जानिए महू की मैसॉनिक लॉज का राज

किंग सोलोमन ने डाली थी जिसकी नींव

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तो चलिए, अब आपके साथ हम इस गहरे रहस्य से पर्दा उठाने की कोशिश करते हैं। इस राज को उजागर करने की हमारी कोशिशों की शुरुआत हुई एक स्कूल प्रिंसिपल जेडी हॉलीवर से। जेडी हॉलीवर पिछले 22 सालों से मैसॉनिक लॉज से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने हमसे वादा किया कि वे अपने अन्य साथियों से बात करेंगे। उसके बाद ही हमें कुछ बताएंगे, क्योंकि मैसॉनिक गोपनीयता की शपथ लेते हैं। काफी अनुनय-विनय के बाद जेडी हॉलीवर और उनके साथियों ने हमसे इस लॉज से संबंधित अपने अनुभव हमें बताए।

मैसन्स ने हमें मैसन टैंपल में आमंत्रित किया। तय समय पर हम मैसन लॉज के बाहर पहुंच गए। लॉज के आसपास की जगह काफी सुनसान थी। घुप्प अंधेरे में लॉज का भवन सचमुच भयावह लग रहा था।

कुछ ही देर में मैसन हॉलीवर, मैसन राधा मोहन मालवीय, मैसन मेजर बीएल यादव, मैसन कमल किशोर गुप्ता भी लॉज के बाहर पहुंच गए। जल्द ही लॉज का दरवाजा खोला गया। मुख्य हॉल में कदम रखते ही हम चौंक गए। यहां एक आंख की तस्वीर लगी थी। कहा जाता है कि मैसन इसकी पूजा करते हैं।

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- श्रुति अग्रवाल आस्था और अंधविश्वास की इस कड़ी में हम आपको एक भुतहा घर का सच दिखाने जा रहे हैं। कुछ दिनों पहले हमारे एक साथी ने हमें बताया कि महू में एक भुतहा घर है। रात की बात छोड़िए, दिन में भी लोग यहां आने से डरते हैं। यहां के रहवासियों का कहना है कि रात को इस उजाड़ से दिखने वाले मकान से अजीबोगरीब आवाजें आती हैं। यह सब सुनने के बाद हमने रुख किया महू के इस भुतहा बंगले की ओर।वीडियो देखने के लिए फोटो पर क्लिक करें और फोटो गैलरी देखने के लिए यहां क्लिक करें-
महू (Masonic Lodge of Mahu) पहुंचने के बाद हमने भूत बंगले के आसपास रहने वाले लोगों से बातचीत की। बातचीत में पता चला एक राज। जी हां, तैयार हो जाइए। हम आपके सामने एक राज खोलने जा रहे हैं। राज मैसॉनिक लॉज का। यह वही लॉज है, जिसकी शुरुआत ईसा मसीह के जन्म से पहले रोम के सम्राट रहे के राज में हुई थी और आज दुनियाभर में जिसकी शाखाएं फैली हैं और जिसमें बुद्धिजीवी शामिल हैं।
लॉज के सदस्यों की संदिग्ध और गुप्त गतिविधियों के कारण इसे काफी रहस्यमय माना जाता है। कुछ लोगों का मानना है कि यहां तांत्रिक पूजा होती है तो कुछ लोग समझते हैं कि यहां पारलौकिक रहस्यों पर शोध किया जाता है। वहीं कुछ का मानना है कि मैसॉनिक्स काले शैतान की आराधना करते हैं, लेकिन इन अफवाहों के पीछे सत्यता क्या है? यह कोई नहीं जानता।
हॉल की दीवारों में पुराने मैसन्स के चित्र लगे थे। इन्हीं चित्रों के बीच सरदार वल्लभ भाई पटेल का चित्र भी लगा था। इसके बाद हम मैसॉनिक टैंपल में गए। मैसन्स ने हमें बताया की इस टैंपल की शुरुआत किंग सोलोमन ने की थी। यहां की दीवारों पर किंग सोलोमन की अवधारणा को समझाते हुए रेखाचित्र टांगे गए हैं। इस टैंपल में वे क्या करते हैं, यह एक गोपनीय बात है।



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