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प्रेम कविता: जो कह न सके तुमसे

Updated: शुक्रवार, 1 मई 2026 (17:03 IST)
जो कह न सके तुमसे
शब्दों में लिखा होगा
आंखों पे लिखी-बातें
आंखों ने पढ़ा होगा
 
तस्वीर तेरी मैंने
जो नयनों में बसाई है
नयनों से अश्रु जब निकले
तेरा रूप सजा होगा
 
मेरे दिल के पन्नों पर 
तेरी प्रेम कहानी है
मैंने जब पन्नों को पलटा
तेरा दिल भी धड़का होगा
 
मैं इन प्रेम गीतों को 
इस उम्मीद से गाता हूं
कि कही दूर किसी कोने पर 
तेरा दिल भी रोता होगा।

लेखक के बारे में
राकेशधर द्विवेदी

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