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26 जनवरी 2021 : गणतंत्र दिवस से जुड़ी विशेष सामग्री

सोमवार,जनवरी 25, 2021
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महाभारत काल में 16 महाजनपदों का उल्लेख मिलता है। महाभारत काल में प्रमुखरूप से 16 महाजनपद और लगभग 200 जनपद थे। 16 महाजनपदों के नाम : 1. कुरु, 2. पंचाल, 3. शूरसेन, 4. वत्स, 5. कोशल, 6. मल्ल, 7. काशी, 8. अंग, 9. मगध, 10. वृज्जि, 11. चे‍दि, 12. मत्स्य, ...
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निवेदन यही कि बाह्य रूप से नहीं बल्कि आंतरिक रूप से गणतंत्र के अर्थ व महत्व को जज़्ब कीजिए और स्वयं से आरंभ कर इसका शेष समाज में उचित रूप से क्रियान्वयन संभव बनाइए। स्मरण रखिए, अपने तंत्र को सही अर्थों में सफल बनाना आपका कर्तव्य भी है और अधिकार भी।
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गणतंत्र दिवस पर पंचमहापुरुष योग में से 2 योग बन रहे हैं। एक तो रुचक योग मंगल के स्वराशि में होने से बन रहा है।
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वर्ष 1931 ध्‍वज के इतिहास में एक यादगार वर्ष है। तिरंगे ध्‍वज को हमारे राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाने के लिए एक प्रस्‍ताव पारित किया गया। यह ध्‍वज जो वर्तमान स्‍वरूप का पूर्वज है, केसरिया, सफेद और मध्‍य में गांधी जी के चलते हुए चरखे के साथ था।
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हम ऐसा देश चाहते हैं जिसमें सभी लोगों को भरपेट पौष्टिक भोजन मिले, साफ पेयजल मिले। आइए जानें 30 महत्वपूर्ण बातें...
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हमें विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश होने का गर्व है। हमारा लोकतंत्र धीरे-धीरे परिपक्व हो रहा है। हम पहले से कहीं ज्यादा समझदार होते जा रहे हैं। धीरे-धीरे हमें लोकतंत्र की अहमियत समझ में आने लगी है। सिर्फ लोकतांत्रिक व्यवस्था में ही व्यक्ति खुलकर ...
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अगर आप भी खुद को देशभक्त मानते हैं तो पहले अपने दिल पर हाथ रखकर इन बातों को पढ़ें क्या आप ऐसा करते हैं? अगर हां, तो आप सच्चे देशभक्त हैं....अगर नहीं तो वक्त है सुधर जाइए....
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अंग्रेजी इतिहास में डेमोक्रेसी शब्द सबसे पहली बार हिरोडोटस (Herodotus) नाम के ग्रीक व्यक्ति द्वार 5वीं सदी में उपयोग किया गया था। परंतु कहा जाता है कि सबसे पहले 507-508 ईसा पूर्व एथेंस में डेमोक्रेसी की जो शुरुआत हुई उसके पीछे क्लेशिथेंस ...
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भारत एक पूर्ण संप्रभुता संपन्न गणराज्य होगा, जो स्वयं अपना संविधान बनाएगा।
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प्राचीन काल में दो प्रकार के राज्य कहे गए हैं। एक राजाधीन और दूसरे गणधीन। इंद्र की अमरावती से लिच्छवियों की वैशाली तक हर काल में यह दोनों ही तरह के राज्य विद्यमान रहे हैं। आओ जानते हैं बौद्धकाल के गणतंत्र को।
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ब्रिटिश शासन के दौरान देशवासियों के दिलों में गुलामी के खिलाफ आग भड़काने वाले सिर्फ दो शब्द थे- 'वंदे मातरम्'। आइए बताते हैं इस क्रांतिकारी, राष्ट्रभक्ति के अजर-अमर गीत के जन्म की कहानी -
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हमारे राष्‍ट्र गान के बारे में बहुत से दिलचस्‍प तथ्‍य हैं, जानते हैं किसने लिखा, कितनी देर में गाया जाता है और आखिर क्‍या है इसका महत्‍व।
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जब भी तिरंगा फहराया जाए तो उसे सम्मानपूर्ण स्थान दिया जाए। उसे ऐसी जगह लगाया जाए, जहां से वह स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
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जनगणमन आधिनायक जय हे भारतभाग्यविधाता!- जन गण मन के उस अधिनायक की जय हो, जो भारत के भाग्यविधाता हैं!
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26 जनवरी 1950 को भारत के प्रथम राष्‍ट्रपति डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी के बाद भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज को फहराकर भारतीय गणतंत्र के ऐतिहासिक जन्‍म की घो‍षणा की थी।
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26 जनवरी 1950 को हमारा देश प्रजातांत्रिक गणतंत्र देश बना था। इस दिन हमारे देश का संविधान लागू हुआ था और भारत में इस पर्व को बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है और इसी अवसर पर भाषण प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है।
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तू तो रही है सदा से आरजू मेरी मेरी भारत माता तू तो बसी है मेरे मन में पर क्या करूं यहां से तुझे न देखा जाता
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इस ध्‍वज को सांप्रदायिक लाभ, पर्दें या वस्‍त्रों के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता है। जहां तक संभव हो इसे मौसम से प्रभावित हुए बिना सूर्योदय से सूर्यास्‍त तक फहराया जाना चाहिए।
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एक ऐसा गान जो प्रत्येक देशवासी की जुबान पर रहे। ऐसी धुन जिसके बजते ही तन-मन देशप्रेम की भावना में रम जाए। ऐसी प्रस्तुति जिसे सुनकर भाल गर्व से चमक उठे। लेकिन यह पूरा किसे याद है आइए जानते हैं इसके अंतिम पद जो कहीं और नहीं मिलेंगे...
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