हिंदी को बढ़ावा, गुस्से में करुणानिधि

चेन्नई| भाषा| पुनः संशोधित गुरुवार, 19 जून 2014 (16:57 IST)
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चेन्नई। केंद्रीय गृह मंत्रालय का अपने अफसरों को निर्देश कि फेसबुक और ट्‍विटर जैसी पर हिंदी में ही लिखें, डीएमके प्रमुख एम. करुणानिधि को रास नहीं आ रहा है। उन्होंने मंत्रालय के इस निर्देश की आलोचना की है।


डीएमके प्रमुख ने कहा कि केंद्र सरकार का यह कदम गैर हिंदी भाषी लोगों को दूसरे दर्जे के नागरिक मानने की कोशिश नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि भाषा की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई। हिन्दी विरोधी आंदोलन इतिहास के पन्नों में दर्ज है।

करुणानिधि ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गैर हिन्दी भाषी लोगों पर हिन्दी थोपने के बजाय देश विकास पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने नेहरू के उस आश्वासन को भी याद दिलाया जिसमें उन्होंने कहा था कि जब तक गैर हिंदी भाषी लोग चाहेंगे, अंग्रेजी ही देश की आधिकारिक भाषा होगी।



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