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दिलों की दूरियाँ नहीं पटती

Updated: गुरुवार, 10 जुलाई 2014 (12:53 IST)
NDND
' दोस्त' यह शब्द अपने आप में एक गूढ़ अर्थ रखता है, जिसका अभिप्राय है- जीवनभर साथ निभाने वाला व्यक्ति, एक ऐसा व्यक्ति जो आपके दिल के बहुत करीब हो, जो आपको बखूबी जानता हो। दोस्ती के बारे में कहा जाता है कि यह जितना अधिक मजबूत रिश्ता है, उतना ही नाजुक भी।

कभी लाख अपमान व प्रहार सहने पर भी दोस् त आत्मविश्वास बन हमारी हिम्मत बन जाता है, तो कभी एक छोटी सी चोट से काँच के खिलौने की तरह छन से टूटकर बिखर जाता है। इस बात का हमें तनिक भी पूर्वाभास नहीं होता है। हमारी जरा सी नासमझी कब हमसे हमारा सच्चा दोस्त छीन लेती है। इस बात का हमें तब अहसास होता है, जब हमारा दोस्त हमसे बहुत दूर चला जाता है।

दूरियाँ स्थानों की हो, तो कोई बात नहीं परंतु जब दिलों में दूरियाँ हो जाती है तथा मन में किसी के प्रति अविश्वास व दगाबाजी की भावना आ जाती है, तब यह सुंदर सा रिश्ता पलभर में ही टूटकर बिखर जाता है और रह जाते हैं केवल पश्च्याताप के आँसू।

  दूरियाँ स्थानों की हो, तो कोई बात नहीं परंतु जब दिलों में दूरियाँ हो जाती है तथा मन में किसी के प्रति अविश्वास व दगाबाजी की भावना आ जाती है, तब यह सुंदर सा रिश्ता पलभर में ही टूटकर बिखर जाता है और रह जाते हैं केवल पश्च्याताप के आँसू।      
कहते हैं 'मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, जो कभी अकेले नहीं रह सकता है।' मनुष्य की यही आवश्यकता दोस्ती के चोले में उसे अपनी जिंदगी से मिलवाती है। तभी तो हमारी हर मुसीबत व हर तकलीफ में बगैर कुछ कहे भी दोस्त हमारी हर बात समझ जाता है और हमारी मदद को तैयार हो जाता है।

दोस्त की यह मदद हम भले ही भूल जाते हैं, परंतु जीवन के उत्तरार्द्ध में जब हम अकेले होते हैं व तकलीफ में होते हैं तब जरूर रह-रहकर हमें अपने उस मददगार व समझदार दोस्त की याद आती है।

किसी को 'दोस्त' कहने मात्र से ही इंसान में जिम्मेदारी की भावना जाग्रत हो जाती है। अब यह हम पर निर्भर करता है कि हम बदलते मौसम की तरह अपने तेवर बदलकर जिम्मेदारियों से मुँह मोड़ लेते हैं या फिर दुखों की बरसात में भी हिम्मत की छतरी बन अपने दोस्त की सुरक्षा करते हैं। हर रिश्ते की तरह इस रिश्ते में भी जहाँ प्यार, विश्वास व आत्मीयता होती है, वहीं दर्द, शक व गलती की गुजांइश भी। अब आप ही निर्णय कर सकते हैं आप अपनी दोस्ती के पैमाने पर कितना खरा उतरते हैं?

जिंदगी की हर मुसीबतों में ढाल बन दोस्त हमें सुरक्षा प्रदान करता है। एक हमराज बन वह हमारा हमसाया बनकर साथ चलता है और 'मैं हूँ ना' कहकर हमारी हर गलती को सुधार देता है। परंतु नासमझी व कही-सुनी बातों में आकर यदि हम ऐसे दोस्त को खो देते हैं तथा ऐसा कार्य करते हैं, जिससे हमारे उस अपने का दिल टूट जाता है, तो सच कहूँ ऐसे इंसान से अधिक दुर्भाग्यशाली व्यक्ति कोई और नहीं होगा।

लेखक के बारे में
गायत्री शर्मा
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