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जानिए कैसे भुला बैठे मां की कमी को शावक!

अवनीश कुमार

Updated: रविवार, 14 मई 2017 (15:34 IST)
लखनऊ। क्या आप जानते हैं कि एक इंसान एक मां की तरह किसी जानवर को प्यार कर सकता है और वही वह जानवर भी अब उसके बगैर न तो खाना खाता है और न ही खेलता है।
 
आज हम आपको ऐसे ही एक जानवर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके जीवन में शुरू से लेकर अभी तक सिर्फ और सिर्फ इंसानों ने ही इस जानवर को नया जीवन दिया है और तब से ही जानवर सिर्फ इंसानों को ही अपनी मां समझते हैं।
 
आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कौन सा जानवर है, जो इंसानों को अपनी मां समझते हैं तो आइए हम आपको बताते हैं कि मां से बिछड़े 1 या 2 दिन के तेंदुए के शावकों ने कभी सोचा नहीं होगा कि कोई इंसान मां का प्यार दे सकता है।
 
लेकिन जंगल में कड़ाके की ठंड से जीवन व मौत का संघर्ष कर रहे 2 शावकों को कानपुर प्राणी उद्यान प्रबंधन ने ऐसा प्यार दिया कि वे मां की कमी को भूल बैठे। करीब 3 माह में यहां के कर्मचारियों से ये शावक ऐसे घुल-मिल गए हैं कि उनको देखे बिना भोजन ही ग्रहण नहीं करते।
 
प्राणी उद्यान प्रबंधन से प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तरप्रदेश के अमरोहा जनपद के जंगल में करीब 3 माह पहले 2 तेंदुए के शावक कड़ाके की ठंड के चलते जीवन व मौत से संघर्ष कर रहे थे।
 
तभी उधर से गुजर रहे किसान रघुवीर सिंह की नजर पड़ी और वह उन्हें घर उठा लाया। लेकिन बेहद नाजुक स्थिति देख नजदीक के पशु अस्पताल में भर्ती करा दिया जिसके बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने कानपुर प्राणी उद्यान प्रबंधन को सूचना दी।
 
कानपुर प्राणी उद्यान के डॉक्टर आरके सिंह ने बताया कि जब हम लोग अस्पताल से इन शावकों को यहां लाए तब ये मुश्किल से 3 या 4 दिन के जन्मे हुए थे। आंखें भी नहीं खुली थीं। उस दौरान भीषण ठंड थी। वहां से इन शावकों को तत्काल प्राणी उद्यान लाया गया और कर्मचारी कर्णपाल, डॉ. यूजी श्रीवास्तव व खुद की रेखरेख में इलाज किया गया और ये धीरे-धीरे स्वस्थ होने लगे।
 
इनकी देखरेख व इलाज के साथ वह प्यार दिया गया कि जो मां भी नहीं दे सकती थी। जिसके चलते आज अगर दूसरा कर्मचारी इन्हें भोजन दे तो ये खाते ही नहीं हैं और दिन में एक बार इनके पास हाजिरी जरूर बजानी पड़ती है।
 
कर्णपाल ने बताया कि जबसे ये यहां आए तो मैंने एक दिन भी छुट्टी नहीं ली। जब पूछा गया कि इनका नाम क्या है? तो बताया कि डॉ. सिंह ने नर का नाम चांद रखा और मादा शावक का नाम चांदनी रखा है। चांद को प्यार से 'चंदू' कहकर पुकारा जाता है।
 
चंदू, चांदनी कहते ही बाड़े में अपने पास बुलाने के लिए ये उछलने लगते हैं और जब आधा-एक घंटे तक साथ प्यार कर लेते हैं तब भोजन करते हैं। डॉ. आरके सिंह ने बताया कि जब इनको यहां लाया गया था तब इनकी हालत बहुत नाजुक थी। करीब 2 माह तक कर्मचारी कर्णपाल ने अपनी गोद में बैठाकर इनको दूध पिलाया। कभी-कभार तो गोद में ही ये टॉयलेट भी कर देते थे। अब ये गोश्त खाने लगे हैं और 3 बार इन्हें भरपेट भोजन दिया जाता है।
 
कर्णपाल ने बताया कि मैंने इनको बेटे की तरह पाला है। एक बार बीमार होने पर डॉक्टर की अनुपस्थिति पर स्वयं ऑक्सीजन लगाया था। डॉ. यूजी श्रीवास्तव ने बताया कि इनकी ग्रोथ बेहतर चल रही है और ये स्वस्थ हैं। उम्मीद है कि करीब 3 माह बाद इन्हें अस्पताल से बाड़े में शिफ्ट कर दिया जाएगा जिससे ये दर्शकों का मनोरंजन करते देखे जाएंगे।
 
और आगे कहा कि ये इतने जानकार हैं कि स्टाफ को कोई भी व्यक्ति पास आता है तो ये उछल-कूद करने लगते हैं और नजदीक आने पर एक पैर चूमेगा तो दूसरा सिर पर चढ़ जाता है।
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