Daily Horoscope
✕

8 नवंबर: विनायकी चतुर्थी की कथा, यहां पढ़ें

Updated: रविवार, 7 नवंबर 2021 (14:22 IST)
Vinayaki Chaturthi Katha विनायक चतुर्थी कथा- एक दिन भगवान भोलेनाथ स्नान करने के लिए कैलाश पर्वत से भोगवती गए। महादेव के प्रस्थान करने के बाद मां पार्वती ने स्नान प्रारंभ किया और घर में स्नान करते हुए अपने मैल से एक पुतला बनाकर और उस पुतले में जान डालकर उसको सजीव किया गया।
 
पुतले में जान आने के बाद देवी पार्वती ने पुतले का नाम 'गणेश' ganesha रखा। पार्वतीजी ने बालक गणेश को स्नान करते जाते वक्त मुख्य द्वार पर पहरा देने के लिए कहा। 
 
माता पार्वती ने कहा कि जब तक मैं स्नान करके न आ जाऊं, किसी को भी अंदर नहीं आने देना। भोगवती में स्नान कर जब भोलेनाथ अंदर आने लगे तो बालस्वरूप गणेश ने उनको द्वार पर ही रोक दिया। भगवान शिव के लाख कोशिश के बाद भी गणेश ने उनको अंदर नहीं जाने दिया। गणेश द्वारा रोकने को उन्होंने अपना अपमान समझा और बालक गणेश का सिर धड़ से अलग कर वे घर के अंदर चले गए।
 
शिवजी जब घर के अंदर गए तो वे बहुत क्रोधित अवस्था में थे। ऐसे में देवी पार्वती ने सोचा कि भोजन में देरी की वजह से वे नाराज हैं इसलिए उन्होंने 2 थालियों में भोजन परोसकर उनसे भोजन करने का निवेदन किया। 
 
शिव ने लगाया था हाथी के बच्चे का सिर- 2 थालियां लगीं देखकर शिवजी ने उनसे पूछा कि दूसरी थाली किसके लिए है? तब पार्वतीजी ने जवाब दिया कि दूसरी थाली पुत्र गणेश के लिए है, जो द्वार पर पहरा दे रहा है। तब भगवान शिव ने देवी पार्वती से कहा कि उसका सिर मैंने क्रोधित होने की वजह से धड़ से अलग कर दिया है।
 
इतना सुनकर पार्वतीजी दु:खी हो गईं और विलाप करने लगीं। उन्होंने भोलेनाथ से पुत्र गणेश का सिर जोड़कर जीवित करने का आग्रह किया। तब महादेव ने एक हाथी के बच्चे का सिर धड़ से काटकर गणेश के धड़ से जोड़ दिया। अपने पुत्र को फिर से जीवित पाकर माता पार्वती अत्यंत प्रसन्न हुईं। Ganesh Katha
 
ALSO READ: Vinayaki Chaturthi 2021: 8 नवंबर को विनायकी चतुर्थी, मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला दिन, पढ़ें मुहूर्त एवं विधि

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

Shardiya navratri 2026: शारदीय नवरात्रि 9 दिनों तक ही क्यों मनाई जाती है?

शारदीय नवरात्रि 2026: नौदुर्गा में से किस माता ने किया किस असुर का वध?

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 09 अक्‍टूबर 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

सर्वपितृ अमावस्या 2026: 10 ऐसे रहस्य, जिन्हें जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

Sarvapitri Amavasya 2026: सर्वपितृ अमावस्या पर कर लें ये 5 छोटे काम, पितर खोल देंगे तरक्की और धन के बंद दरवाजे

अगला लेख