्मशास्त्रों के अनुसार पितरों का निवास चंद्रमा के उर्ध्वभाग में माना गया है। ये आत्माएं मृत्यु के बाद 1 से लेकर 100 वर्ष तक मृत्यु और पुनर्जन्म की मध्य की स्थिति में रहती हैं। पितृलोक के श्रेष्ठ पितरों को न्यायदात्री समिति का सदस्य माना जाता है।
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वेद, स्मृति और पुराणों अनुसार आत्मा की गति और उसके किसी लोक में पहुंचना का वर्णन अलग-अलग मिलता है। हम हां पौराणिक मत को जानेंगे लेकिन पहले संक्षिप्त में वैदिक मत भी जान लें जो कि गति के संदर्भ में है।
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मन और चित्त में अंतर है। चित्त में एक लाख जन्मों की स्मृतियां संग्रहित रहती है। चित्त कभी न नष्ट होने वाली हार्ड डिस्क की तरह होता है। वर्तमान जन्म से पहले का जन्म सबसे ज्यादा स्पष्ट होता है, क्योंकि उस जन्म में मरकर ही हम इस जन्म में आए हैं। ताजा ...
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