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रामानंद सागर की रामायण की 4 बा‍तें जो आपको वाल्मीकि कृत रामायण में नहीं मिलेंगी

शनिवार,मार्च 28, 2020
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'राम' सिर्फ एक नाम नहीं हैं और न ही सिर्फ एक मानव। राम परम शक्ति हैं। प्रभु श्रीराम के द्रोहियों को शायद ही यह मालूम है कि वे अपने आसपास नर्क का निर्माण कर रहे हैं। इसीलिए यह चिंता छोड़ दो कि कौन प्रभु श्रीराम का अपमान करता है और कौन सुनता है। कौन ...
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प्रभु श्रीराम के जन्म समय के संबंध में बहुत ही विरोधाभास और मतभेद हैं। शोध कुछ और कहते हैं एवं पुराण कुछ और कहते हैं। आओ जानते हैं 5 खास बातें।
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वाल्मीकि कृत रामायण और तुलसीदास कृत रामायण में कई बड़े अंत हैं। आओ जानते हैं 10 खास बड़े अंतर।
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1- मानस में राम शब्द 1443 बार आया है। 2 - मानस में सीता शब्द 147 बार आया है। 3 - मानस में जानकी शब्द 69 बार आया है। 4 - मानस में बड़भागी शब्द 58 बार आया है। 5 - मानस में कोटि शब्द 125 बार आया है।
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गुहराज निषाद ने अपनी नाव में प्रभु श्रीराम को गंगा के उस पार उतारा था। आज गुहराज निषाद के वंशज और उनके समाज के लोग उनकी पूजा अर्चन करते हैं। चैत्र शुक्ल पंचमी को उनकी जयंती है। अंग्रेजी तारीख के अनुसार 29 मार्च को। आओ जानते हैं केवट प्रसंग के प्रमुख ...
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देशभर में विभिन्न स्थानों 15 मार्च से 30 मार्च तक राम राज्य महोत्सव मनाया जा रहा है जबकि वीएचपी देश के 2.75 लाख गांवों में 25 मार्च से 9 अप्रैल तक श्रीराम महोत्सव का आयोजन करेगी। 29 मार्च को राम राज्य महोत्सव है। चैत्र शुक्ल पंचमी को राम राज्य ...
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त्रेतायुग में श्रीराम को जब अपनी माता कैकेयी के शाप से वनवास हुआ तो उनके कुल पुरुष भगवान सूर्य बड़े ही दुखी हुए। उन्होंने हनुमान जी को आदेश दिया कि वनवास के दौरान राम को होने वाली कठिनाईयों में सहायता करोगे।
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भगवान श्रीराम जहां जहां गए वहां का एक अलग ही इतिहास और परंपरा बन गया। उन्होंने अपने जीवन में कई ऐसे कार्य किए जिनसे समाज, परिवार और जनता को लाभ मिला। आओ जानते हैं ऐसे ही कुछ कार्यों के बारें में।
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केसरी और अंजना के पुत्र हनुमानजी का पवनदेव ने भी पालन-पोषण किया था। उन्हें रुद्रावतार माना जाता है इसलिए उन्हें शंकरसुमन भी कहते हैं। हम बताने जा रहे हैं हनुमानजी के ऐसे 10 रहस्य जिसके बारे में आप शायद ही जानते होंगे। इनमें से कुछ रहस्यों की हम ...
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रामायण काल के राज्य किष्किंधा में सूर्यपुत्र बाली का राज था। उसका एक भाई था जिसका नाम सुग्रीव था। सुग्रीव इंद्रदेव का पुत्र था। अर्थात बाली और सुग्रीव की माता एक ही थी, लेकिन पिता अलग-अलग थे। सुग्रीव की पत्नी का नाम रूमा था तो बाली की पत्नी वानर ...
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माना जाता है कि रणक्षेत्र में वानर सेना तथा राम-लक्ष्मण में भय और निराशा फैलाने के लिए रावण के पुत्र मेघनाद ने अपनी शक्ति से एक मायावी सीता की रचना की, जो सीता की भांति ही नजर आ रही थीं। मेघनाद ने उस मायावी सीता को अपने रथ के सामने बैठाकर रणक्षेत्र ...
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भगवान शिव का धनुष बहुत ही शक्तिशाली और चमत्कारिक था। शिव ने जिस धनुष को बनाया था उसकी टंकार से ही बादल फट जाते थे और पर्वत हिलने लगते थे। ऐसा लगता था मानो भूकंप आ गया हो। यह धनुष बहुत ही शक्तिशाली था। इसी के एक तीर से त्रिपुरासुर की तीनों नगरियों को ...
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सीता ने अग्निपरीक्षा दी थी या नहीं दी थी? यह सवाल अभी भी बना हुआ है। यह भी कहा जाता है कि उन्होंने अग्निपरीक्षा दी थी लेकिन राम ने सीता का त्याग नहीं किया था। जिस सीता के बिना राम एक पल भी रह नहीं सकते और जिसके लिए उन्होंने सबसे बड़ा युद्ध लड़ा उसे ...
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पौराणिक काल में ऐसी कई महिलाएं हुई हैं जिन्हें हम आदर्श और उत्तम चरित्र की महिलाएं मानते हैं। लेकिन उनमें से सर्वोत्तम हैं माता सीता। जैसे श्रीराम को पुरुषों में उत्तम पुरुषोत्तम कहा गया है, उसी तरह माता सीता भी महिलाओं में सबसे उत्तम हैं। इसके कई ...
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देवी सीता मिथिला के राजा जनक की ज्येष्ठ पुत्री थीं इसलिए उन्हें 'जानकी' भी कहा जाता है। कहते हैं कि राजा जनक को माता सीता एक खेत से मिली थी। इसीलिए उन्हें धरती पुत्री भी कहा जाता है। लक्ष्मण, भारत और शत्रुघ्न की पत्नियां माता सीता की बहनें थीं।
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अयोध्या की सरयू नदी के दाहिने तट पर ऊंचे टीले पर स्थित हनुमानगढ़ी सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है। यहां तक पहुंचने के लिए लगभग 76 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। यहां पर स्थापित हनुमानजी की प्रतिमा केवल छः (6) इंच लंबी है, जो हमेशा फूलमालाओं से सुशोभित ...
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अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि जब रावण कैलाश पर्वत उठा सकता है तो शिव का धनुष कैसे नहीं उठा पाया और भगवान राम ने कैसे उस धनुष को उठाकर तोड़ दिया? आओ इस सवाल का जवाब जानते हैं।
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भारत की प्राचीन नगरियों में से एक अयोध्या को हिन्दू पौराणिक इतिहास में पवित्र और सबसे प्राचीन सप्त पुरियों में प्रथम माना गया है। आओ जानते हैं इसका प्राचीन और पौराणिक इतिहास।
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भगवान श्रीराम अपना 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद पुन: लौट आए थे। कहते हैं कि वे सीधे अयोध्या न जाते हुए पहले नंदीग्राम भगवान श्रीराम अपना 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद पुन: लौट आए थे। कहते हैं कि वे सीधे अयोध्या न जाते हुए पहले नंदीग्राम ...
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