Hanuman Chalisa

16 जून : पिता का अनुसरण कर लिया तो नहीं पड़ेगा पछताना

Updated: शुक्रवार, 14 जून 2019 (16:47 IST)
मुझे नहीं पता कि आदर्श पिता की परिभाषा क्या होनी चाहिए? किसी के पिता नरम स्वभाव के होते हैं तो किसी के सख्त। लेकिन फिर भी हर एक बच्चे के लिए उसके पिता आदर्श ही होते हैं। माताओं को तो बहुत महत्व दिया जाता है। लेकिन वे इंसान जो बच्चों के साथ मां की तरह दिन-रात समय नहीं बिता पाते, खुद को अपने बच्चों के सामने अभिव्यक्ति करने में कहीं पीछे छुट जाते हैं, वे हैं पिता।


कुछ बच्चे अपने पिता की घर-परिवार के प्रति कर्तव्यनिष्ठा को देखकर उनके प्रेम का अंदाजा लगा लेते हैं, वहीं कुछ को बढ़ती उम्र के साथ अपने पिता का प्रेम समझ में आने लगता है। पिता ही वह है जिन्हें कभी मां की तरह अहमियत नहीं मिलती, जिनका अपने बच्चों के प्रति प्रेम का कभी जिक्र नहीं किया जाता और न ही वे खुद कभी यह जाहिर होने देते हैं कि वे आपकी कितनी परवाह करते हैं।

घर के खर्च, आपके स्कूल, कॉलेज, ट्यूशन, कपड़े, बाइक और अन्य शौक को पूरा करने के लिए वे दिन-रात एक कर देते हैं और हमें कभी महसूस तक नहीं होने देते कि इतनी मेहनत हमें एक एजुकेटेड, संस्कारी व गुणी इंसान बनाने के लिए की जा रही है। अपने शौक और इच्छाओं के लिए तो लिए तो उन्हें सोचने का समय ही नहीं मिलता है। उनकी सारी मेहनत तो केवल इसलिए होती है कि हमें आगे जाकर अपने जीवन में वे सभी संघर्ष न करने पड़ें जिनसे उन्हें होकर गुजरना पड़ा है। हमारे साधारण से दिखने वाले पिता हमारा जीवन आसान बनाने के लिए कई असाधारण परिस्थितयों से होकर गुजरते हैं।


माएं तो फिर भी कई बार घर व अन्य काम की अधिकता से चिड़चिड़ाते हुए हम पर एक बार अपना गुस्सा उतार देती हैं लेकिन वे पिता ही हैं, जो घर लौटने पर पूरा दिन कितना भी बुरा क्यों न बीता हो, कभी हमें पता ही नहीं चलने देते हैं। वे सारे दु:ख, परेशानियां, किसी बात की अनिश्चितता, चिंता आदि सबकुछ अपने में समाए हुए रहते हैं।

जब तक हम उनके साए में होते हैं, हमें जीवन की कोई कठिनाई छू नहीं पाती है। एक दौर ऐसा भी आता, जब हमें उनके कोई भी सुझाव सही नहीं लगते और हमें अपने मन की करने की आजादी चाहिए होती है। पिता हमें गलत निर्णय लेने से रोकते हैं लेकिन उस उम्र में हमें अपने आपसे सही और कुछ नहीं लगता।

जब हम ठोकर खाकर गिर जाते हैं और पछताते हैं तब वही पिता हमें संभालते हैं और दोबारा जीवन में फिर हिम्मत से चलने का हौसला देते हैं। वक्त रहते अगर पिता का अनुसरण कर लिया और उनके प्रेम को समझ लिया तो जीवन में कभी पछताना नहीं पड़ेगा।
 

ALSO READ: जी पिताजी, आया बाबूजी से लेकर यस पापा और हाय डैड तक का सफर
लेखक के बारे में
नम्रता जायसवाल

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

बड़बोले ट्रंप की घटिया बेशर्मी, अंकारा में नहीं था Trump को कोई खतरा

ब्रिक्स से दूरी बांग्लादेश को पड़ेगी भारी, तारिक रहमान के सम्मेलन में शामिल होने पर संशय

15 अगस्त विशेष: शहीदों के सपनों का भारत नारों से नहीं, हमारे चरित्र और कर्म से बनेगा

जब उम्मीद थक जाए, तब साहस काम आता है

असली पनीर और Analog Paneer में क्या है फर्क? खरीदने से पहले ऐसे करें पहचान

अगला लेख