suvichar

पौराणिक कथा : जब हनुमानजी ने शनिदेव को दिया दंड

Updated: बुधवार, 24 मई 2017 (12:00 IST)
आनंद रामायण में शनिदेव के घमंड के बारे में एक प्रसंग आता है। बहुत समय पहले शनिदेव ने लंबे समय तक भगवान शिव की तपस्या की। भगवान शिव ने शनिदेव की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें वर मांगने को कहा।
 
शनिदेव बोले हे भोलेनाथ इस सृष्टि में कर्म के आधार पर दंड देने की व्यवस्था नहीं है। इसके कारण मनुष्य ही नहीं, बल्कि देवता तक भी अपनी मनमानी करते हैं। अतः मुझे ऐसी शक्ति प्रदान करें ताकि में उद्दंड लोगों को दंड दे सकूं।
 
शनिदेव के इस वर को शिवजी ने मान लिया और उन्हें दंडाधिकारी नियुक्त कर दिया। वरदान पाकर शनिदेव घूम-घूम कर ईमानदारी से कर्म के आधार पर लोगों को दंडित करने लगे। वह अच्छे कर्म पर अच्छा और बुरे कर्मों पर बुरे कर्म पर बुरा परिणाम देते।
 
इस तरह समय बीतता गया। शनिदेव के इस कार्य से देवता, असुर और मनुष्य कोई भी अछूता नहीं रह सका। कुछ समय बाद शनि को अपनी इस शक्ति पर अहंकार हो गया। वह स्वयं को शक्तिशाली समझने लगे।

ALSO READ: शनि की साढ़ेसाती सताए तो बजरंगबली को बुलाएं
 
एक समय की बात है। रावण ने जब सीता का हरण कर लिया तो वानर सेना की सहायता से जब श्रीराम ने सागर पर बांध बना लिया, तब उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उन्होंने हनुमानजी को सौंपी।
 
हमेशा की तरह शनिदेव जब भ्रमण के लिए निकले, तो सागर पर बने सेतु पर उनकी नजर पड़ी जहां हनुमानजी ध्यानमग्न थे। यह देख शनिदेव क्रोधित हो गए और हनुमानजी का ध्यान भंग करने की कोशिश करने लगे। हनुमानजी को कोई प्रभाव नहीं पड़ा। शनिदेव का क्रोध सातवें आसमान पर पहुंच गया।
 
आखिर में शनिदेव ने उन्हें चुनौती दे दी। तब हनुमानजी ने विनम्रता से कहा शनिदेव में अभी अपने आराध्य श्रीराम का ध्यान कर रहा हूं। कृपया मेरी शांति भंग नहीं करें। लेकिन शनि अपनी चुनौती पर कायम रहे। तब हनुमानजी ने शनिदेव को अपनी पूंछ में लपेटकर पत्थर पर पटकना शुरू कर दिया। शनि लहूलुहान हो गए।

ALSO READ: हनुमानजी की पूजा से शनि के प्रकोप से क्यों बचते हैं, पढ़ें रोचक कथा
 
तब शनिदेव को अपनी भूल का अहसास हुआ कि उन्होंने हनुमानजी को को चुनौती देकर बहुत बड़ी गलती की। वह अपनी गलती के लिए मांफी मांगने लगे, तब हनुमानजी ने उन्हें छोड़ दिया।
 
शनि के अंग-अंग भयंकर पीड़ा हो रही थी। यह देखकर हनुमानजी को उन पर दया आ गई और उन्होंने शनिदेव को तेल देते हुए कहा कि इस तेल को लगाने से तुम्हारी पीड़ा दूर हो जाएगी, लेकिन इस तरह की गलती दोबारा मत करना।
 
कहते हैं उसी दिन से शनिदेव को तेल अर्पित किया जाता है।

 
Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 21 अगस्‍त 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

इंदौर में आयोजित होगा राज्य स्तरीय- लक्ष्य मंथन योगासन प्रतियोगिता

शुक्र और शनि का समसप्तक योग, 4 राशियों के लिए धन का योग, पलट जााएगी किस्मत

Fourth Sawan Somwar: सिर्फ जल चढ़ाना काफी नहीं, चौथे सावन सोमवार पर करें ये 5 महाउपाय

अगला लेख