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भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ, सिर्फ मिल सकेंगे वैद्य

Updated: बुधवार, 7 जून 2017 (11:27 IST)
हमारे सनातन धर्म की खूबसूरती यही है कि हमने ईश्वर को स्वयं से अभिन्न माना है। हमने अपने ईश्वर को सुलाया, जगाया, स्नान कराया, भोजन कराया, यहां तक कि ग्रहणकाल में सूतक भी लगाया। हमारा परमात्मा सर्दी-गर्मी से प्रभावित होता है। आपने ग्रीष्मकाल में कई मन्दिरों में भगवान के लिए वातानुकूलित लगे देखे होंगे वहीं सर्दियों में विग्रह को ऊनी पोशाकें धारण किए भी देखा होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे भगवान अस्वस्थ भी होते हैं। चौंकिए मत, भगवान जगन्नाथ स्नान यात्रा के पश्चात् ज्वर के कारण अस्वस्थ होते हैं। 
 
प्रति वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ की 'स्नान यात्रा' का महोत्सव मनाया जाता है। इस वर्ष यह महोत्सव 9 जून को मनाया जाएगा। इसमें भगवान का ठण्डे जल से अभिषेक किया जाता है व अभिषेक के उपरान्त भगवान को ज्वर होता है। भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ होने के कारण 15 दिनों तक अपने भक्तगणों को दर्शन नहीं देते। इस अवधि में केवल उनके निजी सहायक व वैद्य ही उनके दर्शन कर सकते हैं।

इन 15 दिनों की अवधि में भगवान जगन्नाथ को ज्वरनाशक औषधियों, फ़लों का रस, खिचड़ी, दलिया इत्यादि का भोग लगाया जाता है। इस अवधि को 'अनवसर' कहा जाता है। इस अवधि के बीत जाने पर भगवान पुन: स्वस्थ होकर भक्तों को दर्शन देने हेतु रथ पर सवार होकर मन्दिर से बाहर आते हैं। जिसे 'रथयात्रा' कहा जाता है। जो प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकलती है। इस वर्ष भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 25 जून 2017 को निकलेगी।
 
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
सम्पर्क : astropoint_hbd@yahoo.com
लेखक के बारे में
पं. हेमन्त रिछारिया
ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया ज्योतिष प्रभाकर उपाधि से सम्मानित हैं। विगत 12 वर्षों से ज्योतिष संबंधी अनुसंधान एवं ज्योतिष से जुड़ी गलत धारणाओं का खंडन कर वास्तविक ज्योतिष के प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहे हैं। कई ज्योतिष आधारित पुस्तकों का लेखन।.... और पढ़ें
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