dharma sangrah

पति भी समझें पत्नी की परेशानियाँ

Written By ND
Updated: शनिवार, 30 अक्टूबर 2010 (12:08 IST)
- नम्रता नदीम

ND
राकेश के दफ्तर की छुट्टी यानी उसकी पत्नी अनु के लिए दुगुनी परेशानी होती है। अनु भी एक कंपनी में काम करती है और पूरे दिन काम करने के बाद जब वह थकी-माँदी घर लौटती है तो घर आते ही आराम से टीवी के सामने पसरे बैठे राकेश की फरमाइशें चालू हो जाती हैं। 'अरे यार, जरा कड़क सी चाय तो पिलाओ। पूरा दिन हो गया, एक ढंग की चाय नहीं मिली। और सुनो, खाना भी जल्दी बना लो, मुझे बहुत तेज भूख लगी है।'

बुरी तरह थकी अनु का मन और भी टूट जाता है। पूरे दिन की दौड़भाग के बाद ये तो नहीं कि राकेश उससे एक कप चाय को पूछ ले। उलटा उसे देखते ही राकेश अपने लिए हुकूम चलाने लगता है। इस सबके बाद अनु को खाना भी तैयार करना है और उसमें भी किसी तरह की मदद की कोई गुंजाइश नहीं है। यही नहीं, पूरा घर भी अस्त-व्यस्त पड़ा है।

कई कामकाजी महिलाओं की स्थिति कमोबेश ऐसी ही होती है। शाम को घर आने पर थकान के बावजूद कोई उसे चाय या पानी के लिए पूछने वाला नहीं होता। यदि किसी दिन पति पूरे दिन घर पर भी रहते हैं तब भी पति को घर के कामकाज से कोई मतलब नहीं होता।

वे टीवी के सामने बैठकर या सोए रहकर पूरा दिन गुजार देते हैं। इस तरह के पति कभी इस विषय में संवेदनशील नहीं होते कि पूरा दिन थक-हार कर आने वाली उनकी पत्नी को भी एक भावनात्मक संबल की जरूरत होती है।

अपनी जिम्मेदारी पहचानें
पतियों को हमेशा इस बात को समझना चाहिए कि पति और पत्नी एक ही गाड़ी के दो पहिए होते हैं और घर-गृहस्थी के कामों को निभाने की जिम्मेदारी दोनों की बराबर होती है। घर दोनों का होता है। इसलिए यह जरूरी नहीं कि घर की हर जिम्मेदारी पत्नी अकेले ही उठाए। इसमें पति के सहयोग की भी जरूरत होती है।

ND
घर और बाहर की जिम्मेदारी निभाते-निभाते वह थक जाती है। अगर पति का थोड़ा-सा सहयोग भी उसे मिलता है तो इससे उसको सुकून मिलता है।

माता-पिता सिखाएँ बेटे को दायित्व
आमतौर पर कई भारतीय परिवारों में पुरुषों का काम करना गलत समझा जाता है। ऐसे परिवारों में पलने वाले लड़कों की जब शादी होती है तो इन्हें घर के काम करने की कोई आदत नहीं होती, जो परेशानी का कारण बनती है। शादी एक जवाबदारी है, इसके बाद कोई व्यक्ति एक नहीं दो हो जाता है। इस स्थिति में अपनी जिम्मेदारी से बचना पुरुषों के लिए उचित नहीं है।

फिर आजकल तो लड़कियाँ भी घर से बाहर निकलकर काम करती हैं या अतिरिक्त जिम्मेदारियाँ भी संभालती हैं। ऐसे में लड़कों को भी उनका सहयोग करना चाहिए। यूँ भी घर से बाहर रहकर पढ़ने या करियर बनाने वाले लड़कों को घर और बाहर दोनों जिम्मेदारियाँ संभालनी पड़ती हैं, इसलिए थोड़ा-बहुत काम करना उन्हें भी आना ही चाहिए।

खासतौर पर आज के दौर में लड़कों को इस विषय में समझदारी से काम लेते हुए एक सजग, सचेत हर जिम्मेदारी में साथ निभाने वाला पति बनने के बारे में सोचना चाहिए।

विवाह के बाद लड़की को एक नए घर में अपनी जिम्मेदारियों को अच्छे ढंग से निभाना सिखाया जाता है। उसी तरह माता-पिता का यह दायित्व भी बनता है कि वे अपने बेटे को भी यह सिखाएँ कि वह पत्नी का सहयोग करे।

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

लोकतंत्र की पहली पाठशाला: छात्रसंघ चुनावों की वापसी क्यों जरूरी? जानें युवाओं की बड़ी जिम्मेदारी

गरीबी चुराने कोई नहीं आता!

9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस: जानिए इतिहास और इसका महत्व

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर निबंध: जानें भारत की आजादी का इतिहास और महत्व

तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने किया त्रिपक्षीय सैन्य समझौता