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भगवान कृष्ण से संबंधित 13 खास मंदिर

WD Feature Desk
19 अगस्त 2022 को कृष्‍ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। हालांकि अष्टमी तिथि 18 अगस्त को प्रारंभ होगी और 19 अगस्त को समाप्त होगी। आओ जानते हैं श्रीकृष्‍ण से संबंधित 13 ऐसा खास मंदिर जहां पर हर कृष्‍ण भक्त को जाना ही चाहिए।
 
1. केशव मंदिर, मथुरा : श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में कंस के कारागार में हुआ था। उस स्थान पर वर्तमान में एक हिस्से पर मंदिर और दूसरे पर मस्जिद बनी हुई है।
 
2. वृंदावन का मंदिर : मथुरा के पास वृंदावन में रमण रेती पर बांके बिहारी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। यह भारत के प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। वृंदावन के सारे घाट और मंदिर श्रीकृष्ण से जुड़े हैं। यह संपूर्ण क्षेत्र ही मंदिर है।
 
3. बरसाना का राधा-कृष्ण मंदिर : मथुरा के पास ही बरसान है। बरसाना के बीचोंबीच एक पहाड़ी है। उसी के ऊपर राधा रानी मंदिर है। दरअसल, राधा रानी बरसाने की ही रहने वाली थी।
 
4. गोकुल : जन्म लेने के बाद सबसे पहले श्रीकृष्ण का गोकल में ही पालन पोषण हुआ था। यहां पर नंदबादा और मां यशोदा का घर ही मंदिर है। यहां के सभी घाट दर्शनीय है।
 
5. गोवर्धन क्षेत्र : श्रीकृष्‍ण ने अपनी अंगुली पर जिस पहाड़ को उठा लिया था उसे गोवर्धन कहते हैं। गोवर्थन की परिक्रमा करना हर वैष्णव और कृष्‍ण भक्त का धर्म है।
 
6. द्वारिका का मंदिर : मथुरा को छोड़कर भगवान श्रीकृष्ण गुजरात के समुद्री तट स्थित नगर कुशस्थली चले गए थे। वहां पर उन्होंने द्वारिका नामक एक भव्य नगर बसाया। यहां भगवान श्रीकृष्ण को श्री द्वारकाधीश कहा जाता है।  वर्तमान में द्वारिका 2 हैं- गोमती द्वारिका, बेट द्वारिका।
 
7. भालका तीर्थ : गुजरात स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पास प्रभास नामक एक क्षेत्र है जहां एक स्थान पर एक वृक्ष ने नीचे भगवान श्रीकृष्ण लेटे हुए थे तभी एक बहेलिए ने अनजाने में उनके पैरों पर तीर मार दिया जिसे बहाना बनाकर श्रीकृष्ण ने अपनी देह छोड़ दी। यह विशिष्ट स्थल या देहोत्सर्ग तीर्थ नगर के पूर्व में हिरण्या, सरस्वती तथा कपिला के संगम पर बताया जाता है। इसे प्राची त्रिवेणी भी कहते हैं। इसे भालका तीर्थ भी कहते हैं।
8. जगन्नाथ मंदिर : उड़ीसा राज्य में पुरी का जगन्नाथ धाम चार धाम में से एक है। मूलत: यह मंदिर विष्णु के रूप पुरुषोत्तम नीलमाधव को समर्पित है। कहते हैं कि द्वापर के बाद भगवान कृष्ण पुरी में निवास करने लगे और बन गए जग के नाथ अर्थात जगन्नाथ। यहां भगवान जगन्नाथ बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं।
 
9. सांदीपनि आश्रम उज्जैन : मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थ उज्जैन में सांदीपनि आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण ने पढ़ाई की थी। इसीलिए यह स्थान भी बहुत महत्व रखता है। यहां भी श्रीकृष्ण का प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर है। यहीं पर 5 हजार वर्ष पुराना शिवलिंग भी है जो ऋषि सांदीपनि ने स्थापित किया था।
 
10. पंढरपुर का विठोबा मंदिर : पंढरपुर का विठोबा मंदिर पश्चिमी भारत के दक्षिणी महाराष्ट्र राज्य में भीमा नदी के तट पर शोलापुर नगर के पश्चिम में स्थित है। इस मंदिर में विठोबा के रूप में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। यहां भक्तराज पुंडलिक का स्मारक बना हुआ है।
 
11. श्रीनाथजी का मंदिर : श्रीनाथ का प्राकट्य गोवर्थन क्षेत्र के जतिपुरा में गांव में हुआ था। यही से विग्रह को ले जाकर नाथद्वारा में रखा गया। राजस्थान के नाथद्वारा में श्रीनाथजी का मंदिर। यहां भगवान श्रीकृष्ण को श्रीनाथ कहते हैं। यह मंदिर वैष्णव संप्रदाय के वल्लभ सम्प्रदाय के प्रमुख तीर्थ स्थानों में सर्वोपरि माना जाता है। नाथद्वारा धान उदयपुर से लगभग 48 किलोमीटर दूर राजसमंद जिले में बनास नदी के तट पर स्थित हैं। जब क्रूर मुगल शासक औरंगजेब ने गोकुल का मंदिर तोड़ने का आदेश दिया तब वल्लभ गोस्वामी यहां की मूर्ति लेकर नाथद्वारा में आ गए और यहां उस मूर्ति की पुन: स्थापना की। ये मंदिर 12वीं शताब्दी में बनाया गया था।
 
12. सांवरिया सेठ का मंदिर : भगवान श्री कृष्‍ण को सांवलिया या सांवरिया सेठ भी कहा जाता है। राजस्थान में सांवलिया सेठ का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है जहां प्रतिदिन हजारों लोग दर्शन करने आते हैं। श्रीकृष्ण को सांवरिया सेठ कहे जाने की कथा सुदामा से जुड़ी हुई है। सांवलिया सेठ के बारे में यह मान्यता भी है कि नानी बाई का मायरा करने के लिए स्वयं श्री कृष्ण ने वह रूप धारण किया था। 
 
13: रणछोड़राय मंदिर : इस नाम से दो मंदिर है। एक राजस्थान में और दूसरा गुजरात में। राजस्थान का मंदिर बालतोरा में है जबकि गुजरात का मंदिर डाकोर में है। हालांकि मूल मंदिर कहां है यह जानना मुश्‍किल है। मूल मंदिर को उसे गुफा के पास या भीतर ही होगा जहां पर श्रीकृष्‍ण छुप गए थे। श्रीकृष्‍ण का एक नाम रणछोड़राय इसलिए पड़ा क्योंकि वे कालयवन से युद्ध करने के बजाए भागकर एक गुफा में जाकर छुप गए थे।
 

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