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कहां हुई साईबाबा की शिक्षा-दीक्षा, जानिए

Written By WD
Updated: शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2020 (18:50 IST)
साईबाबा की पढ़ाई की शुरुआत घर से ही हुई। उनके पिता वेदपाठी ब्राह्मण थे। उनके सान्निध्य में हरिबाबू (साई) ने बहुत तेजी से वेद-पुराण पढ़े और वे कम उम्र में ही पढ़ने-लिखने लगे।

7-8 वर्ष की उम्र में सांई को पाथरी के गुरुकुल में उनके पिता ने भर्ती किया ताकि यह कर्मकांड सीख ले और कुछ गुजर-बसर हो। यहां ब्राह्मणों को वेद- ‍पुराण आदि पाठ पढ़ाया जाता था। जब सांई 7-8 वर्ष के थे तो अपने गुरुकुल के गुरु से शास्त्रार्थ करते थे।

गुरुकुल में साई को वेदों की बातें पसंद आईं, लेकिन वे पुराणों से सहमत नहीं थे और वे अपने गुरु से इस बारे में बहस करते थे। वे पुराणों की कथाओं से संभ्रमित थे और उनके खिलाफ थे। तर्क-वितर्क द्वारा वे गुरु से इस बारे में चर्चा करते थे। गुरु उनके तर्कों से परेशान रहते थे। वे वेदों के अंतिम और सार्वभौमिक सर्वश्रेष्ठ संदेश 'ईश्वर निराकार है' इस मत को ही मानते थे। अंत में हारकर गुरु ने कहा- एक दिन तुम गुरुओं के भी गुरु बनोगे। साई ने वह गुरुकुल छोड़ दिया।

गुरुकुल छोड़कर वे हनुमान मंदिर में ही अपना समय व्यतीत करने लगे, जहां वे हनुमान पूजा-अर्चना करते और सत्संगियों के साथ रहते। उन्होंने 8 वर्ष की उम्र में ही संस्कृत बोलना और पढ़ना सीख लिया था। उन्होंने चारों वेद और 18 पुराणों का अध्ययन कर लिया था।

संदर्भ : शशिकांत शांताराम गडकरी की किताब 'सद्‍गुरु सांई दर्शन' (एक बैरागी की स्मरण गाथा)

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