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ईद 2022: खुशी का दिन है ईद-उल-फित्र, अल्लाह से मिलता है तोहफा

मंगलवार,मई 3, 2022
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Ramadan Eid 2022 रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है। इस पूरे माह में रोजे रखे जाते हैं। इस महीने के खत्म होते ही दसवां माह शव्वाल शुरू होता है। इस माह की पहली चांद रात ईद की चांद रात होती है।
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Eid al-Fitr 2022 अभी रमजान माह चल रहा है और रमजान को अल्लाह की नेमतों और बरकतों से भरपूर माह के रूप में जाना जाता है। इस्लाम धर्म के पवित्र महीने रमजान के बाद ईद उल-फ़ित्र का त्योहार मनाया जाता है।
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Ramadan 2022 रमजान माह के बाद आनेवाले 10वें महीने शव्वाल की पहली तारीख को ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है। ईद कब मनाई जाएगी यह चांद के दीदार होने पर तय किया जाता है।
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Shab-E-Qadr 2022 शबे-कद्र क्या है? शब के मा'नी है रात, कद्र के मा'नी है इज्जत। शबे-कद्र यानी ऐसी शब (रात) जो कद्र (इज्जत, सम्मान) वाली है। माहे-रमजान के आखिरी अशरे में ही शबे-कद्र यानी इज्जत और अजमत वाली ये रात आती है।
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वर्ष 2022 में शुक्रवार, 29 अप्रैल 2022 को शबे कद्र (shab e qadr ki raat) या लैलत अल-कद्र (Laylat al-Qadr) की रात मनाई जाएगी। इस्लाम धर्म में माहे रमजान में आने वाली शब-ए-कद्र की रात बेहद अहम मानी जाती है। मतांतर के चलते तारीख अलग हो सकती है।
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Ramadan 2022 जब रोजादार बंदा परहेजगारी के साथ अल्लाह को पुकारता है यानी इबादत करता है तो अल्लाह अपना वादा निभाता है।' यानी फरियाद सुनता है और गुनाह माफ कर देता है।
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Ramadan 2022 छब्बीसवें रोजे के साथ ताक रात (विषम संख्या वाली रात्रि) यानी शबे-कद्र आएगी ही। सत्ताईसवां रोजा तो वैसे भी दोजख से निजात के अशरे (नर्क से मुक्ति के कालखंड) में अपनी अहमियत रखता ही है।
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Ramadan 2022 जिस दिन 26वां रोजा होता है, उस तारीख़ को माहे-रमजान की सत्ताईसवीं रात होती है। इस रात को ही अमूमन अल्लाह की मेहरबानी की खास रात में शुमार किया जाता है।
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Ramadan 2022 माहे-रमजान का कारवां यानी पच्चीसवां रोजा दोजख से निजात का अशरा अर्थात् नर्क से मुक्त का कालखंड चल रहा है। अल्लाह की मेहरबानी से अब रोजेदारों के रोजा पच्चीसवें रोजे तक पहुंच गया है। 25th day of ramadan month
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Ramadan 2022 पाकीजा आयतों की रोशनी में रमजान के इस आखिरी अशरे और खास तौर से चौबीसवें रोजे की फजीलत को अच्छी तरह समझा जा सकता है। 24th Day Roza
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23rd Day Roza 23वां रोजा रोजेदार को अल्लाह की तौफीक पाने के लिए जरूरतमंदों को जकात, सदका, भिक्षा और मुफ्त में अन्न-वस्त्र देने की शिक्षा देता है। इसके अलावा संयमित और पवित्र आचरण तथा नेक बात को अमल में लाने की सीख भी देता है।
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Ramadan 2022 माहे रमज़ान को मज़हबे-इस्लाम में ख़ास मुक़ाम हासिल है। पाकीज़गी (पवित्रता) और परहेज़गारी की पाबंदी के साथ रखा गया रोज़ा रोज़ेदार को इबादत की अलग ही लज़्ज़त देता है।
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अली इब्ने अबी तालिब यानी हजरत अली अ. (Hazrat Ali) की शहादत 21 रमजान (माहे रमजान) (Ramadan) सन् 40 हिजरी को इराक के कूफा शहर में हुई थी
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History Of 21st Ramadan इक्कीसवां से तीसवां रोजा तक के 10 दिन और 10 रातें रमजान माह का आख़िरी अशरा यानी अंतिम कालखंड कहलाती है। चूंकि आख़िरी अशरे में ही लैलतुल क़द्र/शबे-क़द्र यानी वह सम्माननीय रात की विशिष्ट रात्रि जिसमें अल्लाह यानी ईश्वर का स्मरण ...
