Mauni Amavasya 2022 : मौनी अमावस्या पर करें ये 11 उपाय, पितृ और देवताओं का मिलेगा आशीर्वाद

Mauni Amavasya
 
अमावस्या (Amavasya) हर माह में एक बार आती है। एक वर्ष में 12 अमावस्याएं होती हैं, इनमें सोमवती अमावस्या, भौमवती अमावस्या, मौनी अमावस्या, शनि अमावस्या, हरियाली, हलहारिणी अमावस्या, दीपावली अमावस्या, सर्वपितृ अमावस्या आदि प्रमुख होती है। अमावास्या के दिन पितृगणों की पूजा करने से वे खुश होकर वे धन, रक्षा, आयु तथा शक्ति प्रदान करते हैं।

आइए जानते हैं 11 खास उपाय-
Mauni Amavasya Remedies
2022

1. इस बार मौनी अमावस्या 31 जनवरी से शुरू होकर को मनाई जा रही है। इस दिन गंगा में स्नान करने का महत्व बढ़ जाता हैं।

2. मौनी अमावस्या के दिन व्रत-उपवास करने से उक्त व्यक्ति के पुत्री और दामाद की आयु बढ़ने की मान्यता है।



3. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस दिन लोगों को मौन रहकर पूजा-अर्चना करने से मुनि पद की प्राप्ति होती है।

4. मान्यतानुसार मौनी अमावस्या के दिन संगम तट और गंगा में स्वयं देवी-देवताओं का वास रहता है। ऐसे में इस दिन इन दोनों जगहों पर स्नान करना बहुत ही पुण्यदायी होता है।

5. मौनी अमावस्या के दिन दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। स्नान के बाद तिल से बनी हुई वस्तुएं जैसे तिल के लड्डू, तिल का तेल या तिल, आंवला, कंबल, गर्म वस्त्र, इत्यादि चीजें दान करना चाहिए।

6. इस दिन भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जला कर उन्हें अर्पित करने और उनकी आराधना करने से ईश कृपा प्राप्त होती है।

7. मौनी अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करके कच्चा सूत बाधें और पीपल के वृक्ष पर कच्चा दूध चढ़ाएं। ऐसा करना बहुत ही शुभ माना जाता है।

8. पितृ दोष दूर करने के लिए अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ में जल चढ़ाकर मिठाई अर्पित करने से पितृदेव प्रसन्न होकर खुशहाली का आशीष देते हैं।

9. इस दिन लोग पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए पितरों का ध्यान करते हुए सूर्यदेव को जल अर्पित करते हैं।

10. सूर्योदय से पहले मौनी अमावस्या के दिन जो व्यक्ति काले तिल जल में मिलाकर पितरों का तर्पण करता है, उसे स्वर्ग सुख प्राप्त होता है।

11. माघ माह की मौनी अमावस्या में पितरों के निमित्त तर्पण करना ज्यादा अच्‍छा होता है। यह दिन पितरों का पूजन और पितृ दोष निवारण के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पितृगण पितृलोक से संगम में स्नान करने आते हैं। अत: यह दिन देवता और पितरों का भी संगम का दिन माना जाता है।




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