biodatamaker

राजा हिरण्यकश्यप के अंत के लिए भगवान विष्णु ने किया था पुरुषोत्तम मास का निर्माण

Updated: मंगलवार, 22 मई 2018 (13:00 IST)
वायु पुराण के अनुसार मगध सम्राट बसु द्वारा राजगीर में 'वाजपेयी यज्ञ' कराया गया था। उस यज्ञ में राजा बसु के पितामह ब्रह्मा सहित सभी देवी- देवता राजगीर पधारे थे। यज्ञ में पवित्र नदियों और तीर्थों के जल की जरूरत पड़ी थी। कहा जाता है कि ब्रह्मा के आह्वान पर ही अग्निकुंड से विभिन्न तीर्थों का जल प्रकट हुआ था।
 
उस यज्ञ का अग्निकुंड ही आज का ब्रह्मकुंड है। उस यज्ञ में बड़ी संख्या में ऋषि महर्षि भी आते हैं। सर्वोत्तम मास में यहां अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति की महिमा है।
 
इस संबंध में किंवदंती है कि भगवान ब्रह्मा से राजा हिरण्यकश्यप (हिरण्यकश्यपु) ने वरदान मांगा था कि रात-दिन, सुबह-शाम और उनके द्वारा बनाए गए 12 मास में से किसी भी मास में उसकी मौत न हो। इस वरदान को देने के बाद जब ब्रह्मा को अपनी भूल का अहसास हुआ, तब वे भगवान विष्णु के पास गए।

भगवान विष्णु ने विचारोपरांत हिरण्यकश्यप के अंत के लिए तेरहवें महीने का निर्माण किया। तब से पुरुषोत्तम मास को 13वां महीना भी कहा जाने लगा। 

ALSO READ: विष्णुसहस्रनाम का पाठ पुरुषोत्तम मास में अवश्य पढ़ें, जानिए श्रीविष्णु के 1000 नाम
 
इसी अधिक मास में मगध की पौराणिक नगरी राजगीर में प्रत्येक ढाई से तीन साल पर विराट मलमास मेला लगता है, जहां लाखों श्रद्धालु आते हैं। वे पवित्र नदियों प्राची, सरस्वती और वैतरणी के अलावा गर्म जलकुंडों, ब्रह्मकुंड, सप्तधारा, न्यासकुंड, मार्कंडेय कुंड, गंगा-यमुना कुंड, काशीधारा कुंड, अनंत ऋषि कुंड, सूर्य-कुंड, राम-लक्ष्मण कुंड, सीता कुंड, गौरी कुंड और नानक कुंड में स्नान कर भगवान लक्ष्मी नारायण मंदिर में आराधना करते हैं।

राजगीर में मलमास के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में दिखती है गंगा-यमुना संस्कृति की झलक। मोक्ष की कामना और पितरों के उद्धार के लिए यहां श्रद्धालुओं तांता लगता है। अधिक मास के दौरान राजगीर में भव्य मेला भी लगता है।

- राम विलास

ALSO READ: आपने नहीं पढ़ी होगी अधिक मास की यह पौराणिक कथा
 
 

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

27 August Birthday: आपको 27 अगस्त, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (27 अगस्‍त, 2026)

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 27 अगस्‍त 2026: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय

सूर्य ग्रहण से भूकंप के बाद क्या चंद्र ग्रहण से पहले नेपाल में आई भीषण बाढ़? क्या ग्रहण से है इसका कनेक्शन?

रक्षा बंधन पर नारली पूर्णिमा क्यों मनाया जाता है, जानिए परंपरा और पूजा विधि

अगला लेख