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History Of 20th Ramadan बीसवां रोजा दरअसल मगफिरत के अशरे की आख़िरी कड़ी है। जैसा कि पहले भी बयान किया जा चुका है कि ग्यारहवें रोज़े से शुरू होकर बीसवें रोज़े तक की बीच के दस दिनों की रोजादार की परहेज़गारी
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मगफिरत का अशरा (मोक्ष का कालखंड) अल्लाह (ईश्वर) के जिक्र पर (ईमान की पुख्तगी के साथ) जोर देता है। इसलिए उन्नीसवां रोजा अल्लाह की मुसलसल (लगातार) याद है और रोजादार के लिए दुआ की मुकम्मल (पूर्ण) फरियाद है।
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कुरआने-पाक की सूरह 'हूद' की तेईसवीं आयत (आयत नंबर-23) में जाहिर कर दिया गया है-'जो लोग ईमान लाए और नेक अमल किए और अपने परवरदिगार के आगे आजिजी (याचना) की, यही साहिबे-जन्नत (स्वर्ग के अधिकारी यानी पात्र ) हैं। हमेशा इसमें (जन्नत में) रहेंगे।
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मगफिरत (मोक्ष) के अशरे के आईने में देखें तो सत्रहवां रोजा आखिरत की फ़िक्र है, अल्लाह का जिक्र है। इस बात को इस तरह समझना होगा-किसी भी शख्स के सामने मोटे तौर पर दो ही तरह से फिक्र होती है, दुनियावी (सांसारिक) और दीनी (धार्मिक)।
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इबादत इमारत की तरह है, ईमान बुनियाद की मानिन्द है। इस्लाम मजहब अल्लाह (ईश्वर) पर ईमान लाना और अल्लाह के पैगंबर के अहकामे शरीअत को दिल से तस्लीम (स्वीकार) करना दरअसल मगफिरत (मोक्ष) का सिलसिला मानता है। रोजा भी इसी की एक कड़ी है।
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Ramadan 2022 in Hindi दरअसल पंद्रहवां रोजा रोजा वादे की पाबंदी और अल्लाह की रजामंदी भी है। कुरआन की सूरह सफ की आयत नंबर-3 में जिक्र है- 'अल्लाह के नजदीक ये बात बहुत नाराजी की है कि ऐसी बात कहो जो करो नहीं।'
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Ramadan Mubarak 2022 माहे-मुबारक रमजान का कारवां अब चौदहवें रोजे तक आ पहुंचा है। रोज़ादार के लिए वैसे तो हर रोजा खुशियों का खजाना है। मगफिरत के इस अशरे में चौदहवां रोजा जन्नत के दरवाजे पर सब्र की दस्तक है।
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Ramadan 2022 रोजा अल्लाह से वास्ता है। तक़्वा (संयम) रोजे की शर्त है। तरीके से रखा गया रोजा, रोजादार के लिए सवाब ही सवाब है। रोजा नेकी के मकान में मगफिरत का चिराग है।
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रमज़ान ख़ुशबुओं का ख़जाना है। इबादत, परह़ेजगारी का आस्ताना है। बारहवां रोज़ा ईमान के इत्र में मग़फ़िरत की महक है। यानी ग्यारहवें रोज़े की फ़ज़ीलत के बयान में तफ़सील दी गई है कि अल्लाह से गिड़गिड़ाकर बंदा जब अपने गुनाहों की माफ़ी मांगता हैं
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Ramadan Month 2022 इस्लाम मजहब में मोक्ष के लिए रोजा यानी मगफिरत का रास्ता। रमज़ान के मुबारक माह के ग्यारहवें रोजे से मगफिरत का अशरा शुरू हो जाता है जो बीसवें रोजे तक रहता है। 11th Day of Ramadan in Hindi
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Ramadan Month 2022 रमजान माह के तीस रोजे दरअसल तीन कालखंड पर आधारित हैं। शुरुआती दस दिनों यानी रोजों का अशरा 'रहमत' यानी कृपा का है। बीच के दस रोजों का अशरा 'मग़फ़िरत' यानी मोक्ष और आख़िरी दस रोजों का अशरा दोज़ख़ यानी नर्क से 'निजात' दिलाने का है...
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Ramadan Festival 2022 जकात (दान) का जिक्र हर मजहब में है। मिसाल के तौर पर जैन धर्म (मजहब) में जिस अपरिग्रह (जरूरत से ज्यादा धन/वस्तुएं अपने पास नहीं रखना) की बात की गई है उसकी बुनियाद में जकात (दान) ही तो है यानी जखीरा (संग्रह) मत करो और जरूरतमंदों ...
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Ramadan 2022 रमजान का तो हर रोजा खुशहाली का खजाना और पाकीजगी का पैमाना है। रमजान की बरकतों की तहरीर का ये कारवां माशाअल्लाह आठवें रोजे तक पहुंच गया है।
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Ramadan Festival 2022 रमजान माह का पहला अशरा (प्रारंभ यानी शुरू के दस रोजे) रहमत (ईश्वर की कृपा) का माना जाता है। यानी शुरुआती दस रोजे किसी दरिया के मानिन्द हैं जिसमें अल्लाह की रहमत का पानी बहता रहता है। Seventh day of roza
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पवित्र कुरआन के पच्चीसवें पारे (अध्याय-25) की सूरह शूरा की तिरालीसवीं आयत में ज़िक्र है : 'व लमन सबरा व़गफरा इन्ना ज़ालिका लमिन अज़मिल उमूर'- 'जो सब्र करने वाले हैं और रहम करने वाले हैं... 6th day of Ramadan
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अभी रमज़ान का मुबारक माह चल रहा है और पांचवां रोजा आ गया है। दुनिया के हर मज़हब में अपने-अपने मज़हबी तरीक़े से लोग उपवास (रोजा) रखते हैं। हर शख़्स
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Ramadan month 2022 रोजा नेकी का छाता है। जिस तरह छतरी या छाता बारिश या धूप से अपने लगाने वाले की हिफ़ाज़त करता है, ठीक उसी तरह रोजा भी रोजादार (रोजा रखने वाले) की हिफ़ाजत (सुरक्षा) की गारंटी है।
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Third roza in ramadan 2022 मंज़िल पर पहुंचना तब आसान हो जाता है जब राह सीधी हो। मज़हबे इस्लाम में रोजा रहमत और राहत का राहबर (पथ-प्रदर्शक) है।
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