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14 घंटे लंबी चर्चा के बाद गिरा विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव

Updated: रविवार, 8 जुलाई 2018 (11:02 IST)
रायपुर। छत्तीसगढ़ की चौथी विधानसभा के अंतिम सत्र के अंतिम दिन राज्य सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गया। विधानसभा में शुक्रवार को राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर 14 घंटे तक चर्चा हुई। चर्चा के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के नेताओं ने एक-दूसरे पर अश्लील सीडी मामला, भ्रष्टाचार, किसान आत्महत्या समेत कई अन्य मुद्दों को लेकर जमकर निशाना साधा।
 
चर्चा के बाद विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री रमन सिंह ने विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को कमजोर कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के खिलाफ कांग्रेस द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव जनता की आंखों में धूल झोंकने की एक असफल कोशिश है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने गत 15 वर्षों में कोई सकारात्मक भूमिका नहीं निभाई और कभी कोई वैकल्पिक नीति नहीं दी।
 
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की राजनीति सिद्धांतविहीन, दिशाहीन, विचारहीन, कार्यक्रमविहीन, नीतिविहीन और योजनाविहीन है। आज देश के 19 राज्यों में भाजपा और सहयोगी दलों की सरकार है। देश की कुल आबादी के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से में भाजपा की सरकारें हैं, जबकि कांग्रेस के पास 6 प्रतिशत आबादी का भी नेतृत्व नहीं है।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव के नाम पर इस बार आरोपपत्र को देखकर ही लगा कि कांग्रेस ने अपनी हार स्वीकार कर ली है। पहले आरोपपत्र में 168 बिंदु थे, लेकिन इस बार यह सिकुड़कर मात्र 15 रह गए हैं। जिस तरह कांग्रेस सिकुड़ गई है, उसी तरह अविश्वास प्रस्ताव भी सिकुड़ गया है।
 
रमन सिंह ने कहा कि कांग्रेस बिना किसी वैचारिक साम्य के राजनीति दलों से गठबंधन के लिए उतारू हैं, क्योंकि उसका एकमात्र लक्ष्य दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ गठजोड़ करना है, वहीं छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस गठबंधन के लिए तैयार है। एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय दल सत्ता के लिए छोटी-छोटी क्षेत्रीय पार्टियों के साथ गठबंधन करने लिए उतावला है।
 
मुख्यमंत्री ने इस दौरान 15 वर्ष के कार्यकाल के दौरान सरकार द्वारा किए गए विकास के कामों को सदन के सामने रखा और कहा कि राज्य की जनता चौथी बार भी अपना आशीर्वाद देगी। इससे पहले विपक्ष के नेता टीएस सिंहदेव ने भी सरकार पर जमकर निशाना साधा और कहा कि सरकार सभी मोर्चों पर विफल रही है।
 
सिंहदेव ने कहा कि सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। एक व्यक्ति के खिलाफ मामले निकाले जा रहे हैं। उन्होंने पार्टी प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल का नाम लेते हुए कहा कि उनके खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। लगातार उन्हें परेशान किया जा रहा है। सिंहदेव ने कहा कि इसके साथ ही राज्य के अन्य विधायक, जनप्रतिनिधि के साथ भी घटनाएं हो रही हैं। सत्तापक्ष या विपक्ष के विधायक के साथ जो घटनाएं हो रही हैं इससे लग रहा है कि सरकार ऐसे तंत्र को रोकने में असफल रही है।
 
विपक्ष के नेता ने रिंकू खनुजा की मौत का भी मामला उठाया और कहा कि उनके परिजनों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी, वह भी पूरी नहीं की गई। परिजन इस मामले में इंसाफ मांग रहे हैं।
 
उन्होंने कहा कि राज्य में विकास के इतने दावों के बीच गरीबों की संख्या में बढ़ोतरी क्यों हो रही है? साफ है कि अमीर और गरीब के बीच खाई बढ़ रही है। राज्य में स्कूल हैं लेकिन शिक्षक नहीं हैं। शिक्षा में गुणवत्ता की कमी है। जनप्रतिनिधियों के अधिकार छीने जा रहे हैं तथा प्रजातांत्रिक मूल्यों का अवमूल्यन हो रहा है।
 
सिंहदेव ने कहा कि राज्य का सभी वर्ग सरकार से नाराज है। शिक्षाकर्मी, नर्स, कर्मचारी वर्ग और कई संघ सरकार के खिलाफ मोर्चा निकाले हुए हैं। लेकिन सरकार इसके बावजूद विकास का दावा करती है जबकि सरकार ने सभी वर्ग का विश्वास खो दिया है।
 
चर्चा के दौरान विपक्ष के अन्य सदस्यों ने सरकार को अनेक मोर्चो पर विफल होने का आरोप लगाया। कांग्रेस के सदस्यों ने चर्चा के दौरान कहा कि राज्य में भाजपा की 15 साल की सरकार पूरी होने जा रही है। इस दौरान राज्य में कहीं भी विकास के काम नहीं हुए हैं। किसान आत्महत्या कर रहे हैं और युवाओं के पास नौकरी नहीं है। राज्य में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। कर्मचारी ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, वहीं नक्सली समस्या राज्य के नए जिलों तक फैल गई है।
 
कांग्रेस के आरोपों के जवाब में सत्तापक्ष के विधायकों और मंत्रियों ने कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को कमजोर कहते कहा कि राज्य की जनता ने राज्य में लगातार 3 बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाकर अपना विश्वास व्यक्त कर दिया है। हम चौथी बार राज्य में सरकार बनाएंगे।
 
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को भाजपा सरकार पर इसलिए विश्वास नहीं है, क्योंकि राज्य सरकार लगातार राज्य में विकास के काम कर रही है। किसानों और गरीब के लिए काम किया गया है। नए शिक्षण संस्थान खोले गए हैं। विधानसभा में शनिवार तड़के तक हुई चर्चा के बाद कांग्रेस द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गया।
 
राज्य में वर्ष 2003 से लगातार सत्ता में काबिज रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने अपने तीसरे कार्यकाल में तीसरी बार अविश्वास प्रस्ताव का सामना किया है। इससे पहले मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पिछले मानसून सत्र में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाई थी, जो लगातार 19 घंटे तक चली चर्चा के बाद गिर गया था। अविश्वास प्रस्ताव पर लंबी चर्चा और ध्वनिमत के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने इस विधानसभा के अंतिम सत्र की समाप्ति की घोषणा की। राज्य में इस वर्ष के आखिर में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। (भाषा)

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