क्यों हनुमानजी ने भीम को दिए थे अपने 3 बाल, जानें इस रहस्य को....

महाभारत और रामायण में कई रहस्य छुपे हुए हैं। ऐसा ही एक रहस्य है महाभारत में। यह उस समय की बात है, जब युद्ध में पांडवों ने कौरवों पर विजयश्री प्राप्त कर ली थी और पांडव हस्तिनापुर में सुखपूर्वक जीवन गुजार रहे थे। युधिष्ठिर के राज में प्रजा को किसी भी चीज की कोई कमी नहीं थी।
किंवदंतियों की मान्यता अनुसार  कि एक दिन देवऋषि नारद मुनि महाराज युधिष्ठिर के समक्ष प्रकट हुए और कहने लगे कि आप सभी पांडव यहां प्रसन्नतापूर्वक रह रहे हैं, लेकिन वहां स्वर्गलोक में आपके पिता बहुत दुखी हैं। देवऋषि के ऐसे वचन सुनकर युधिष्ठिर ने इसका कारण पूछा, तो देवऋषि ने कहा, 'वे अपने जिंदा रहते हुए करवाना चाहते थे लेकिन ऐसा वे कर नहीं सके इसलिए दुखी हैं। महाराज युधिष्ठिर आपको आपके पिता की आत्मा की शांति के लिए यह यज्ञ करवाना चाहिए।'
 
नारदजी के ऐसे वचन सुनकर युधिष्‍ठिर ने अपने पिता की आत्मा शांति के लिए राजसूय यज्ञ करने की घोषणा की। इसके लिए उन्होंने नारदजी के परामर्श पर भगवान शिव के परम भक्त ऋषि पुरुष मृगा को आमंत्रित करने का फैसला लिया। ऋषि पुरुष मृगा जन्म से आधे पुरुष शरीर के तथा नीचे से उनका पैर मृग का था, लेकिन वे कहां रहते थे यह किसी को पता नहीं था।
 
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