Hanuman Chalisa

हिन्दी प्रेम कविता : वह घूम रही उपवन-उपवन...

Updated: शनिवार, 25 फ़रवरी 2017 (17:37 IST)
पुष्पों-सी नजाकत अधरों पर
नवनीत-सा कोमल उर थामे।
एक पाती प्रेम भरी लेकर
वह घूम रही उपवन-उपवन।


 
 
 
 
सुर्ख कपोलों पर स्याह लटें
धानी आंचल का कर स्पर्श।
छूने को नभ का केंद्र-पटल
वह घूम रही उपवन-उपवन।
 
मधुर रागिनी करतल ध्वनि पर
छेड़े अनकही अविरल सरगम।
सुधि बिसार, गर्दन उचकाए
वह घूम रही उपवन-उपवन।
 
भोर को निकली सांझ ढले तक
प्रियतम की अपलक बाट जोहती।
अतृप्त, अप्रसन्न और विक्षिप्त-सी
वह घूम रही उपवन-उपवन।
 
ना साज-सिंगार, ना इच्छा बाकी
रोम-रोम बसे मूरत यार की।
ले अभिलाषा उसके आवन की
वह घूम रही उपवन-उपवन।
 
लेखक के बारे में
विनोद वर्मा 'दुर्गेश'
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

सावन मास पर एक भावपूर्ण और मौलिक हिंदी कविता

Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

सभी देखें

Raksha Bandhan Essay: राखी पर्व पर हिन्दी निबंध: वर्तमान समय में रक्षा बंधन का त्योहार

Essay on Friendship Day: फ्रेंडशिप डे: दोस्ती के अटूट बंधन का खूबसूरत पर्व, पढ़ें हिन्दी में रोचक निबंध

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

कविता- तू ना हो तो...

अगला लेख