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दान सबसे बड़ा धर्म

Updated: शनिवार, 15 नवंबर 2014 (11:40 IST)
हिन्दू धर्म के अनुसार दान धर्म से बड़ा ना तो कोई पुण्य है, ना ही कोई धर्म।



 
दान, भीख, जो भी बदले में कुछ भी पाने की आशा के बिना किसी ब्राह्मण, भिखारी, जरूरतमंद, गरीब लोगों को दिया जाता है उसे दान कहा जाता है। 
 
'दान-धर्मत परो धर्मो भत्नम नेहा विद्धते।' 
 
सात्विक दान – किसी भी देश में जिस समय पर जिन चीजों की कमी हैं, उसे बिना किसी भी उम्मीद के जरूरतमंद लोगों को देना ही सात्विक दान है।
 
पद्म पुराण में, विष्णु फलक से कहते हैं - 'दान के लिए तीन समय होते हैं - नित्या (दैनिक) किया गया दान, नैमित्तिक दान कुछ प्रयोजन के लिए किया गया दान और काम्या दान किसी इच्छा के पूरी होने के लिए किया गया दान।

इसके अलावा चौथी बार दान प्रायिक दान होता है जो मृत्यु से संबंधित है।'


 

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