Hanuman Chalisa

सहबा जाफरी की मर्मस्पर्शी कविता : पापा

Written By WD
Updated: बुधवार, 15 जून 2016 (12:32 IST)
पापा मेरी नन्ही दुनिया, तुमसे मिल कर पली-बढ़ी 
आज तेरी ये नन्ही बढ़कर, तुझसे इतनी दूर खड़ी
 
तुमने ही तो सिखलाया था, ये संसार तो छोटा है 
तेरे पंखों में दम है तो, नील गगन भी छोटा है 
 
कोई न हो जब साथ में तेरे, तू बिलकुल एकाकी है 
मत घबराना बिटिया, तेरे साथ में पप्पा बाकी हैं 
पीछे हटना, डरना-झुकना, तेरे लिए है नहीं बना 
आगे बढ़ कर सूरज छूना, तेरी आंख का है सपना 
 
तुझको तो सूरज से आगे, एक रस्ते पर जाना है 
मोल है क्या तेरे वजूद का दुनिया को बतलाना है
 
आज तो पापा मंजिल भी है, दम भी है परवाजों में 
एक आवाज नहीं है लेकिन, इतनी सब आवाजों में 
 
सांझ की मेरी सैर में हम-तुम, साथ में मिल कर गाते थे 
कच्चे-पक्के अमरूदों को, संग-संग मिल कर खाते थे
 
उन कदमों के निशान पापा, अब भी बिखरे यहीं-कहीं 
कार भी है, एसी भी है, पर अब सैरों में मज़ा नहीं 
 
कोई नहीं जो आंसू पोछें, बोले पगली सब कर लेंगे 
पापा बेटी मिलकर तो हम, सारे रस्ते सर कर लेंगे 
 
इतनी सारी उलझन है और पप्पा तुम भी पास नहीं 
ये बिटिया तो टूट चुकी है, अब तो कोई आस नहीं 
 
पर पप्पा ! तुम घबराना मत, मैं फिर भी जीत के आउंगी 
मेरे पास जो आपकी सीख है, मैं उससे ही तर जाऊंगी
 
फिर से अपने आंगन में हम साथ में मिल कर गाएंगे 
देखना अपने मौज भरे दिन फिर से लौट के आएंगे
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

सावन मास पर एक भावपूर्ण और मौलिक हिंदी कविता

Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

सभी देखें

आस्था की विजय: जब पंढरपुर में एक बालक के रक्षक बने स्वयं विट्ठल

मैं गीत बन अधरों पर आऊंगा

NEET Controversy: छात्रों की आड़ में अराजकता फैलाने की साजिश

Raksha Bandhan Essay: राखी पर्व पर हिन्दी निबंध: वर्तमान समय में रक्षा बंधन का त्योहार

Essay on Friendship Day: फ्रेंडशिप डे: दोस्ती के अटूट बंधन का खूबसूरत पर्व, पढ़ें हिन्दी में रोचक निबंध

अगला लेख