भारतीय संविधान की विशेषता

केन्द्र-राज्य संबंध

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नरेन्द्र तिवारी
संघात्मक संविधान की प्रमुख विशेषता केंद्र तथा राज्यों में शक्तियों का वितरण है। संघ एवं राज्यों में शक्तियों का वितरण ऐसी रीति से किया जाए कि दोनों अपने-अपने क्षेत्र में स्वतंत्र हों, किंतु एक-दूसरे के सहयोगी भी हों। इसका तात्पर्य यह है कि राज्यों को कुछ सीमा तक स्वायत्तता होनी चाहिए।


भारतीय संविधान में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के वितरण की जो योजना अपनाई गई है उसमें प्रारंभ से ही केंद्र को सशक्त बनाया गया है। संविधान निर्माता अन्य देशों के संविधानों में केंद्र सरकार के कमजोर होने के कारण आई हुई कठिनाइयों से भलीभाँति अवगत थे, इसलिए उन्होंने परिस्थितियों के अनुकूल सशक्त केंद्र की स्थापना की ताकि देश की एकता, अखंडता को सुरक्षित रखा जा सके व विकास हो सके।
केंद्र एवं राज्यों के मध्य साधारणतया तीन प्रकार के संबंध होते हैं- (अ) विधायी संबंध, (ब) प्रशासक एवं (स) वित्तीय संबंध। विधायी शक्तियों के वितरण से संबंधित उपबंधों में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची। संघ सूची के विषयों पर केंद्र सरकार विधि बनाती है, राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने की शक्ति केवल राज्यों को ही है।

अवशिष्ट शक्तियाँ संघ सरकार में निहित हैं। समवर्ती सूची के विषयों पर संघ और राज्य दोनों विधि बना सकते हैं। अनुच्छेद 256 से 263 के अधीन प्रशासनिक शक्तियों के वितरण की व्यवस्था की गई है। इस मामले में भी विभिन्न रीतियों से राज्यों पर केंद्रीय नियंत्रण का उपबंध किया गया है।
अनु.256 यह उपबंधित करता है कि प्रत्येक राज्य को कार्यपालिका शक्ति का इस प्रकार प्रयोग किया जाएगा जिसमें संसद द्वारा बनाई गई विधियों का अनुपालन सुनिश्चित रहे और संघ राज्यों को ऐसे निर्देश देने तक होती, जो केंद्र सरकार इस प्रयोजन के लिए आवश्यक समझती हो। इन निर्देशों का अनुपालन नहीं करने पर अनुच्छेद 356 के अधीन राज्य सरकारों को अपदस्थ करने तथा राष्ट्रपति शासन लागू करने की व्यवस्था है। इस अनुच्छेद से राज्यों की स्वायत्तता बिलकुल समाप्त हो जाती है।
संघ की आय के स्रोत भी राज्यों की तुलना में अधिक हैं। वित्तीय अधिकारों का प्रयोग करते हुए केंद्र राज्यों से भेदभाव कर सकता है। केंद्र एवं राज्यों के संबंधों के पुनर्विलोकन के लिए केंद्र सरकार ने सरकारिया आयोग की नियुक्ति भी की थी जिसने कई सिफारिशें लागू की थीं, किंतु अभी तक उसकी सिफारिशों पर विचार नहीं किया गया।



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