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संकष्टी चतुर्थी व्रत की प्रामाणिक कथा

Updated: सोमवार, 9 जनवरी 2023 (13:02 IST)
Chaturthi Ganesh Worship 
 
हिन्दू धर्मशास्त्रों में माघ महीने का बहुत महत्व माना गया है। मान्यतानुसार माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी गणेश चतुर्थी भी कहते हैं। इस दिन तिल चतुर्थी का व्रत किया जाता है। यह व्रत घर-परिवार पर आ रही विपदा दूर करने में सक्षम है। इतना ही नहीं यह व्रत रुके मांगलिक कार्य संपन्न करवाता है तथा भगवान श्री गणेश जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति कराते हैं। 
 
संकष्टी चतुर्थी व्रत की पौराणिक गणेश कथा (Sankashti Chaturthi katha) के अनुसार एक बार देवता कई विपदाओं में घिरे थे। तब वह मदद मांगने भगवान शिव के पास आए। उस समय शिव के साथ कार्तिकेय तथा गणेश जी भी बैठे थे। देवताओं की बात सुनकर शिव जी ने कार्तिकेय व गणेश जी से पूछा कि तुममें से कौन देवताओं के कष्टों का निवारण कर सकता है। तब कार्तिकेय व गणेश जी दोनों ने ही स्वयं को इस कार्य के लिए सक्षम बताया।
 
इस पर भगवान शिव ने दोनों की परीक्षा लेते हुए कहा कि तुम दोनों में से जो सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके आएगा वही देवताओं की मदद करने जाएगा। भगवान शिव के मुख से यह वचन सुनते ही कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल गए। परंतु गणेश जी सोच में पड़ गए कि वह चूहे के ऊपर चढ़कर सारी पृथ्वी की परिक्रमा करेंगे तो इस कार्य में उन्हें बहुत समय लग जाएगा। तभी उन्हें एक उपाय सूझा। 
 
गणेश जी अपने स्थान से उठें और अपने माता-पिता की सात बार परिक्रमा करके वापस बैठ गए। परिक्रमा करके लौटने पर कार्तिकेय स्वयं को विजेता बताने लगे। तब शिव जी ने श्री गणेश से पृथ्वी की परिक्रमा ना करने का कारण पूछा। तब उन्होंने कहा- 'माता-पिता के चरणों में ही समस्त लोक हैं।'
 
यह सुनकर भगवान शिव ने गणेश जी को देवताओं के संकट दूर करने की आज्ञा दी। इस प्रकार शिव जी ने श्री गणेश को आशीर्वाद दिया कि चतुर्थी के दिन जो तुम्हारा पूजन करेगा और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देगा उसके तीनों ताप यानी दैहिक ताप, दैविक ताप तथा भौतिक ताप दूर होंगे। इस व्रत से व्रतधारी के सभी तरह के दुख दूर होंगे और उसे जीवन के भौतिक सुखों की प्राप्ति होगी।

चारों तरफ से मनुष्य की ख्याति तथा सुख-समृद्धि बढ़ेगी तथा पुत्र-पौत्रादि, धन-ऐश्वर्य की कमी नहीं रहेगी। अत: यह चतुर्थी हर विपदा दूर करने वाली मानी जाती है। 



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