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Vinayaki Chaturthi 2021: 8 नवंबर को विनायकी चतुर्थी, मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला दिन, पढ़ें मुहूर्त एवं विधि

Updated: रविवार, 7 नवंबर 2021 (13:11 IST)
इस बार सोमवार, 8 नवंबर 2021 को विनायकी चतुर्थी व्रत मनाया जा रहा है। चतुर्थी सोमवार के दिन आने से इसका महत्व अधिक बढ़ गया हैं, क्योंकि सोमवार भगवान शिव जी का दिन है और चतुर्थी तिथि भगवान श्री गणेश की होने से पिता-पुत्र यानी शिव जी के साथ ही श्री गणेश का पूजन घर में सुख-समृद्धि देने वाला और सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला दिन माना जाता है। 
 
हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार श्री गणेश की कृपा प्राप्ति से जीवन के सभी असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं। पुराणों के अनुसार शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायकी तथा कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। प्रतिमाह शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी को विनायकी चतुर्थी (Vinayaka Chaturthi) व्रत कहते हैं। यह चतुर्थी भगवान श्री गणेश को समर्पित है। 
 
इस दिन श्री गणेश की पूजा दोपहर-मध्याह्न में की जाती है। इस दिन श्री गणेश का पूजन-अर्चन करना लाभदायी माना गया है। इस दिन गणेश की उपासना करने से घर में सुख-समृद्धि, धन-दौलत, आर्थिक संपन्नता के साथ-साथ ज्ञान एवं बुद्धि की प्राप्ति भी होती है। भगवान श्री गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, विघ्नहर्ता यानी आपके सभी दु:खों को हरने वाले देवता। इसीलिए भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए विनायक/विनायकी चतुर्थी और संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत किया जाता हैं। 
 
विनायक चतुर्थी में चंद्र दर्शन करने की मनाही होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विनायक चतुर्थी को चंद्र दर्शन करने से जीवन में कलंक लगता है। इसलिए इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से बचें। 
 
Vinayak Chaturthi worship विनायक चतुर्थी पूजन विधि-
 
* आज के दिन व्रतधारी ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नान करें, लाल रंग के वस्त्र धारण करें। 
 
* पूजन के समय अपने-अपने सामर्थ्य के अनुसार सोने, चांदी, पीतल, तांबा, मिट्टी अथवा सोने या चांदी से निर्मित शिव-गणेश प्रतिमा स्थापित करें। 
 
* संकल्प के बाद भगवान शिव और श्री गणेश का पूजन करके आरती करें। 
 
* तत्पश्चात अबीर, गुलाल, चंदन, सिंदूर, इत्र चावल आदि चढ़ाएं। 
 
* गणेश मंत्र- 'ॐ गं गणपतयै नम:' बोलते हुए 21 दूर्वा दल चढ़ाएं। 
 
* अब बूंदी के 21 लड्डुओं और शिव जी को मालपुए का भोग लगाएं। 
 
* पूजन के समय श्री गणेश स्तोत्र, अथर्वशीर्ष, संकटनाशक गणेश स्त्रोत का पाठ करें। 
 
* ब्राह्मण को भोजन करवाकर दक्षिणा दें। अपनी शक्ति हो तो उपवास करें अथवा शाम के समय खुद भोजन ग्रहण करें। 
 
* शाम के समय गणेश चतुर्थी कथा, श्रद्धानुसार गणेश स्तुति, श्री गणेश सहस्रनामावली, गणेश शिव चालीसा, गणेश पुराण आदि का स्तवन करें। संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करके श्री गणेश की आरती करें तथा 'ॐ गणेशाय नम:' और 'ॐ नम: शिवाय' मंत्र की माला जपें। 
 
विनायक चतुर्थी पढ़ें शुभ मुहूर्त Vinayak Chaturthi 2021 Shubh Muhurat- 
 
कार्तिक शुक्ल चतुर्थी का प्रारंभ 7 नवंबर को 04:21 पी एम से होकर 8 नवंबर 2021, सोमवार को 01:16 पी एम चतुर्थी समाप्त होगी।
 
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