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कब तक आएगा मानसून, क्या है ग्रहों के संकेत

शनिवार,मई 21, 2022
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Wall Clock Vastu : घर में दीवार घड़ी सभी के यहां होती है, लेकिन कई लोग इसे उचित दिशा में नहीं लगाते हैं और उचित घड़ी का चयन भी नहीं करते हैं। आओ जानते हैं घड़ी का वास्तु।
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भगवान शिव के प्रमुख गणों में से एक है नंदी। नंदी जी कैलाश पर्वत के द्वारपाल भी हैं। उनका एक स्वरूप महिष भी। महिष को बैल भी कहते है। जब भी हम शिव मंदिर में जाते हैं तो शिवलिंग के सामने कुछ दूरी पर नंदी महाराज विराजमान रहते हैं।
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Shukra ka mesh rashi mein parivartan 2022: 23 मई 2022 सोमवार को शुक्र ग्रह मीन राशि से निकलकर अब मेष राशि में प्रवेश करेगा। बताया जा रहा है कि शुक्र का यह गोचर शाम 8:39 बजे होगा। शुक्र ग्रह के इस राशि परिवर्तन से 7 राशियों पर पड़ेगा इसका सकारात्मक ...
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शनिदेव ने अपनी वक्र दृष्टि जिस भी देवता पर डाली वह सभी परेशा हो चुके हैं। इसलिए कहते हैं कि शनिदेव को प्रसन्न करना बहुत कठिन भी है और सरल भी है।
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Shani dev ki vakra drishti : शनिदेव व्यक्ति के अपराधों की सजा महादशा, ढैया या साढ़ेसाती के दौरान देते हैं। शनिदेव की वक्र दृष्टि से वही जातक बच पाता है जिसने निम्नलिखित 8 में से कोई भी कार्य नहीं किया हो। कहते हैं कि शनिदेव की नाराजगी व्यक्ति को एक ...
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ज्योतिष शास्त्र में रत्न पहनने के पूर्व कई निर्देश दिए गए हैं। रत्नों में मुख्यतः नौ ही रत्न ज्यादा पहने जाते हैं। सूर्य के लिए माणिक, चन्द्र के लिए मोती, मंगल के लिए मूंगा, बुध के लिए पन्ना, गुरु के लिए पुखराज, शुक्र के लिए हीरा, शनि के लिए नीलम, ...
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शनि ग्रह को बलवान करने, शनि की साढ़े साती, शनि की ढैय्या, दशा, महादशा या अन्तर्दशा में या शनि संबंधी किसी भी प्रकार की पीड़ा को शांत करने के लिए शनि के रत्न पहने जाते हैं। रत्नों के अलावा भी और भी कुछ पहना जाता है। आओ जानते हैं सभी के संबंध में ...
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Zodiac Sign Astrology : ज्योतिष मान्यता के अनुसार कुछ ऐसे रत्न होते हैं जिन्हें कुछ राशियों वाले जब पहनते हैं तो उनकी किस्मत बदलकर चमक जाती है, परंतु यदि यही रत्न दूसरी राशि वाले पहन लें तो उनके बुरे दिन प्रारंभ हो जाते हैं। आओ जानते हैं कि ऐसा ...
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नीलम को नीलमणि कहा जाता है। यह कई प्रकार की होती है। शनि का रत्न नीलम और नीलमणि में फर्क है। संस्कृत में नीलम को इन्द्रनील, तृषाग्रही नीलमणि भी कहा जाता है। आओ जानते हैं नीलमणि के 6 रहस्य।
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21 मई, शनिवार का दैनिक राशिफल, किसे मिलेगी शनिदेव की कृपा। किसे मिलेगा आज भाग्य का साथ। आज क्या कहती है आपकी राशि जानिए...
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21 मई 2022 : आपका जन्मदिन

शुक्रवार,मई 20, 2022
दिनांक 21 को जन्मे व्यक्ति निष्कपट, दयालु एवं उच्च तार्किक क्षमता वाले होते हैं। अनुशासनप्रिय होने के कारण कभी-कभी आप तानाशाह भी बन जाते हैं।
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शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022 संवत्सर नाम-राक्षस अयन-उत्तरायण मास-ज्येष्ठ पक्ष-कृष्ण ऋतु-ग्रीष्म वार-शनिवार तिथि (सूर्योदयकालीन)-षष्ठी नक्षत्र (सूर्योदयकालीन)-श्रवण योग (सूर्योदयकालीन)-शुक्ल करण ...
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पश्‍चिम में नास्त्रेदमस तो पूर्व में संत अच्युतानंद दास को सबसे बड़ा भविष्यवक्ता माना जाता है। अच्युतानंद दास का जन्म 10 जनवरी 1510 को ओड़ीसा के जगन्नाथ पुरी में हुआ था और उनका निधन 1631 में हुआ था। नास्त्रेदमस के जन्म 14 दिसंबर 1503 को फ्रांस के एक ...
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Kalashtami tithi ka mahatva : प्रति माह दो अष्टमी रहती है। कृष्‍ण पक्ष की अष्टमी को मासिक कालाष्टमी और शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मासिक दुर्गा अष्टमी कहते हैं। कालाष्टमी भगवान भैरव को समर्पित है। आओ जानते हैं कि इस बार ज्येष्ठ माह कालाष्टमी कब है। भैरव ...
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Significance of Nirjala Ekadashi : प्रतिवर्ष ज्येष्‍ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत 10 जून 2022 को रखा जाएगा। पद्मपुराण में निर्जला एकादशी व्रत द्वारा मनोरथ सिद्ध ...
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ज्येष्‍ठ माह में सूर्य जब रोहिणी नक्षत्र में 15 दिनों के लिए भ्रमण करने लगता है तब शुरुआता के 9 दिन नौतपा रहता। इस बार नौतपा 25 मई 2022 को प्रारंभ होगा, जो 3 जून तक चलेगा। आओ जानते हैं कि रोहिणी नक्षत्र क्या है और क्या है इसकी कथा।
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17 मई से ज्येष्ठ माह प्रारंभ हो गया है जो 14 जून तक रहेगा। हिन्दू पंचांग और कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ माह वर्ष का तीसरा महीना होता है। आओ जानते हैं इस माह के व्रत और त्योहार की लिस्ट।
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17 मई से ज्येष्ठ माह प्रारंभ हो गया है जो 14 जून तक रहेगा। इस माह में गर्मी अपने चरम पर होती है। इसी माह में नौतपा प्रारंभ होता है। ज्येष्ठ माह में इसीलिए जल का महत्व बढ़ जाता है। आओ जानते हैं ज्येष्‍ठ माह में जल का महत्व और शुभ पर्व।
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Maa Bhadrakali : ज्येष्ठ माह की एकादशी को भद्रकाली की जयंती मनाई जाती है। माता काली का ही एक रूप है भद्रकाली, जिनकी पूजा दक्षिण भारत में होती है। आओ जानते हैं कब है इनका प्रकटोत्सव, कैसे करें इनकी पूजा और जानिए मंत्र एवं स्तुति।
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