Hanuman Chalisa

हनुमन्नाटक रामायण किसने लिखी?

Updated: सोमवार, 8 मार्च 2021 (16:01 IST)
हनुमानजी के द्वारा लिखी रामायण को हनुमद रामायण कहते हैं जबकि हनुमन्नाटक रामायण अलग है। विद्वान लोग कहते हैं कि सर्वप्रथम रामकथा हनुमानजी ने लिखी थी और वह भी एक शिला (चट्टान) पर अपने नाखूनों से लिखी थी। यह रामकथा वाल्मीकिजी की रामायण से भी पहले लिखी गई थी और यह 'हनुमद रामायण' के नाम से प्रसिद्ध है। लेकिन इस बार जानिए कि हनुमन्नाटक रामायण क्या है।
 
कहते हैं कि हनुमन्नाटक रामायण को संवत 1660 में संस्कृत भाषा के विद्वान कवि हृदयरामजी ने लिखी थी जो श्रीराम के जीवन चरित पर आधारित है। हृदयरामजी एक पंजाबी थे। माना जाता है कि संपूर्ण ग्रंथ लगभग 1 हजार 500 छंदों में लिपिबद्ध है।
 
हृदयरामजी कृष्णदास के पुत्र थे। यह रामायण नाटक के रूप में लिखी गई है इसीलिए इसका नाम हनुमन्नाटक है।
 
हनुमन्नाटक रामायण के अंतिम खंड में हनुमद रामायण के बारे में लिखा है-
'रचितमनिलपुत्रेणाथ वाल्मीकिनाब्धौ
निहितममृतबुद्धया प्राड् महानाटकं यत्।।
सुमतिनृपतिभेजेनोद्धृतं तत्क्रमेण
ग्रथितमवतु विश्वं मिश्रदामोदरेण।।'
हनुमन्नाटक अंक 14-96
 
अर्थात : इसको पवनकुमार ने रचा और शिलाओं पर लिखा था, परंतु वाल्मीकि ने जब अपनी रामायण रची तो तब यह समझकर कि इस रामायण को कौन पढ़ेगा, श्री हनुमानजी से प्रार्थना करके उनकी आज्ञा से इस महानाटक को समुद्र में स्थापित करा दिया, परंतु विद्वानों से किंवदंती को सुनकर राजा भोज ने इसे समुद्र से निकलवाया और जो कुछ भी मिला उसको उनकी सभा के विद्वान दामोदर मिश्र ने संगतिपूर्वक संग्रहीत किया।

Show comments

सभी देखें

गुप्त नवरात्रि में ये मंत्र जप लिया तो तुरंत ही दूर होंगे संकट और माता का मिलेगा आशीर्वाद

गुंडिचा मंदिर क्यों है जगन्नाथ रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव? जानिए 5 खास बातें

भगवान जगन्नाथ की मौसी कौन हैं? जानिए रथयात्रा से जुड़ी यह रोचक परंपरा

गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक की सही व्याख्या क्या है? मौलाना जरजिस अंसारी के दावे की पड़ताल

पुरी के जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा का इतिहास: कब, कैसे और क्यों हुई शुरुआत?

सभी देखें

बुध ग्रह का मिथुन राशि में मार्गी गोचर, 4 राशियों के लिए रहेगा शुभ समय

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की दसवीं महाविद्या मां कमला, जानिए पूजा विधि

भड़ली नवमी 2026: इस शुभ दिन क्या करें, क्या न करें? जानिए खास जानकारी

शनि वक्री होकर रेवती नक्षत्र में, क्या भारत में आने वाला है कोई बड़ा संकट? ज्योतिषीय संकेतों से जानें

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की नौवीं देवी मां मातंगी, जानिए पूजा विधि

अगला लेख