biodatamaker

प्रेम काव्य : दोस्त सयाने

Updated: शनिवार, 18 जुलाई 2015 (16:39 IST)
- रजनी मोरवाल 


 
छलक गए आखिर इस पल में
उनकी नफरत के पैमाने।
 
मुसकानें अधरों पर लादे
वर्षों तक जो साथ चले थे,
या यूं कह लो गर्दन तक वे
अहसानों के बोझ तले थे,
 
आंख चुराते फिरते हैं ‍अब 
‍दुश्मन बनकर दोस्त सयाने।
 
कविता की गलियों ने जब भी
कभी हमारा साथ कराया,
हाथ मिलाकर बढ़े दोमुंहे
जैसे कोई श्राद्ध सिराया,
 
नाम हुआ जब कुछ मेरा तो
लगे बिचारे वे घबराने।
 
ताने दे-दे हार थके जब
उलाहनों के झाड़ उगाए,
शब्दों के कोड़े लेकर के
वार पीठ पर है बरसाए, 
 
मैंने तो बस हंसकर झेले
सभी तीर जो लगे निशाने।
 
साभार- हिन्दी चेतना 
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

दादाजी की याद में पोती की पाती, पढ़कर आंखें भी नम होगी, उर्जा भी मिलेगी

क्यों मनाया जाता है विश्व आदिवासी दिवस? जानिए इतिहास और इसका महत्व

अभय छजलानी, पत्रकारिता के तपस्वी साधक

आस्था और अनुशासन का अद्भुत संगम है कांवड़ यात्रा

निर्विघ्न कांवड़ यात्रा के लिए तैयार उत्तर प्रदेश